छत्तीसगढ़ के रायगढ़-धरमजयगढ़ इलाके में स्थानीय राजनीति से जुड़ी एक बड़ी घटना ने सबको हिलाकर रख दिया है। पूर्व कांग्रेस विधायक चक्रधर सिंह सिदार के छोटे भाई जयपाल सिंह सिदार (43) के शव की सिसरिंगा घाटी में एक मंदिर के पीछे बड़ी वीभत्स हालत में खोज हुई है। शव की इस हालत ने पुलिस और स्थानीय लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है—ये हत्या का मामला है या फिर कोई और रहस्य छुपा है?
घटना क्रम
- 7 जुलाई 2025: जयपाल सिदार अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर घर वापस नहीं आए। जब शाम तक उनका कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने अगले दिन, यानी 8 जुलाई को लैलूंगा थाने में गायब होने की शिकायत दर्ज कराई।
- तलाश अभियान: पुलिस और परिजनों ने करीब तीन हफ्ते तक हर तरफ ठिकाना छान मारा। सूचना देने वाले को 21,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया।
- 30 जुलाई 2025: सिसरिंगा, धरमजयगढ़ ब्लॉक के एक मंदिर के पीछे जंगल में अत्यधिक सड़े-गले शव की खोज हुई। शव का सिर का हिस्सा पूरी तरह से सड़ चुका था, चेहरा लगभग कंकाल बन चुका था, जबकि बाकी शरीर सूख कर कपड़े से चिपक गया था—ऐसी हालत जिससे डर तो सबको लगता ही है।
पुलिस की जांच व लापरवाही
पहचान मुश्किल होने के बावजूद, मृतक की पहचान उनके कपड़ों और एक खाली पर्स की मदद से हुई। घटनास्थल पर पुलिस को कोई स्पष्ट संघर्ष-लड़ाई के निशान या कोई सबूत नहीं मिले। पुलिस ने वहां से मिट्टी और कपड़े के नमूने भी लिए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
शव को रायगढ़ जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पोस्ट-मॉर्टम हो रहा है। पुलिस के अनुसार, पूरी कहानी साफ होने के लिए अभी रिपोर्ट आने का इंतजार है, लेकिन शव की हालत देखकर लग रहा है कि मौत संदिग्ध है—हत्या या कोई अपराध, ऐसा संकेत मिल रहा है, हालांकि पुलिस ने अभी सार्वजनिक रूप से कोई फाइनल बयान नहीं दिया है।
पीड़ित कौन थे?
जयपाल सिंह सिदार ग्राम कटकलिया, लैलूंगा के रहने वाले थे और पंचायत सचिव की नौकरी करते थे। उनके परिवार में पत्नी, बेटी और बेटा हैं। उनके बड़े भाई चक्रधर सिंह सिदार 2013 से 2018 तक लैलूंगा से कांग्रेस पार्टी के विधायक रह चुके हैं।
अटकलें और रहस्य
स्थानीय कुछ मीडिया वेबसाइट्स पर बिना सबूत के अलग-अलग दावे उड़ रहे हैं—कोई कहता है कि ट्रैक्टर से कुचलकर या धारदार हथियार से मौत हुई होगी, लेकिन पुलिस ने अभी तक ऐसी कोई बात कन्फर्म नहीं की है।
शव की अत्यधिक सड़न की वजह से मौत की सही तारीख पता लगाना मुश्किल हो गया है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, बारिश के मौसम में जंगल में शव के पूरी तरह से सड़ जाने में 15-20 दिन लग सकते हैं, जो इस लापता होने की तारीख से भी मेल खाता है।
अब आगे क्या?
- पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट: मौत का सही कारण और वक्त पता चलेगा। विसरा/डीएनए जांच से भी साफ होगा कि यह हत्या थी या आत्महत्या।
- मोबाइल और सीसीटीवी: मृतक की गाड़ी के अंतिम लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जांच से पता चलेगा—क्या उन्हें किसी ने रास्ते में बुलाया था?
- राजनीतिक या पंचायत की रंजिश: अभी तक परिवार ने किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन जांच में इसी पर भी फोकस रहेगा।
- ध्यान रहे: अभी तक की सारी जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। पोस्ट-मॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही असल सच सामने आएगा।
इस पूरे मामले ने इलाके में तूफान ला दिया है। लोगों में डर का माहौल है, तो दूसरी तरफ यह सवाल भी है कि पुलिस कितनी देर में पूरी कहानी सामने लाएगी—और वाकई क्या हुआ था उस हादसे के पीछे?