नई दिल्ली। टेक जगत में एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने Google के क्रोम ब्राउज़र को खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर का अनसॉलिसिटेड ऑफर दिया है। यह बोली तब आई है जब गूगल पर अमेरिकी न्यायालय में एंटीट्रस्ट का मुकदमा चल रहा है और इस महीने के अंत तक फैसला आने की उम्मीद है।
महत्वाकांक्षी बोली के पीछे की रणनीति
Perplexity AI का यह ऑफर काफी दिलचस्प है क्योंकि कंपनी का अपना वैल्यूएशन केवल 18 अरब डॉलर है, जबकि वे क्रोम के लिए इससे दोगुना पैसा देने को तैयार हैं। कंपनी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने Google के सीईओ सुंदर पिचाई को लिखे गए पत्र में कहा है कि यह प्रस्ताव “उच्चतम सार्वजनिक हित में एंटीट्रस्ट समाधान को संतुष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है”।
Perplexity ने वादा किया है कि वे:
- क्रोम के अंतर्निहित क्रोमियम ब्राउज़र कोड को ओपन सोर्स रखेंगे
- दो सालों में 3 अरब डॉलर का निवेश करेंगे
- क्रोम की मुख्य कार्यक्षमता में कोई बदलाव नहीं करेंगे
एंटीट्रस्ट केस का संदर्भ
यह बोली उस समय आई है जब अमेरिकी न्यायालय में Google के खिलाफ एंटीट्रस्ट का ऐतिहासिक मुकदमा चल रहा है। अगस्त 2024 में, यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज अमित मेहता ने फैसला दिया था कि गूगल ने अवैध रूप से सर्च मार्केट में एकाधिकार बनाए रखा है।
अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने गूगल पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने एप्पल और अन्य डिवाइस निर्माताओं के साथ अरबों डॉलर के एक्सक्लूसिव सौदे किए हैं ताकि गूगल सर्च को डिफॉल्ट सर्च इंजन के रूप में रखा जा सके।
जज मेहता का फैसला इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है, जो गूगल को क्रोम को बेचने के लिए मजबूर कर सकता है। यूएस न्याय विभाग ने तर्क दिया है कि Google के पास 90 प्रतिशत सर्च मार्केट का कंट्रोल है और इसे तोड़े बिना प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती।
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय
इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का कहना है कि Perplexity का यह ऑफर गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। बेयर्ड इक्विटी रिसर्च के एनालिस्ट्स का कहना है कि यह बोली “क्रोम को काफी कम वैल्यू करती है और इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए”। कुछ एनालिस्ट्स ने क्रोम की वैल्यू 50 अरब डॉलर से अधिक बताई है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि परप्लेक्सिटी यह बोली इसलिए लगा रही है क्योंकि:
- कोर्ट के फैसले को प्रभावित करना
- अन्य कंपनियों को बिडिंग के लिए प्रेरित करना
- अपनी कॉमेट ब्राउज़र के साथ प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना
फंडिंग की चुनौती
Perplexity ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कैसे करेंगे। कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर दिमित्री शेवेलेंको के अनुसार, कई बड़े इन्वेस्टमेंट फंड्स ने इस डील को पूरी तरह से फाइनेंस करने की पेशकश की है।
कंपनी ने अब तक एनवीडिया और सॉफ्टबैंक जैसे निवेशकों से लगभग 1 अरब डॉलर जुटाए हैं। हालांकि, फंडिंग के स्रोतों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
Google की प्रतिक्रिया और रणनीति
Google ने इस बोली पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कंपनी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे क्रोम को बेचने के लिए तैयार नहीं हैं और इसे “अभूतपूर्व प्रस्ताव” बताते हुए कहा है कि यह उपभोक्ताओं और सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकता है।
Google के वकील जॉन श्मिड्टलीन ने कोर्ट में तर्क दिया है कि 80 प्रतिशत से अधिक क्रोम यूजर्स अमेरिका के बाहर हैं, इसलिए इसे बेचने का वैश्विक प्रभाव होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि “कोई भी अलग किया गया क्रोम मौजूदा क्रोम की छाया मात्र होगा”।
एआई युद्ध में नई रणनीति
Perplexity का यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। कंपनी ने हाल ही में अपना एआई-पावर्ड ब्राउज़र ‘कॉमेट’ लॉन्च किया है जो गूगल क्रोम को सीधी चुनौती देता है।
Perplexity एआई-आधारित सर्च तकनीक के लिए जानी जाती है जो उपयोगकर्ताओं के सवालों के सीधे जवाब देती है और मूल स्रोतों से लिंक करती है। कंपनी चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी जैसे प्रतिस्पर्धियों के साथ जेनेरेटिव एआई की दौड़ में शामिल है।
वैश्विक प्रभाव और भारतीय संदर्भ
इस मामले का प्रभाव भारत सहित दुनियाभर में महसूस किया जा सकता है। भारत में भी Google के वर्चस्व को लेकर नियामक संस्थाओं द्वारा जांच की गई है। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने पहले भी Google पर एंटीट्रस्ट के मुद्दों पर कार्रवाई की है।
यदि अमेरिकी अदालत गूगल को क्रोम बेचने का आदेश देती है, तो इसका प्रभाव:
- वैश्विक ब्राउज़र मार्केट पर होगा
- एआई सर्च टेक्नोलॉजी के विकास पर असर डालेगा
- डिजिटल एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को प्रभावित करेगा
तकनीकी और व्यावसायिक चुनौतियां
क्रोम दुनिया का सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़र है जिसके 3 अरब से अधिक यूजर्स हैं और वैश्विक ब्राउज़र मार्केट में इसकी 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह Google की सर्च और एडवर्टाइजिंग रणनीति का मुख्य हिस्सा है।
Perplexity के लिए मुख्य चुनौतियां:
- भारी फंडिंग की आवश्यकता
- तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का रखरखाव
- यूजर्स और डेवलपर्स का भरोसा बनाए रखना
- Google के इकोसिस्टम से अलग करना
भविष्य की संभावनाएं
यह मामला टेक इंडस्ट्री के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करता है। यदि परप्लेक्सिटी का ऑफर सफल हो जाता है, तो यह:
- एआई-पावर्ड सर्च के क्षेत्र में नया मानदंड स्थापित करेगा
- छोटी कंपनियों को बड़े टेक जायंट्स से प्रतिस्पर्धा का मौका देगा
- इंटरनेट ब्राउज़िंग के तरीके को बदल सकता है
हालांकि Perplexity का मानना है कि Google के लंबी कानूनी लड़ाई के बिना क्रोम बेचने की संभावना कम है। कंपनी अपील करने की तैयारी कर रही है और इस पूरे मामले में सालों लग सकते हैं।
यह मामला न केवल अमेरिकी टेक इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम के भविष्य को भी निर्धारित कर सकता है। जज मेहता का आने वाला फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।