छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक ऐसी खबर आई है जो किसी का भी दिल दहला देगी। जादू-टोना और अमीर बनने के फेर में कुछ लोगों ने एक 5 साल की मासूम बच्ची की निर्दयता से हत्या कर दी। 3 महीने की लंबी जांच के बाद पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला दिखाता है कि आज भी हमारे समाज में अंधविश्वास कितना गहरा है।
रात में गायब हो गई थी मासूम बच्ची
यह दर्दनाक घटना लोरमी थाना क्षेत्र के कोसाबाड़ी गांव की है। यहां की रहने वाली पुष्पा की सबसे छोटी बेटी महेश्वरी उर्फ लाली सिर्फ 5 साल की थी। 11 अप्रैल की रात को बच्ची ने अपने परिवार के साथ खाना खाया और सबके साथ सो गई। लेकिन जब सुबह मां की नींद खुली तो उसने देखा कि लाली का बिस्तर खाली है।
शुरुआत में परिवार वालों को लगा कि शायद बच्ची कहीं पास में ही खेल रही होगी। लेकिन जब घंटों तक उसका कोई पता नहीं चला तो सभी की चिंता बढ़ गई। पूरे गांव के लोगों ने मिलकर तलाश की, लेकिन लाली का कहीं कोई निशान नहीं मिला। परेशान मां ने 12 अप्रैल को थाने में अपनी बेटी के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।
शमशान के पास मिला था डरावना सच
पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करके व्यापक तलाश अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने आस-पास के सभी क्षेत्रों में खोजबीन की, लेकिन कई दिनों तक कुछ हाथ नहीं लगा। करीब एक महीने बाद 6 मई को एक दिल दहलाने वाली खबर मिली।
गांव के शमशान से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक खेत में मानव कंकाल के अवशेष मिले थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब विशेषज्ञों ने इस कंकाल की जांच की तो पता चला कि यह 5-6 साल की किसी बच्ची का है। पुलिस को तुरंत शक हुआ कि कहीं यह लापता लाली का तो नहीं।
डीएनए टेस्ट कराने के बाद जो रिपोर्ट आई, वह सबके लिए सदमे भरी थी। यह कंकाल वाकई में लाली का ही था। अब साफ हो गया था कि यह अपहरण और हत्या का मामला है।
पारिवारिक रिश्ते में छुपा था काला सच
गहरी जांच-पड़ताल में पुलिस को पता चला कि बच्ची का अपने पिता के चचेरे भाई के बेटे चिम्मन के घर अक्सर आना-जाना था। लाली को चिम्मन और उसकी पत्नी ऋतु से बहुत लगाव था। परिवार वाले भी इस बात से वाकिफ थे।
जांच के दौरान पुलिस ने यह भी जाना कि इस पूरे इलाके में जादू-टोना, बैगा-गुनिया, झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र की प्रथाएं बहुत आम हैं। लोग अक्सर बीमारी, पैसे की समस्या या अन्य परेशानियों के लिए इन तरीकों का सहारा लेते हैं। घटनास्थल पर पूजा की सामग्री जैसे नारियल, नींबू, अगरबत्ती और विशेष कपड़े भी मिले थे।
गवाह ने देखा था संदिग्ध नजारा
जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब एक पड़ोसी ने बताया कि उसने अपनी छत से एक अज्ञात व्यक्ति को देखा था जो किसी बच्ची को शमशान की दिशा में ले जा रहा था। यह घटना उसी रात की थी जब लाली गायब हुई थी। इस जानकारी से पुलिस का शक और भी पक्का हो गया।
बैगा बनकर अमीर बनने का सपना
जब पुलिस ने चिम्मन और उसकी पत्नी ऋतु से पूछताछ की तो शुरुआत में वे अपना बयान बदलते रहे। लेकिन कड़ी जांच के बाद सच्चाई सामने आई। पता चला कि चिम्मन ने पास के डोगरिया गांव के रामरतन निषाद से झाड़-फूंक और बैगा का काम सीखा था। वह इस काम से पैसा कमाना चाहता था और जल्दी अमीर बनने का सपना देख रहा था।
काले कपड़े में लपेटकर की गई निर्दयी हत्या
जब सभी आरोपियों से एक साथ पूछताछ की गई तो पूरी साजिश का खुलासा हुआ। आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया:
- ऋतु ने नरेंद्र मार्को को पैसे देकर लाली को घर लाने को कहा था
- रात करीब 1 बजे मार्को बच्ची को लेकर आया
- झरन पूजा के नाम पर ऋतु ने लाली को काला कपड़ा पहनाया
- सभी ने मिलकर तंत्र-मंत्र और जादू-टोना किया
- इस दौरान निर्दयता से बच्ची की हत्या कर दी गई
- पकड़े जाने के डर से आकाश ने शव को खेत में दफना दिया
5 हत्यारे जेल की सलाखों के पीछे
26 जुलाई को लोरमी पुलिस ने सभी 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें शामिल हैं – ऋतु (चिम्मन की पत्नी और मुख्य साजिशकर्ता), चिम्मन (मुख्य आरोपी), नरेंद्र मार्को (अपहरणकर्ता), रामरतन निषाद (तांत्रिक), और आकाश (शव दफनाने वाला)।
सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश करके जेल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह केस कोर्ट में चलेगा और न्याय की प्रक्रिया पूरी होगी।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना 21वीं सदी में भी अंधविश्वास के खतरनाक रूप को दिखाती है। पैसे के लालच में कुछ लोग कैसे एक मासूम बच्ची की जान ले सकते हैं, यह सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लोरमी पुलिस की अथक मेहनत से इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन समाज को ऐसे अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूक होना होगा।