बिलासपुर में सड़क हादसा: रफ्तार गाड़ी ने 15 गौवंशों को मौत के घाट उतारा, चालक फरार!

A speeding car collides with a group of cows on a highway at sunset, with several cattle injured or lying on the road and others attempting to escape; dramatic clouds and a sense of urgency highlight the tragic accident in Bilaspur.

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): बिलासपुर के रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर आज एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। लिमतरा सरगांव के पास एक तेज रफ्तार गाड़ी ने सड़क पर आवारा घूम रहे 16 गौवंशों को बुरी तरह मार दिया। इस हादसे में 15 गायें चल बसीं, जबकि एक गौवंश बुरी तरह जख्मी है। जिस रफ्तार से गाड़ी चल रही थी, उससे लगता है कि चालक ने स्पीड लिमिट का जरा भी ध्यान नहीं रखा।
हादसे के बाद आरोपी चालक मौके से फरार हो गया। इस वजह से बचाव कार्य और राहत में भी देर हुई। दुर्घटना स्थल पर कई घंटे तक जाम लगा रहा, क्योंकि लाशों को हटाने में वक्त लगा।

गौसेवकों की आवाज बुलंद

घटना की खबर मिलते ही स्थानीय गौसेवक संगठन तुरंत स्पॉट पर पहुंच गए। उन्होंने घटना को लेकर प्रशासन के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। वे बोले, “20 दिन के भीतर ये तीसरी बड़ी घटना है! इससे पहले रतनपुर, चकरभाठा, सिलपहरी, ढेंका जैसी जगहों पर भी ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें 50 से ज्यादा गौवंशों की जान चली गई।”
गौसेवकों ने कहा, “लेते हैं चंदे, लगाते हैं धारा, पर समस्या का असली समाधान नहीं हो रहा।” प्रशासन ने पहले भी धारा 163 (मवेशियों के प्रति दया की कमी) के तहत कार्रवाई की थी, लेकिन बावजूद इसके ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं।

समाज, सड़क और सवाल

बिलासपुर इलाके में मवेशियों का सड़क पर आवारा घूमना आम बात है। यहां कृषि, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण जीवन में मवेशी बेहद अहम हैं। लेकिन सड़क दुर्घटनाएं बताती हैं कि समस्या कहीं गहरी है।
सबसे बड़ी बात—यहां सड़क के किनारे पशु-मार्ग, स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड या ठोस बाड़ अभी भी नदारद हैं। जाहिर है, सुरक्षा के नाम पर कोई बड़ी तैयारी नहीं हुई है।
और भी चौंकाने वाली बात—केंद्रीय सड़क मंत्रालय ने पशु-सुरक्षा के लिए गाइडलाइन्स बनाई हैं, लेकिन जमीन पर हो कुछ नहीं रहा।

जिम्मेदार कौन?

  • ग्रामीणों की लापरवाही: मवेशियों को खुला छोड़ने की आदत नहीं बदली, तो दुर्घटनाएं रोकना मुश्किल।
  • प्रशासन की निष्क्रियता: नियम-कानून तो हैं, पर जमीन पर अन्दाजा लगाइए—एक्शन कहीं दिखाई नहीं देता।
  • चालकों की मनमानी: तेज रफ्तार, संयम का अभाव—और बस, जान पर बन आई।
  • जन जागरूकता का घाटा: पशुपालक और चालक, दोनों की समझ में सुरक्षा का ख्याल कहीं पीछे छूट गया है।

हल क्या हो सकता है?

  • मवेशियों की देखभाल: ग्रामीणों को चाहिए कि वे अपने मवेशियों को खुले में न छोड़ें, बल्कि चारागाह या सुरक्षित जगह बनाएं।
  • सड़क पर सुधार: जरूरत है पशु-मार्ग, बाड़, चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर की।
  • कानून की धाक: रफ्तार पकड़ने वालों पर कानून का सख्त पालन जरूरी।
  • जागरूकता बढ़ाओ: गांव-गांव में जाकर लोगों को समझाओ कि सड़क पर मिनिट भी आवारा मवेशी, हादसे का सबब बन सकते हैं।

सारांश:
बिलासपुर में गौवंशों की सड़क दुर्घटनाएं कोई नई बात नहीं रह गई हैं। प्रशासन ठेले जा रहा है, नागरिक बेचैन हैं, और बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। स्टोरी के नीचे हम आपका इंतजार कर रहे हैं—बताइए, आपके इलाके में क्या हाल है? क्या आपने कभी ऐसी घटना देखी है? अपनी बात कमेंट में जरूर लिखें।

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