यस बैंक को मिला पुनर्गठन के बाद सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा, जून तिमाही में 59% की जोरदार छलांग

"A Yes Bank branch with a security guard and a customer reading a document outside; signage showing 'DEDICATED MSME BRANCH' and 'SPECIALISED AGRI BRANCH' – Source: Times of India | With Alert Nation News logo."

📍 AlertNationNews | मुंबई ब्यूरो रिपोर्ट

यस बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹801 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 59.4 प्रतिशत अधिक है। यह बैंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि मार्च 2020 में पुनर्गठन के बाद यह उसका अब तक का सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा है।

📊 मुनाफे में उछाल के पीछे की मुख्य वजहें:

बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) प्रशांत कुमार ने कहा कि मुनाफे में इस जबरदस्त उछाल के पीछे तीन मुख्य कारण हैं –

  1. नॉन-इंटरेस्ट इनकम (गैर-ब्याज आय) में तेज़ वृद्धि,
  2. कॉस्ट एफिशिएंसी (लागत दक्षता) में सुधार,
  3. और स्थिर एसेट क्वालिटी (संपत्ति गुणवत्ता)।

💰 आय और मार्जिन में बढ़त:

  • बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 5.7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,371.5 करोड़ रही।
  • नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में भी सुधार देखने को मिला, जो पिछले साल की तुलना में 10 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 2.5 प्रतिशत हो गई।
  • बैंक की गैर-ब्याज आय (Non-Interest Income) में 46.1 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि हुई और यह ₹1,752 करोड़ तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ट्रेजरी गेन (ब्याज रहित निवेश लाभ) की वजह से हुई है।
  • हालांकि, कोर फीस इनकम सिर्फ 3 प्रतिशत बढ़कर ₹1,268 करोड़ रही, जिसमें से 56.4 प्रतिशत योगदान रिटेल बिजनेस से आया।

🛡️ एसेट क्वालिटी में स्थिरता:

  • बैंक की ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) 1.6 प्रतिशत और नेट एनपीए (Net NPA) 0.3 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही।
  • प्रावधान कवरेज अनुपात (Provision Coverage Ratio) भी सुधरकर 80.2 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कि बैंक की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।
  • इस तिमाही में बैंक को ₹1,170 करोड़ की रिकवरी और अपग्रेडेशन हुई, जिसमें ₹338 करोड़ सिक्योरिटी रिसीट्स से आए।
  • हालांकि, एक चिंता का विषय यह रहा कि स्लिपेज (नए खराब ऋण) बढ़कर ₹1,458 करोड़ हो गए, जो पिछली तिमाही में ₹1,223 करोड़ थे।

📈 कर्ज और जमा में वृद्धि:

  • बैंक की कुल ऋण वितरण (Advances) 5 प्रतिशत बढ़कर ₹2.41 ट्रिलियन तक पहुंच गई।
  • इसमें कमर्शियल बैंकिंग का योगदान 19 प्रतिशत और माइक्रोफाइनेंस में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि रही।
  • हालांकि, रिटेल एडवांस (खुदरा ऋण) में वृद्धि केवल 0.3 प्रतिशत रही, जो कि अपेक्षाकृत कम है।
  • कुल जमा (Deposits) में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह ₹2.76 ट्रिलियन तक पहुंच गई।
  • CASA रेश्यो (Current Account-Savings Account Ratio) में भी 200 बेसिस प्वाइंट का सुधार देखा गया और यह बढ़कर 32.8 प्रतिशत हो गया।

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