ChatGPT को अब प्रतिदिन 2.5 बिलियन प्रॉम्प्ट मिल रहे है| GOOGLE से ज्यादा ChatGPT पसंद कर रहे लोग

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025: कुछ साल पहले जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम सुनते थे, तो अधिकतर लोगों के जेहन में कोई साइंस फिक्शन फिल्म का सीन घूम जाता था। तकनीक के तेज़ रफ्तार बदलावों ने अब हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। OpenAI का चैटबॉट ChatGPT न केवल अपना खुद का नाम बना चुका है, बल्कि अब गूगल जैसे लंबे समय से चले आ रहे इंटरनेट मोनोपोली को भी धीरे-धीरे चुनौती देने लगा है।

ChatGPT अब रोज़ाना 2.5 अरब से अधिक सवालों का जवाब दे रहा है। भारत समेत एशिया-अफ्रीका-अमरीका और यूरोप—दुनियाभर के उपयोगकर्ता अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर पर इसे खोलते हैं, सवाल पूछते हैं और पल भर में सीधा, आसान जवाब या काम पा जाते हैं।

यह आँकड़ा भविष्य की झलक है या वर्तमान की एक अजीब रीढ़ है—यह समझने के लिए इस खास रिपोर्ट में हम जानेंगे कि क्या वाकई ChatGPT, Google की दशकों पुरानी सत्ता को चुनौती दे रहा है? क्या भारत जैसे तेजी से इंटरनेट अपनाते देश में यही भविष्य है? और क्या आपकी नौकरी या आपके बच्चों की पढ़ाई अब AI से तय होगी?

बदलाव कितना बड़ा, कितना तेज़?

दिसम्बर 2024 तक ChatGPT रोज़ाना 1 अरब सवालों के जवाब दे रहा था। महज़ सात महीने में ही इसकी दरकार दोगुनी से ऊपर पहुँच गई। 2.5 अरब रोज़ाना सवाल—यानि हर सेकेंड 28,935 (लगभग) सवाल, और हर मिनट 1.7 लाख से ज्यादा सवाल।
यह आँकड़ा उतना ही बड़ा है जितना कि फेसबुक-व्हाट्सएप की पहुँच यूज़रबेस के मामले में।
33 करोड़ सवाल अकेले अमरीका से आ रहे हैं। यूरोप, एशिया और भारत बाकी की संख्या को बढ़ा रहे हैं।

मैसेंजर ऐप, सोशल नेटवर्किग—इन सबको एक तरफ रख दीजिए, ChatGPT एक ऐसी सेवा है जिसने सबसे तेज़ी से दुनिया भर में अपनी जगह बनाई है।

Google पर क्या असर हुआ?

थोड़ा पीछे मुड़कर देखें—शहरी भारत में जो बच्चे रोज़ाना Google पर “सबसे लंबी नदी कौन सी है” या “ताजमहल किसने बनवाया” या “क्या कहानी की शुरुआत में नायक अच्छा था फिर बुरा कैसे बन गया” ये सब सवाल पूछते थे, अब वही बच्चे ChatGPT से सवाल-जवाब कर रहे हैं। Google के लिंक्स, विज्ञापन-सर्च-इमेज—इन सबको छोड़कर ये बच्चे माउस क्लिक करने से ज्यादा क्लीयर, सीधे जवाब चाहते हैं।

Google की खोज में किसी भी सवाल में हमें “खोज परिणाम” दिखाई देता है—चार-पाँच वेबसाइट्स के लिंक, कुछ विज्ञापन, फिर शायद कोई जवाब। ChatGPT में यह आसान है—सर्च बॉक्स में टाइप करो, जवाब पाओ। कोई भी सवाल—चाहे गणित, साइंस, कॉमर्स, इतिहास, अंग्रेज़ी, हिंदी—यहाँ एक क्लिक में मिल जाता है।
बातचीत के अंदाज़ में।

ऐसे में यूज़र का व्यवहार बदल गया है। Google की तरह “पहले खोजो, फिर चुनो, फिर पढ़ो” वाली प्रक्रिया अब “पूछो, पाओ, आगे बढ़ो” हो गई है।

Google की कमाई को खतरा?

Google की मुख्य कमाई कहाँ से होती है? विज्ञापनों से।Google पर नीले लिंक्स और विज्ञापनों पर हर साल हजारों करोड़ डॉलर की कमाई होती है।अब जब लोग सीधा जवाब ChatGPT से ले लेते हैं तो Google के विज्ञापनों और लिंक्स पर क्लिक्स कम हो रहे हैं।पहले भी एप्पल, अमेज़न, फेसबुक—सबने Google से कमाई छीनी, लेकिन ChatGPT का यह हमला Google के दिल पर सीधा वार है।

अगर ChatGPT को भारत, ब्राज़ील, चीन, अफ्रीका—ऐसे नए और बड़े बाजारों में सस्ता और भरोसेमंद इंटरनेट मिल जाए, तो Google को दास्तान क्या होगी, यह सोचकर एक दिलचस्प सवाल उठता है।

Google जैसी बड़ी कंपनी को “कोड रेड” यानी आपातकालीन बैठक करनी पड़ी, और उन्होंने अपने AI मोड, बार्ड, जिमिनी जैसी प्रोडक्ट्स जल्दी-जल्दी बाजार में उतारना शुरू कर दिया।
Twitter-WhatsApp जैसे बड़े खिलाड़ी भी AI सर्च में घुस रहे हैं।

भारत में चिंगारी या अंगारा?

भारत में इंटरनेट की रफ़्तार, सस्ती डेटा दरें और मोबाइल का फैलाव—ये वो बातें हैं जिनकी वजह से ChatGPT जैसी सेवाएँ तेज़ी से पहुँच रही हैं। गाँव-शहर-स्कूल-कोचिंग-बस स्टैंड—हर जगह ChatGPT का नाम है।

लेकिन एक सवाल यह भी है कि क्या ChatGPT की भाषा, ज्ञान, सामग्री भारत के परिपेक्ष्य में सही है?
क्या यह शिक्षा, चिकित्सा, कानून, सलाह—जैसी संवेदनशील चीजों में सटीक और भरोसेमंद है?
क्या अंग्रेज़ी में सवाल पूछने पर मिलने वाला जवाब हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल, मलयालम में वैसा ही पूरा, सही और बेदाग़ होगा?

इन खतरों को भी स्वीकार करना होगा—जैसे ChatGPT से पढ़ाई लिखाई में नकल को बढ़ावा, फर्जी खबरों का प्रसार, गलतफहमी, और कभी-कभी बिना स्रोत के अटकलबाजी वाले जवाब।
ये सारी चुनौतियाँ Google के पुराने सिस्टम में भी थी, मगर ChatGPT और AI ने इन्हें नई शक्ल दी है।

क्या आपकी पत्रकारिता, आपकी लेखन प्रतिभा, आपकी जॉब—सब ChatGPT या उसके जैसे किसी और AI की भेंट चढ़ जाएँगे? इस सवाल का जवाब अभी नहीं मिला है, लेकिन यह डर, यह चिंता, यह सवाल हर शहर, हर गाँव, हर मोबाइल स्क्रीन और हर जीपीएस की आवाज़ के साथ फैल रहा है।

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