छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक सरकारी स्कूल के प्रधान अध्यापक का शर्मनाक व्यवहार सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल कर दिया है। वाड़ाफनगर ब्लॉक के रुप्पुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधान अध्यापक मनमोहन सिंह नशे की हालत में शॉर्ट्स पहनकर स्कूल पहुंचे और बच्चों को पढ़ाने का दावा किया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें मनमोहन सिंह को नशे में धुत्त होकर कक्षा में पढ़ाते और अपने कार्यालय में आराम करते देखा जा सकता है। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने बेशर्मी से स्वीकार किया कि वे ड्यूटी पर आने से पहले शराब पीकर आए हैं।
मनमोहन सिंह ने अपने इस अनुचित व्यवहार को सही ठहराने के लिए एक अजीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि वे फ्रैक्चर का इलाज करा रहे हैं और डॉक्टर ने उन्हें दवा के रूप में शराब पीने की सलाह दी है। यह बहाना न केवल हास्यास्पद है बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए शर्मनाक भी है।
स्थानीय ग्रामीणों और परिवारजनों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। मनमोहन सिंह अक्सर नशे की हालत में स्कूल आते हैं, जिससे 40 छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्होंने यह कई बार किया है और इससे बच्चों की शिक्षा में बाधा आ रही है तथा स्कूल का माहौल खराब हो गया है।
अभिभावकों ने इस मामले की शिकायत ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से की है, लेकिन अभी तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। निराश ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग कार्रवाई करने में असफल रहा तो वे स्कूल का बहिष्कार करेंगे और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे।
एक अभिभावक ने कहा कि यह व्यवहार न केवल बच्चों के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सरकारी स्कूलों की छवि को भी धूमिल कर रहा है। यह घटना सरकारी शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति को दर्शाती है।
शिक्षा विभाग की चुप्पी और मनमोहन सिंह के खिलाफ किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का अभाव चिंता का विषय है। ड्यूटी से पहले शराब पीना आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
यह मामला न केवल सरकारी फाइलों में बल्कि जनता की स्मृति में भी दर्ज हो गया है। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और छात्रों के सीखने के माहौल की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। समुदाय की मांग है कि तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।