भिलाई। स्टील की दुनिया में भारत की मजबूत पहचान बनाने वाले भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे की बढ़ती मांग को देखते हुए यहां हेड हार्डेड रेल का उत्पादन करने के लिए एक अत्याधुनिक प्लांट की स्थापना की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने 3000 करोड़ रुपए की प्रारंभिक मंजूरी दे दी है।
परियोजना को मिली प्रारंभिक मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के स्टेज-1 को मंजूरी मिल चुकी है और अब तेजी से इसका कार्यान्वयन किया जा रहा है। नए यूनिवर्सल रेल स्ट्रक्चर मिल (यूआरएसएम) की स्थापना मौजूदा यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) के समीप की जाएगी। इसके लिए लगभग एक किलोमीटर लंबा भूखंड चिह्नित किया गया है, जहां यह अत्याधुनिक सुविधा स्थापित होगी।
भिलाई स्टील प्लांट के जनसंपर्क विभाग के प्रभारी अधिकारी अमूल्य प्रियदर्शी ने बताया कि “बीएसपी में हेड हार्डेड रेल के लिए यूआरएसएम का प्रस्ताव बोर्ड से पास हो गया है और टेंडरिंग प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।”
हेड हार्डेड रेल की तकनीकी विशेषताएं
हेड हार्डेड रेल आधुनिक रेलवे प्रणाली की एक क्रांतिकारी तकनीक है। यह सामान्य रेल पटरी की तुलना में डेढ़ गुना अधिक कठोर होती है। इसकी कठोर सतह के कारण यह अधिक भार सहन कर सकती है और इसकी जीवन अवधि भी काफी लंबी होती है। इस तकनीक से निर्मित रेल पटरी पर हाई स्पीड ट्रेन और हैवी गुड्स ट्रेन दोनों सुरक्षित रूप से चल सकती हैं।
वर्तमान में बीएसपी के यूआरएम में भी इस रेल का उत्पादन किया जाता है, लेकिन वहां उत्पादन की गति धीमी है और दूसरे रेल के उत्पादन को बंद करना पड़ता है। इससे कंपनी को नुकसान उठाना पड़ता है। नए प्लांट की स्थापना से यह समस्या हल हो जाएगी और निरंतर उत्पादन संभव हो सकेगा।
रेलवे की बढ़ती आवश्यकताएं
भारतीय रेल अब देशभर में ट्रेनों की गति बढ़ाने और आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। बड़े शहरों के बीच मेट्रो ट्रेन और हाई स्पीड ट्रेन चलाने की तैयारी तेजी से की जा रही है। इसके लिए भारतीय रेल को शुरुआत में 1 लाख टन कठोर सतह वाली रेल पटरी की आवश्यकता है।
आने वाले समय में यह मांग और भी बढ़ेगी। रेलवे विभाग का लक्ष्य है कि कठोर सतह वाली रेल पटरी का उत्पादन सालाना 10 लाख टन तक पहुंचाया जाए। रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे 2035 तक सेल-बीएसपी से हेड हार्डेड रेल पटरी की लगातार आपूर्ति लेने को तैयार हैं।
आर्थिक लाभ और व्यावसायिक संभावनाएं
हेड हार्डेड रेल का उत्पादन बीएसपी के लिए आर्थिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी साबित होगा। चूंकि यह रेल पटरी सामान्य रेल की तुलना में महंगी होती है, इसलिए इसकी आपूर्ति से कंपनी को बेहतर मुनाफा होगा। वर्तमान में रेलवे को विदेशों से हेड हार्डेड रेल पटरी मंगानी पड़ती है, लेकिन नए प्लांट की स्थापना के बाद यह आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
सीटू के नेता डीवीएस रेड्डी का कहना है कि “स्टेज 1 में यूआरएसएम को मंजूरी मिल गई है। अब प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की जरूरत है। देरी करने से लागत में इजाफा हो जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण करने वाली एजेंसी अगर समय पर काम पूरा नहीं करती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
विश्व के केवल कुछ बड़े देशों में ही हेड हार्डेड रेल का उत्पादन किया जा रहा है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की प्रमुख इकाई बीएसपी में इस तकनीक का उत्पादन शुरू होने से सेल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में साख और मजबूत हो जाएगी। यह भारत को स्टील उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अधिकारियों का मानना है कि हेड हार्डेड रेल का अधिक उत्पादन करने पर भारत दूसरे देशों को इस रेल पटरी का निर्यात भी कर सकेगा। कठोर सतह वाली रेल पटरी तैयार करने वाली दुनिया में चुनिंदा कंपनियां हैं और सेल-बीएसपी भी उनमें शामिल हो जाएगी।
तकनीकी चुनौतियां और समाधान
नई मिल की स्थापना में कई तकनीकी चुनौतियां हैं। उन्नत मशीनरी और विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होगी। इसके लिए विदेशी तकनीक का सहारा लेना पड़ सकता है या फिर स्वदेशी तकनीक का विकास करना होगा।
प्लांट की स्थापना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य नियामक अनुमतियां भी आवश्यक होंगी। इसके अलावा कुशल श्रमिकों की ट्रेनिंग और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था स्थापित करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
भविष्य की योजनाएं
यह परियोजना न केवल रेलवे की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करेगी बल्कि भारत के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मेक इन इंडिया अभियान के तहत यह एक महत्वपूर्ण पहल है जो देश को रेल उत्पादन के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में ला सकती है।
सेल-बीएसपी की यह पहल छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में भी नया अध्याय जोड़ेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास होगा। परियोजना के पूरा होने के बाद भिलाई स्टील प्लांट भारतीय रेलवे का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन जाएगा।