पाकिस्तान का एकतरफा प्रेम: भारत से आयात बढ़ा, लेकिन निर्यात शून्य के बराबर

An aerial view of a large container port showing thousands of colorful shipping containers arranged in organized rows and stacks. Yellow container cranes are positioned throughout the port facility for loading and unloading cargo. The image includes overlaid circular icons featuring the Pakistani flag (green with white crescent and star) on the left and the Indian flag (saffron, white, and green with blue wheel) on the right, suggesting this relates to trade between Pakistan and India. The "ALERT NATION NEWS" logo appears in the bottom left corner of the image.

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 24 जुलाई 2025: भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक अजीब सी विडंबना देखने को मिल रही है। जहां पाकिस्तान का भारत से आयात पिछले तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, वहीं पाकिस्तान का भारत को निर्यात लगभग शून्य के बराबर हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025 में पाकिस्तान ने भारत से 220.58 मिलियन डॉलर का आयात किया है, जबकि भारत को केवल 1.43 मिलियन डॉलर का निर्यात किया है। यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पूरी तरह से एकतरफा हो गए हैं।

आर्थिक आंकड़ों की कहानी

पाकिस्तान के स्टेट बैंक के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान का भारत से आयात पिछले वर्ष के 206.89 मिलियन डॉलर से बढ़कर 220.58 मिलियन डॉलर हो गया है, जो 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक आयात है। इसके विपरीत, पाकिस्तान का भारत को निर्यात महज 1.43 मिलियन डॉलर रहा है, जो 2019 में 495 मिलियन डॉलर था।

यह स्थिति तब और भी दिलचस्प हो जाती है जब हम जानते हैं कि अगस्त 2019 में पाकिस्तान ने कश्मीर से धारा 370 हटाने के विरोध में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को औपचारिक रूप से निलंबित कर दिया था। उसके बाद से भारत ने भी पाकिस्तानी सामानों पर 200 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया है, जिससे पाकिस्तानी उत्पादों का भारतीय बाजार में प्रवेश लगभग असंभव हो गया है।

तीसरे देशों के जरिए अनौपचारिक व्यापार

विशेषज्ञों का मानना है कि आधिकारिक आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। दुबई, कोलंबो और सिंगापुर जैसे तीसरे देशों के जरिए होने वाला अनौपचारिक व्यापार कहीं अधिक है। व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत-पाकिस्तान के बीच अनौपचारिक व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर तक हो सकता है। इसमें कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता वस्तुएं और कृषि उत्पाद शामिल हैं, जो अक्सर दूसरे देशों के लेबल लगाकर या पुनः भेजे जाकर अपनी वास्तविक पहचान छुपाते हैं।

पाकिस्तानी व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि राजनीतिक तनावों के बावजूद भी भारतीय सामान पाकिस्तानी बाजार में लगातार आ रहा है। खासकर दवाएं, रसायन, ऑटो पार्ट्स और खाद्य सामग्री के क्षेत्र में भारतीय उत्पाद अभी भी प्रतिस्पर्धी हैं और पाकिस्तानी उद्योगों की जरूरत को पूरा करते हैं।

पाकिस्तान की मजबूरी

पाकिस्तान के लिए भारतीय सामानों पर निर्भरता कई कारणों से बनी हुई है। सबसे बड़ा कारण यह है कि भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और मशीनरी की गुणवत्ता अच्छी है और कीमत भी उचित है। पाकिस्तानी उद्योग, विशेषकर दवा और इंजीनियरिंग सेक्टर में, भारतीय कच्चे माल और अर्ध-निर्मित सामान पर संरचनात्मक निर्भरता है।

दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह है कि पाकिस्तान में घरेलू उत्पादन की कमी है और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना महंगा और समय लेने वाला है। राजनीतिक प्रतिबंधों के बावजूद, व्यापारी और कारोबारी आवश्यक वस्तुओं के लिए रास्ते खोज लेते हैं।

तीसरा कारण यह है कि पाकिस्तान के आयात प्रतिबंध अक्सर छिद्रयुक्त होते हैं और राजनीतिक प्रदर्शन के लिए अधिक होते हैं, व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए कम। जब आवश्यक वस्तुओं की बात आती है, तो व्यापारी और कारोबारी इन प्रतिबंधों के आसपास रास्ते खोज लेते हैं।

भारत की नीति: कोई बदलाव नहीं

भारत की ओर से इस असंतुलन को कम करने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है। भारतीय व्यापार नीति पाकिस्तान को विशेष रूप से बाहर करने के लिए नहीं बनी है। जब तक भुगतान मिल जाता है और सामान रूट हो जाता है, भारतीय निर्यातक पाकिस्तान सहित किसी भी बाजार की सेवा करने में खुश हैं।

हालांकि, भारत ने पाकिस्तानी सामानों पर पाबंदियां हटाकर बदले में कोई सुविधा नहीं दी है। इसके विपरीत, नई दिल्ली उच्च शुल्क और नियामक बाधाओं को बनाए रखती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि पाकिस्तानी उत्पादों की भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंच लगभग नहीं के बराबर है।

भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति यह है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ के मुद्दों को संबोधित नहीं करता, तब तक व्यापार के सामान्यीकरण की कोई बात नहीं हो सकती। यह नीति निकट भविष्य में बदलने की संभावना नहीं है।

आर्थिक प्रभाव

यह व्यापारिक असंतुलन पाकिस्तान की व्यापक क्षेत्रीय व्यापार घाटे का सिर्फ एक हिस्सा है। वित्तीय वर्ष 2025 में पाकिस्तान का नौ पड़ोसी देशों के साथ व्यापार घाटा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा है, जो मुख्य रूप से चीन, भारत और बांग्लादेश से बढ़ते आयात के कारण है।

पड़ोसी देशों के साथ लगातार व्यापार घाटा पाकिस्तान की मुद्रा और भुगतान संतुलन की समस्याओं को बढ़ाता है, जो आर्थिक अस्थिरता में योगदान देता है। राजनीतिक शत्रुता के बावजूद भारतीय आयात को प्रतिस्थापित करने में पाकिस्तान की अक्षमता अंतर्निहित औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को दर्शाती है।

व्यापारिक विशेषज्ञों की राय

कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि “राजनीतिक नेता चाहे जो भी बयान दें, व्यापार की अपनी जरूरतें होती हैं। पाकिस्तानी उद्योग को जिन कच्चे माल और मशीनों की जरूरत है, वे भारत से सबसे सस्ते और अच्छी गुणवत्ता में मिलते हैं।”

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एक प्रोफेसर का मानना है कि “यह स्थिति दिखाती है कि आर्थिक एकीकरण राजनीतिक तनावों से कहीं अधिक मजबूत है। जब तक पाकिस्तानी फैक्ट्रियों और अस्पतालों को भारतीय इनपुट की जरूरत है, और जब तक भारतीय फर्में बेचने के लिए तैयार हैं, तब तक यह ‘अफेयर’ जारी रहेगा, चाहे यह कितना भी अनौपचारिक या असहज हो।”

राजनीतिक विरोधाभास

मई 2025 में, जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था, उस दौरान भी आधिकारिक डेटा दिखाता है कि भारतीय सामान पाकिस्तान में आ रहा था। उस महीने पाकिस्तान का भारत से आयात 15 मिलियन डॉलर था। राजनीतिक संकटों के बावजूद व्यापारिक प्रवाह की यह लचक भारतीय इनपुट पर पाकिस्तान की आर्थिक निर्भरता को रेखांकित करती है।

भविष्य की संभावनाएं

वर्तमान रुझान देखते हुए, यह स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्ते निकट भविष्य में संतुलित होने की संभावना नहीं है। जब तक दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध सुधरते नहीं हैं, तब तक यह एकतरफा व्यापार जारी रहेगा।

पाकिस्तान के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी औद्योगिक क्षमता बढ़ाए और भारतीय आयात पर निर्भरता कम करे। साथ ही, वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास करना होगा। भारत के लिए, यह स्थिति उसकी औद्योगिक शक्ति और निर्यात क्षमता का प्रमाण है।

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