क्या आप भी बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर SIP शुरू करने से हिचकिचाते हैं? यह स्टडी आपकी सारी चिंताओं को दूर कर देगी! अगर आप भी उन निवेशकों में से हैं जो “सही समय” का इंतजार करते रहते हैं SIP शुरू करने के लिए, तो मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड की यह रिसर्च आपकी आंखें खोल देगी। इस अध्ययन ने साबित किया है कि बाजार की टाइमिंग का SIP रिटर्न पर बहुत कम असर होता है, और लंबी अवधि में तो यह फर्क लगभग गायब ही हो जाता है।
बाजार के टॉप और बॉटम पर शुरू की गई SIP में क्या अंतर?
मोतीलाल ओसवाल की टीम ने 2000 से 2015 तक के कई मार्केट साइकल का विश्लेषण किया। उन्होंने Nifty 500 इंडेक्स के सबसे ऊंचे और सबसे नीचे के पॉइंट पर शुरू की गई SIP के रिटर्न की तुलना की। नतीजे चौंकाने वाले थे!
फरवरी 2000 में शुरू की गई SIP (जब PE ratio 37.26 था – यानी बाजार के टॉप पर):
- मार्च 2025 तक CAGR: 15.47%
सितंबर 2001 में शुरू की गई SIP (जब PE ratio 11.58 था – यानी बाजार के बॉटम पर):
- मार्च 2025 तक CAGR: 15.55%
सिर्फ 0.08% का अंतर! यह दिखाता है कि चाहे आप बाजार के सबसे ऊंचे पॉइंट पर SIP शुरू करें या सबसे नीचे, लंबी अवधि में रिटर्न लगभग एक जैसा ही मिलता है।
समय के साथ कैसे कम होता जाता है अंतर?
स्टडी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि जैसे-जैसे निवेश की अवधि बढ़ती है, “बेस्ट टाइमिंग” और “वर्स्ट टाइमिंग” के बीच का गैप कम होता जाता है:
1 साल में: 11.04% का अंतर
5 साल में: 3.08% का अंतर
10 साल में: 1.13% का अंतर
15 साल में: 0.73% का अंतर
20 साल में: 0.71% का अंतर
25 साल में: सिर्फ 0.59% का अंतर!
यानी अगर आप 25 साल तक निवेश करते हैं, तो सबसे खराब टाइमिंग और सबसे बेहतरीन टाइमिंग के बीच सिर्फ आधा प्रतिशत का अंतर रह जाता है!
हर महीने परफेक्ट टाइमिंग करना है “नामुमकिन”
रिसर्च बताती है कि हर महीने सबसे कम कीमत पर खरीदारी करने की संभावना “गणितीय रूप से शून्य के बराबर” है। यह व्यावहारिक रूप से असंभव है कि कोई निवेशक लगातार मार्केट के सबसे निचले पॉइंट को पकड़ सके।
रुपया कॉस्ट एवरेजिंग का कमाल
SIP की सबसे बड़ी खूबी है रुपया कॉस्ट एवरेजिंग। इसका मतलब है:
- जब बाजार ऊपर होता है, आप कम यूनिट्स खरीदते हैं
- जब बाजार नीचे होता है, आप ज्यादा यूनिट्स खरीदते हैं
- इससे आपकी औसत खरीदारी की कीमत संतुलित हो जाती है
2008 के उदाहरण से समझें
2008 का फाइनेंशियल क्राइसिस याद है? उस दौरान:
- जनवरी 2008 (मार्केट हाई पर) SIP शुरू करने वाले को मिला: 13.97% CAGR
- अक्टूबर 2008 (क्राइसिस के दौरान) SIP शुरू करने वाले को मिला: 14.36% CAGR
सिर्फ 0.39% का अंतर! यह साबित करता है कि SIP में टाइमिंग से ज्यादा धैर्य और अनुशासन मायने रखता है।
शॉर्ट टर्म में भी फायदा
2024 में एक साल की अवधि में देखें तो:
- सबसे खराब टाइमिंग (हर महीने हाई पर खरीदारी): 9.9% का नुकसान
- लेकिन 15-25 साल की अवधि में यह गैप 1% से भी कम हो जाता है
एक्सपर्ट्स की राय
मोतीलाल ओसवाल AMC के प्रतिक ओसवाल का कहना है: “Time in the market beats timing the market” – यानी मार्केट को टाइम करने से बेहतर है मार्केट में समय बिताना।
निष्कर्ष: अभी शुरू करें, इंतजार न करें!
यह रिसर्च साफ तौर पर बताती है कि:
- SIP में मार्केट टाइमिंग का कोई खास फायदा नहीं
- 15+ साल की अवधि में सभी रिटर्न लगभग बराबर हो जाते हैं
- अनुशासन और निरंतरता ही सबसे बड़ी चाबी है
तो अगली बार जब आप सोचें कि “अभी मार्केट हाई है, थोड़ा इंतजार करते हैं,” तो इस स्टडी को याद रखिएगा। सबसे अच्छा समय SIP शुरू करने का वो है, जब आपके पास पैसा हो – बस!
आखिर में, कंपाउंडिंग का जादू समय के साथ काम करता है, मार्केट टाइमिंग के साथ नहीं। जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, उतना ही ज्यादा फायदा होगा।
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