देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। बुधवार 6 अगस्त 2025 को कंपनी के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी मिलिंद लक्कड़ और सीएचआरओ डेजिग्नेट के. सुदीप ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आधिकारिक ईमेल के जरिए बताया कि लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि की जाएगी। यह वेतन वृद्धि 1 सितंबर 2025 से प्रभावी होगी।
कंपनी द्वारा जारी किए गए ईमेल में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि “हमें C3A और समकक्ष ग्रेड तक के सभी पात्र सहयोगियों के लिए सैलरी संशोधन की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जो हमारे 80 प्रतिशत कार्यबल को कवर करेगा।” ईमेल में आगे लिखा गया है कि “हम आप सभी को आपके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं, क्योंकि हम मिलकर TCS का भविष्य बना रहे हैं।”
यह वेतन वृद्धि मुख्यतः जूनियर से लेकर मिड-लेवल के कर्मचारियों को लाभान्वित करेगी। हालांकि, वेतन वृद्धि की सटीक मात्रा या प्रतिशत के बारे में तुरंत जानकारी नहीं मिली है। टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि “हम यह कंफर्म करते हैं कि हम लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों को 1 सितंबर 2025 से प्रभावी वेतन वृद्धि देंगे।”
TCS का यह निर्णय उस समय आया है जब कंपनी अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग 2 प्रतिशत या 12,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। यह स्पष्ट विरोधाभास दिखाता है कि कंपनी एक तरफ अपने मध्यम और जूनियर स्तर के कर्मचारियों को प्रेरित और बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मध्यम और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों की छंटनी कर रही है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कदम “भविष्य के लिए तैयार संगठन” बनने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। TCS के अनुसार, यह रणनीति कई मोर्चों पर काम करती है जिसमें नई तकनीकी क्षेत्रों में निवेश, नए बाजारों में प्रवेश, ग्राहकों और कंपनी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बड़े पैमाने पर तैनाती, साझेदारी को गहरा करना, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे का निर्माण, और कार्यबल मॉडल का पुनर्संरेखण शामिल है।
यह वेतन वृद्धि की घोषणा TCS की प्रतिभा को पुरस्कृत करने और बनाए रखने की रणनीति का स्पष्ट संकेत है। आईटी इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुशल कर्मचारियों की कमी के बीच, कंपनी अपने महत्वपूर्ण टैलेंट को खुश रखना चाहती है। खासकर उस समय जब पूरे उद्योग में अनिश्चितता का माहौल है।
कंपनी ने अपनी रणनीति के तहत कई रीस्किलिंग और पुनर्नियुक्ति पहल भी शुरू की हैं। “इस यात्रा के हिस्से के रूप में, हम उन सहयोगियों को भी संगठन से मुक्त करेंगे जिनकी तैनाती संभव नहीं हो सकती। यह मुख्यतः मध्यम और वरिष्ठ ग्रेड में हमारे वैश्विक कार्यबल के लगभग 2 प्रतिशत को प्रभावित करेगा,” कंपनी ने बताया था।
TCS की यह रणनीति तकनीकी क्रांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में देखी जा रही है। कंपनी का कहना है कि वह नई तकनीकों, AI, और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे पर फोकस कर रही है। इसके लिए कई कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाकर अलग-अलग विभागों में तैनात किया जा रहा है। लेकिन जिन कर्मचारियों की कौशल अब कंपनी की बदलती जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें छोड़ना पड़ सकता है।youtube
हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह छंटनी AI की वजह से नहीं की जा रही है, बल्कि यह उन कर्मचारियों को प्रभावित करेगी जिनकी स्किल्स अब भविष्य की जरूरतों के मुताबिक नहीं हैं।
दिलचस्प बात यह है कि TCS का वित्तीय प्रदर्शन इस समय काफी अच्छा है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में 63,437 करोड़ रुपये की कमाई दिखाई, जो पिछले साल से 1.3 प्रतिशत अधिक है। TCS का मुनाफा भी 5.9 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी ने मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के लिए 12,760 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के 12,040 करोड़ रुपये से 6 प्रतिशत अधिक है।youtube
30 जून 2025 तक, TCS के कुल कर्मचारियों की संख्या 6,13,069 थी। हाल ही में समाप्त जून तिमाही में इसने अपने कार्यबल में 5,000 की वृद्धि भी की है। यह दिखाता है कि कंपनी एक तरफ नए लोगों को भर्ती कर रही है और साथ ही चुनिंदा छंटनी भी कर रही है।
TCS का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कंपनी चुनिंदा प्रतिभा को बनाए रखने और संगठनात्मक दक्षता में सुधार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। एक तरफ जहां कंपनी अपने अधिकांश कर्मचारियों को वेतन वृद्धि देकर प्रेरित कर रही है, वहीं उन कर्मचारियों की छंटनी कर रही है जो भविष्य की जरूरतों के अनुकूल नहीं हैं।
यह रणनीति आने वाले समय में भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर सकती है। अन्य बड़ी आईटी कंपनियां भी इसी तरह की रणनीति अपनाने को मजबूर हो सकती हैं। TCS के इस निर्णय से यह भी स्पष्ट होता है कि भविष्य में आईटी सेक्टर में केवल वे कर्मचारी टिक पाएंगे जो नई तकनीकों के साथ खुद को अपडेट रखेंगे।
कंपनी की यह द्विमुखी रणनीति दिखाती है कि आज के युग में कैसे संगठन एक साथ विकास और पुनर्गठन कर रहे हैं। TCS का यह फैसला न केवल कंपनी के भविष्य को प्रभावित करेगा बल्कि पूरे भारतीय आईटी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।