छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि 1 सितंबर 2025 से राज्य के सभी निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कैशलेस इलाज की सुविधा बंद हो जाएगी। यह फैसला उन करोड़ों भारतीयों के लिए एक बड़ा झटका है जो आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते हैं।
भुगतान विवाद की जड़ में छिपी समस्या
IMA छत्तीसगढ़ के इस कड़े फैसले के पीछे मुख्य कारण छह महीने से लंबित भुगतान की समस्या है। संगठन का दावा है कि राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का भुगतान नहीं मिला है। मार्च 2025 से अब तक का पूरा भुगतान रोक दिया गया है और केवल सितंबर-अक्टूबर 2024 का आंशिक भुगतान हुआ था।
सबसे गंभीर बात यह है कि कुछ अस्पतालों को 2023 से ही भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। पहले से अप्रूव्ड मामलों को भी रिजेक्ट कर दिया गया, जबकि मरीज इलाज करवाकर डिस्चार्ज हो चुके थे। दवाइयों, जांच और उपकरणों की लागत बढ़ने के बावजूद 7-8 वर्षों से पैकेज दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है।
IMA की प्रमुख मांगें:
- योजना का संचालन ट्रस्ट मोड में हो
- बकाया भुगतान तुरंत और ब्याज सहित किया जाए
- योजना समीक्षा समिति बनाई जाए जिसमें IMA और हॉस्पिटल बोर्ड के प्रतिनिधि हों
- राज्य/जिला निगरानी समिति और शिकायत निवारण समिति बनाई जाए
- क्लेम डाटा और ऑडिट रिपोर्ट 2019 से अब तक की सार्वजनिक की जाए
- IT प्लेटफॉर्म पर डैशबोर्ड के जरिए सभी क्लेम की जानकारी उपलब्ध कराई जाए
350 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया
IMA का दावा है कि राज्य सरकार पर 350 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। संगठन के अनुसार, छह महीने से भुगतान की प्रक्रिया रुकी हुई है और नियमित भुगतान का सिस्टम नहीं बन पाया है। इस वित्तीय संकट के कारण निजी अस्पताल अब कैशलेस सेवा जारी रखने में असमर्थ हैं।
दूसरी तरफ, राज्य सरकार का दावा है कि 2025 तक का पूरा भुगतान कर दिया गया है। लेकिन IMA और निजी अस्पतालों की आपत्ति है कि वास्तविकता इससे अलग है। यह भुगतान विवाद न केवल अस्पतालों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि गरीब मरीजों के स्वास्थ्य अधिकार पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन
इस गंभीर स्थिति के बीच छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “निजी अस्पतालों को 1 सितंबर का इंतजार नहीं करना होगा। 1 सितंबर से पहले निजी अस्पतालों को पेमेंट कर देंगे। जुलाई तक का पेमेंट 2-3 दिन के भीतर कर दिया जाएगा”।
यह आश्वासन इस बात का संकेत है कि सरकार इस समस्या की गंभीरता को समझ रही है और जल्द से जल्द समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार जल्द ही IMA के साथ बैठक कर समाधान निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर प्रभाव
यदि यह स्थिति 1 सितंबर तक नहीं सुलझी, तो सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। अब तक जो परिवार आयुष्मान कार्ड के जरिए लाखों रुपए तक का कैशलेस इलाज मुफ्त में करवा रहे थे, उन्हें अब निजी अस्पतालों में अपनी जेब से पैसा देना होगा।
प्रभावित होने वाले मरीज:
- कैंसर और हृदय रोग के मरीज
- डायलिसिस की जरूरत वाले किडनी के मरीज
- सर्जरी की आवश्यकता वाले रोगी
- महंगी दवाइयों पर निर्भर मरीज
- नियमित जांच करवाने वाले क्रॉनिक रोगी
यह स्थिति न केवल मरीजों के आर्थिक बोझ को बढ़ाएगी, बल्कि कई गंभीर मामलों में इलाज में देरी का कारण भी बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो राज्य में गरीब मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान योजना की स्थिति
यह समस्या केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। हाल ही में हरियाणा में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी, जहां 7 अगस्त 2025 से 650 निजी अस्पतालों ने आयुष्मान सेवा बंद कर दी थी। हरियाणा में 500 करोड़ रुपए की बकाया राशि के कारण यह स्थिति पैदा हुई थी।
राष्ट्रीय IMA ने हरियाणा का समर्थन किया है और कहा है कि भुगतान में देरी से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। यह दिखाता है कि यह समस्या केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि एक व्यापक चुनौती है जिसका समाधान राष्ट्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए।
आगे की राह
छत्तीसगढ़ सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह IMA की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जल्द से जल्द भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करे। स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन सकारात्मक संकेत है, लेकिन अब वास्तविक कार्रवाई की जरूरत है।
तत्काल समाधान की आवश्यकता:
- बकाया भुगतान का तुरंत निपटान
- नियमित भुगतान प्रणाली का विकास
- पारदर्शी निगरानी व्यवस्था का गठन
- पैकेज दरों की समीक्षा और संशोधन
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रियल-टाइम अपडेट
यदि सरकार इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान नहीं देती, तो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की समस्या हो सकती है। आयुष्मान भारत योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना की सफलता के लिए सभी हितधारकों के बीच समन्वय और नियमित भुगतान व्यवस्था आवश्यक है।
मरीजों के लिए सुझाव
इस अनिश्चितता के दौरान आयुष्मान कार्डधारकों को निम्नलिखित सुझावों पर अमल करना चाहिए:
- स्थानीय सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं की जांच करें
- इलाज से पहले अस्पताल से पुष्टि करें कि आयुष्मान सेवा उपलब्ध है या नहीं
- आपातकालीन स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें
- आयुष्मान हेल्पलाइन 14555 या 1800-11-4477 पर संपर्क कर अपडेट लें
छत्तीसगढ़ में आयुष्मान कार्ड से इलाज की यह समस्या न केवल एक प्रशासनिक चुनौती है, बल्कि यह लाखों गरीब परिवारों के स्वास्थ्य अधिकार का सवाल भी है। सरकार और IMA के बीच जल्द समझौता होना न केवल मरीजों के हित में है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए भी आवश्यक है।