केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा दावा है कि भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री 5 साल में दुनिया की नंबर वन बन जाएगी। जी हां, यह वही इंडस्ट्री है जो अभी तक 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार दे चुकी है और सरकार को सबसे ज्यादा जीएसटी रेवेन्यू देती है।
दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंची भारतीय ऑटो इंडस्ट्री
भारत ने जापान को पीछे छोड़कर तीसरा स्थान हासिल किया है और अब 22 लाख करोड़ रुपये की इंडस्ट्री के साथ चीन और अमेरिका के बाद तीसरे नंबर पर है।
- अमेरिका: 78 लाख करोड़ रुपये
- चीन: 47 लाख करोड़ रुपये
- भारत: 22 लाख करोड़ रुपये
गडकरी ने बताया कि 2014 में जब उन्होंने मंत्रालय संभाला था, तब इंडस्ट्री का साइज सिर्फ 7.5 लाख करोड़ रुपये था। मतलब पिछले 10 साल में यह तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है!
सरकार का मास्टर प्लान
- 4.5 करोड़ नौकरियां – देश की सबसे बड़ी जॉब क्रिएटर इंडस्ट्री
- सबसे ज्यादा जीएसटी रेवेन्यू केंद्र और राज्य सरकारों को मिलता है
- देश की चौथी सबसे बड़ी औद्योगिक सेक्टर
गडकरी का कहना है कि 22 लाख करोड़ से 75 लाख करोड़ तक पहुंचाना है इस इंडस्ट्री को। यानी अभी से भी तीन गुना ज्यादा ग्रोथ का लक्ष्य है!
सेफ्टी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सरकार ने 15 राज्यों में 77 हाई-फैटेलिटी स्ट्रेच की पहचान की है और 40,000 करोड़ रुपये से एक्सीडेंट प्रोन काले धब्बों को खत्म करने का प्लान बनाया है।
- दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS)
- हेवी व्हीकल्स में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल
- एडवांस ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम्स (ADAS)
50% मोटरसाइकिल एक्सपोर्ट होती हैं! जी हां, भारत में बनी हर दूसरी बाइक विदेश भेजी जाती है। ऑटो कॉम्पोनेंट इंडस्ट्री अकेली 5.18 लाख करोड़ रुपये का योगदान देती है।
40% प्रदूषण ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वजह से होता है। इसलिए गडकरी इथेनॉल, मेथेनॉल, बायोडीजल, एलएनजी, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन जैसे अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा दे रहे हैं।
PLI स्कीम के तहत 51,000 करोड़ रुपये – 10 चैंपियन सेक्टर्स में ऑटो इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा पैसा दिया गया है।
गडकरी का कहना है कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री “कॉस्ट-सेंट्रिक से क्वालिटी-सेंट्रिक” बन गई है। यही वजह है कि 5 साल में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑटो प्रोड्यूसर बनने का भरोसा दिला रहे हैं।
गडकरी का कॉन्फिडेंस सिर्फ सपना नहीं है – यह एक ठोस रणनीति है जिसमें पॉलिसी सपोर्ट, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट शामिल है। लक्ष्य साफ है – भारत को ग्लोबल ऑटो मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का लीडर बनाना!