छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में माओवादी समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। जिले में 30 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता को प्रदर्शित किया है। यह घटना न केवल सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता को दर्शाती है बल्कि सरकार के विकास कार्यों और पुनर्वास योजनाओं की प्रभावशीलता को भी स्थापित करती है।
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि यह अब तक के सबसे बड़े आत्मसमर्पण की घटनाओं में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सफलता राज्य सरकार की व्यापक पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों और क्षेत्र में चल रहे निरंतर विकास कार्यों का संयुक्त परिणाम है। उप मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय अन्य माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों और अपने जीवन को बेहतर दिशा प्रदान करें।
बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की समस्या दशकों से चली आ रही है, लेकिन हाल के वर्षों में राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई समग्र रणनीति के कारण स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। इस रणनीति में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय आदिवासी समुदाय में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है।
आत्मसमर्पण की यह घटना एक अलग मामला नहीं है। इससे पहले 17 अगस्त को गरियाबंद जिले में भी चार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। रायपुर रेंज के महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा ने इसे गरियाबंद पुलिस और पूरे राज्य के लिए अभूतपूर्व सफलता बताया था। उन्होंने बताया कि ये चारों नक्सली एक दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में सक्रिय थे और उन्होंने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। इन आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 19 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
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विशेष रूप से उल्लेखनीय बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को बताया कि माओवादी संगठनों में कई युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आना चाहते हैं, लेकिन वे संगठन द्वारा बंधक बनाकर रखे जा रहे हैं। यह जानकारी माओवादी संगठनों के भीतर के अंतर्विरोध और युवाओं की बदलती मानसिकता को दर्शाती है।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तत्काल नकद सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके परिवारजनों को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाता है। यह नीति न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि समुदायिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है।
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हालांकि इन सफलताओं के बावजूद क्षेत्र में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं। सोमवार को बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में माओवादियों द्वारा लगाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस के विस्फोट में एक जवान की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। बस्तर के महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि यह घटना डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड की टीम के माओवादी विरोधी अभियान के दौरान हुई।
यह घटना दर्शाती है कि जहां एक ओर माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं और मुख्यधारा में लौट रहे हैं, वहीं कुछ कट्टर तत्व अभी भी हिंसा के रास्ते पर चल रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सुरक्षा बलों को निरंतर सतर्क रहना होगा और अपनी रणनीति को लगातार अपडेट करना होगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का दृष्टिकोण केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समग्र विकास पर केंद्रित है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, विद्यालयों की स्थापना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार, रोजगार गारंटी योजनाओं का विस्तार और आदिवासी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
विकास और सुरक्षा की इस दोहरी रणनीति का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार की नीति सही दिशा में जा रही है। स्थानीय समुदायों में भी सरकार के प्रति विश्वास बढ़ रहा है और वे सक्रिय रूप से विकास कार्यों में भागीदारी कर रहे हैं।
आने वाले समय में इस तरह की और भी सफलताओं की उम्मीद की जा सकती है यदि सरकार अपनी वर्तमान नीति को बनाए रखे और सुरक्षा बल अपनी प्रभावशीलता को बरकरार रखें। बीजापुर में 30 माओवादियों का आत्मसमर्पण निश्चित रूप से एक मील का पत्थर है जो छत्तीसगढ़ के शांति और विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है।