रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉक्टर आशीष सिन्हा की अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। एक प्रतिभाशाली महिला PG छात्रा द्वारा शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाने के बाद दर्ज हुए इस केस में अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मामला अत्यंत संवेदनशील और गंभीर प्रकृति का है।
कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
यह घटना जनवरी 2025 की है जब पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर की एक होनहार महिला छात्रा ने अपने विभागाध्यक्ष डॉक्टर आशीष सिन्हा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। छात्रा का आरोप है कि डॉक्टर सिन्हा ने उसके साथ लगातार अनुचित व्यवहार किया, गंदी टिप्पणियां कीं और उसे फेल करने की धमकी देकर मानसिक प्रताड़ना दी।
शुरुआत में छात्रा ने कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन से शिकायत की थी। उसने उम्मीद की थी कि आंतरिक स्तर पर मामला सुलझ जाएगा, लेकिन जब महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और स्थिति और भी बिगड़ती गई, तो आखिरकार मजबूर होकर 4 जुलाई 2025 को उसे पुलिस में FIR दर्ज करानी पड़ी।
क्या कहते हैं सबूत?
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की एकल पीठ में पेश हुए सबूत काफी चौंकाने वाले थे। कोर्ट के सामने पेश किए गए व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट्स से साफ तौर पर पता चला कि डॉक्टर सिन्हा ने छात्रा के साथ अनुचित और आपत्तिजनक बातचीत की थी। ये संदेश न केवल अश्लील थे बल्कि एक शिक्षक और छात्रा के रिश्ते की सभी सीमाओं का उल्लंघन करते थे।
केस डायरी के दस्तावेजों से यह भी पता चला कि यह कोई एकबारगी घटना नहीं थी। छात्रा ने पहले भी कई बार इस तरह की शिकायतें की थीं, जो दिखाता है कि यह एक निरंतर चलने वाली समस्या थी।
अदालत का सख्त रुख
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा:
- “एक चिकित्सक और विभागाध्यक्ष होने के नाते यह व्यवहार अत्यंत आपत्तिजनक और शर्मनाक है”
- “आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रथम दृष्टया विश्वसनीय लगते हैं”
- “आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता”
- “न्यायिक जांच को प्रभावित करने का खतरा है”
डॉक्टर की असफल दलीलें
डॉक्टर आशीष सिन्हा के वकील ने अदालत में कई दलीलें पेश कीं:
- कॉलेज की विशाखा समिति की रिपोर्ट में उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला
- वे सरकारी सेवा में हैं और गिरफ्तारी से उनका करियर बर्बाद हो जाएगा
- वे पूरी तरह से निर्दोष हैं और यह झूठा मामला है
- उन्होंने कभी भी अनुचित व्यवहार नहीं किया
लेकिन सरकारी वकील अमित वर्मा ने इन सभी दलीलों का प्रभावी तरीके से विरोध करते हुए मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता पर जोर दिया।
पीड़िता की पृष्ठभूमि
शिकायतकर्ता छात्रा की वकील मधुनिशा सिंह ने अदालत को बताया कि पीड़िता एक असाधारण रूप से मेधावी छात्रा है। उसने रूस के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से स्वर्ण पदक हासिल किया है और भारत आकर अपनी पढ़ाई जारी रखी है। वकील का कहना है कि डॉक्टर सिन्हा ने जानबूझकर और साजिशन उसके करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
कानूनी पहलू
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है:
- धारा 74: महिला की मर्यादा भंग करने का प्रयास
- धारा 75: यौन उत्पीड़न
संस्थागत कार्रवाई
कॉलेज प्रशासन ने भी कुछ कदम उठाए हैं। आंतरिक जांच के बाद डॉक्टर सिन्हा को HOD के पद से हटा दिया गया है। हालांकि, छात्रा और उसके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई काफी देर से आई और पर्याप्त नहीं है।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल डॉक्टर आशीष सिन्हा का ठिकाना मालूम नहीं है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक वे फरार हैं। उनके परिवारजन भी पुलिस को उनके बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं दे पा रहे।
व्यापक संदेश
यह मामला भारत के मेडिकल संस्थानों में शिक्षकों द्वारा छात्राओं के साथ होने वाले उत्पीड़न की व्यापक समस्या को उजागर करता है। हाई कोर्ट के इस कड़े फैसले से एक स्पष्ट संदेश गया है कि पद और शक्ति का दुरुपयोग करने वालों को कानून की पूरी सख्ती का सामना करना पड़ेगा।