उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कार्रवाई में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के 35 वर्षीय हर विलास नंदी को गिरफ्तार किया है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय साइबर क्राइम गिरोह का मुख्य सरगना है। नंदी पर पूरे भारत में फैले एक परिष्कृत धोखाधड़ी नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है, जिसने सैकड़ों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया है।
पुलिस की जांच से पता चला है कि नंदी के आपराधिक गतिविधियों का दायरा अत्यंत व्यापक था। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उसके बैंक खाते के खिलाफ 37 साइबर क्राइम शिकायतें दर्ज की गई थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केवल एक महीने के अंदर उसके खाते में ₹3.46 करोड़ के लेन-देन देखे गए।
अपनी धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए नंदी ने छत्तीसगढ़ के मजदूरों से ₹50,000 से ₹1 लाख तक की रकम देकर उनके बैंक खाते खरीदे थे। यह खाते फर्जी लेन-देन को सुविधाजनक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे, जिससे पुलिस के लिए धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के एक सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर ने 2024 में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अपोलो इंडिया प्राइवेट इक्विटी (IV) (मॉरीशस) लिमिटेड नामक एक फर्जी विदेशी निवेश कंपनी के जरिए उनके ₹34.17 लाख की धोखाधड़ी हुई है।
इस धोखाधड़ी की रणनीति अत्यंत चालाकी से तैयार की गई थी। पहले फेसबुक पर विज्ञापनों के जरिए संभावित शिकारों को लक्षित किया जाता था। फिर जसलीन कौर नाम की एक महिला ट्रेडिंग असिस्टेंट के रूप में पेश आती थी। एक व्यक्ति कस्टमर सर्विस मैनेजर बनकर पेमेंट अकाउंट की जानकारी देता था, जबकि जॉन पीटर हुसैन नाम के एक मेंटर द्वारा फर्जी ट्रेडिंग सेशन कराए जाते थे। इस तरह से पीड़ितों को कई बार पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी किया जाता था।
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि नंदी का यह नेटवर्क अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ था। उसकी ईमेल आईडी फिलीपींस से संचालित की जाती थी, जबकि सोशल मीडिया अकाउंट्स दुबई से बनाए और मैनेज किए जाते थे। सबसे गंभीर बात यह थी कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन को दुबई में निकाला जाता था, जिससे इसकी अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति साबित होती है।
नंदी का दुबई से गहरा कनेक्शन था – वह पिछले 10 सालों से दुबई में रह चुका था और उसके पास UAE का रेजिडेंट कार्ड भी था। इस अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के कारण ही वह इतने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर पा रहा था और पकड़ से बचता रहा।
इस मामले में पुलिस ने अत्याधुनिक जांच तकनीकों का इस्तेमाल किया। बैंकों, सर्विस प्रोवाइडर्स और मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) से डेटा प्राप्त किया गया। व्हाट्सऐप कम्युनिकेशन और मोबाइल नंबर रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया। तकनीकी निगरानी के जरिए नंदी की गतिविधियों को ट्रैक किया गया, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धन हस्तांतरण की कई परतों की निगरानी की गई।
यह जांच दिखाती है कि आधुनिक साइबर क्राइम से निपटने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के तरीकों से काम नहीं चलता। डिजिटल फॉरेंसिक, इंटरनेशनल कोऑर्डिनेशन और टेक कंपनियों से डेटा शेयरिंग जैसे एडवांस तकनीकों की जरूरत होती है।
नंदी की गिरफ्तारी एक रोमांचक ऑपरेशन के बाद हुई। वह छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा क्षेत्र में छुप रहा था, जहां पुलिस की पहुंच मुश्किल होती है। अंततः उसे भिलाई से गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया गया।
उससे कई महत्वपूर्ण सामान बरामद हुआ है जिसमें UAE, ओमान और USA की विदेशी मुद्रा, UAE रेजिडेंट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ATM कार्ड और मोबाइल फोन शामिल हैं। ये सभी सामान उसके अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन और परिष्कृत ऑपरेशन को साबित करते हैं।
इस केस में राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। यह पोर्टल 2019 में लॉन्च हुआ था और जनवरी 2020 में भारत के गृह मंत्री द्वारा समर्पित किया गया था। इस पोर्टल की खासियतें हैं कि यह सभी प्रकार के साइबर क्राइम की केंद्रीकृत रिपोर्टिंग को सक्षम बनाता है, शिकायतों को संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्वचालित रूप से असाइन करता है, और वित्तीय धोखाधड़ी रिपोर्टिंग के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 के साथ एकीकृत है।
इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी अब पहले से कहीं अधिक परिष्कृत हो गए हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हैं, और निवेश के नाम पर लोगों को फंसाते हैं। आम जनता को इन धोखाधड़ी से बचने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, विशेषकर ऑनलाइन निवेश के मामलों में।
यह केस भारत के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रभावशीलता को दर्शाता है और यह दिखाता है कि भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने वाले अंतर्राष्ट्रीय साइबर क्राइम ऑपरेशन कितने परिष्कृत हो गए हैं। फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए यह धोखाधड़ी एक नई चुनौती बनकर उभरी है जिसके लिए तकनीकी जागरूकता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।