30 जुलाई को छत्तीसगढ़ में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई! Enforcement Directorate (ED) ने राज्य भर में एक साथ 18 ठिकानों पर तड़के छापा मारा। यह सब Chhattisgarh Medical Services Corporation Limited (CGMSC) के 500-650 करोड़ रुपये के मेडिकल सप्लाई घोटाले को लेकर हुआ है।
ED के साथ-साथ Economic Offences Wing (EOW) की टीमें भी मैदान में उतरीं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और कई टॉप अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है।
इस पूरे मामले का केंद्र है Mokshit Corporation – एक दुर्ग आधारित कंपनी जिस पर CGMSC के अधिकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप है।
दुर्ग में तीन बड़े ठिकानों पर रेड:
- मोक्षित कॉर्पोरेशन के मुख्य ऑफिस पर छापा
- कंपनी की रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को भी घेरा
- सभी साइटों को तुरंत सील कर दिया गया
रायपुर में भी बवाल:
CGMSC के Technical General Manager Kamalkant Patanwar के भाठागांव स्थित घर पर भी विस्तृत तलाशी हुई। अधिकारियों ने मोबाइल फोन, कंप्यूटर और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बरामद किए।
⏰ 10 घंटे की मैराथन पूछताछ
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कमलकांत पटनवार से लगातार 10 घंटे तक पूछताछ हुई। ED के अधिकारियों ने उनसे कड़े सवाल किए और मोबाइल, लैपटॉप और अन्य दस्तावेज़ जब्त किए।
इसके अलावा कई अन्य बड़े अफसरों को भी हिरासत में लिया गया:
- Vasant Kaushik (General Manager)
- Dr. Anil Parsai (Deputy Director, Health)
कानूनी चेतावनी: हाल के वर्षों में हाई कोर्ट ने ऐसी लंबी पूछताछ पर नाराजगी जताई है और एजेंसियों को मानवाधिकार का सम्मान करने को कहा है। हालांकि, अगर जांच अधिकारी को लगता है कि व्यक्ति जांच में बाधा डाल सकता है, तो वे प्रक्रिया में लचीलापन दिखा सकते हैं।
💰 घोटाले की अंदरूनी कहानी
यह कैसे हुआ? आरोप है कि CGMSC ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए दवाइयां, मेडिकल उपकरण और रिएजेंट जरूरत से कहीं ज्यादा महंगे दामों पर खरीदे। मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसके साझीदारों से यह सब बाजार भाव से कई गुना ऊंची कीमत पर लिया गया।
2023 में अरबों की खरीदारी: स्थानीय एजेंसियों का कहना है कि CGMSC ने 2023 में ही अरबों रुपये का सामान खरीद लिया, जबकि स्वास्थ्य केंद्रों में इसकी जरूरत ही नहीं थी।
EDTA टेस्ट ट्यूब का गोरखधंधा:
- बाजार में कीमत: 8.50 रुपए
- CGMSC ने खरीदा: 2,352 रुपए में
- यानी 276 गुना ज्यादा पैसा!
CBC मशीन का मामला:
- बाजार दर: 5 लाख रुपए
- मोक्षित ने बेचा: 17 लाख रुपए में
- यानी 3 गुना से भी ज्यादा!
कुल नुकसान: इस तरह की गड़बड़ियों से राज्य का 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
यह कोई पहली बार नहीं है! जनवरी 2025 में भी EOW-ACB ने मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसके साझीदारों पर छापा मारा था। तब बिलिंग और सप्लाई चेन में गड़बड़ियां सामने आई थीं।
Mokshit Corporation के डायरेक्टर समेत कई लोगों को पहले भी हिरासत में लिया जा चुका है।