सुकमा (छत्तीसगढ़) से खबर है कि सुरक्षा बलों ने माओवादी गिरोह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए चार संदिग्ध माओवादी operatives को गिरफ्तार किया है। ये चारों आरोपित जगरगुंडा क्षेत्र के हैं और आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) साजिश के मामले में शामिल बताए जा रहे हैं। इस गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों द्वारा माओवादी के संगठनात्मक तंत्र को कमजोर करने में एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के बोडांगुड़ा गांव में 23 जुलाई को हुई, जहां पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर छापा मारा। गिरफ्त में आए चारों आरोपितों के नाम क्रमशः तामु जोगा, पुनम बूढ़रा, मदकम भीमा और मीडियम अयतु हैं, जिनकी उम्र 23 से 25 वर्ष के बीच है और ये सभी बोडांगुड़ा के निवासी हैं।
यह चारों माओवादी सदस्य जगरगुंडा थाने के तहत कई मामलों में फरार चल रहे थे और इनका संबंध जगरगुंडा एरिया कमेटी से है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक तिफिन बम जब्त किया है, जिसे सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से बनाया गया था।
यह विस्फोटक उपकरण 29 जून को कैम्प बेड़रे के पास हुई आईईडी साजिश की घटना से जुड़ा हुआ है। उस दिन माओवादी द्वारा लगाए गए विस्फोटकों के जरिए सुरक्षा गश्त को बाधित करने और स्थानीय निवासियों में भय उत्पन्न करने की कोशिश की गई थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह ऑपरेशन मजबूत और ठोस खुफिया जानकारी पर आधारित था। चारों की गिरफ्तारी माओवादी के सक्रिय भूमिगत आईईडी तंत्र को रोकने में बड़ी सफलता है।”
गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आतंकवादी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें दंतेवाड़ा विशेष न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सुकमा क्षेत्र माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता है, जहां इंजीनियरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और वन दलों पर हमला करने के लिए अक्सर आईईडी विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार किए गए माओवादी अधिकारी गुप्त संगठन की उस कड़ी का हिस्सा थे जो घातक विस्फोटक जाल बिछाने का काम करते थे।
सुरक्षा बलों ने गिरफ्तारी के बाद न केवल मकान में बल्कि आस-पास के घने जंगल और दूर-दराज के गांवों की तलाशी भी तेज कर दी है ताकि बाकी बचे माओवादी सदस्य और विस्फोटक उपकरणों को भी पकड़ा जा सके।
यह कार्रवाई न सिर्फ माओवादी संगठन के स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को कमजोर करने में मददगार साबित होगी, बल्कि प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगी जो क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा बनाए रखने और शांति स्थापना को लेकर है।
सुकमा व आसपास के इलाकों में लंबे समय से जारी माओवादी हिंसा और खुफिया संघर्ष के बीच इस तरह की सफलताएं सुरक्षा व्यवस्था की दक्षता को भी दर्शाती हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, माओवादियों के खिलाफ इसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई और सक्रिय खुफिया नेटवर्क की मदद से जिले में स्थिरता लाने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।
अंतत: यह गिरफ्तारी माओवादी आंदोलन के खिलाफ जारी केंद्रीय और राज्य सरकार के अभियान को और मजबूत बनाएगी, साथ ही सुरक्षा बलों को उस चुनौती का साहसपूर्वक सामना करने का बल देगी जो वे इस क्षेत्र में रोजाना करते हैं।
सुकमा ऑपरेशन की यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि भारत के ग़ैर-कलह क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीदों को बढ़ावा देगी। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे सटीक और त्वरित कार्रवाईयां जारी रहेंगी जिससे माओवादी हिंसा पर काबू पाया जा सके।
इस ऑपरेशन से प्राप्त जानकारी और अन्य सुरागों की मदद से सेफ्टी पर्सनल की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आगे की रणनीतियां बनाई जा रही हैं। सरकार स्थानीय निवासियों के सहयोग और पुलिस-आर्मी के संयुक्त प्रयासों से माओवादी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने में पूरी तरह आश्वस्त है।
यह सभी तथ्य और घटनाक्रम पुलिस प्रशासन के आधिकारिक बयानों व सामयिक समाचार रिपोर्टों से मेल खाते हैं और जनता तक सही व अपडेटेड सूचना पहुंचाने के प्रयास का हिस्सा हैं।
यह खबर माओवादी आतंकवाद से लड़ने के वर्तमान संघर्ष की बड़ी सफलता है जो सुकमा क्षेत्र में लंबे समय से जारी समस्या को हल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।