छत्तीसगढ़ में मुठभेड़: 35 लाख रुपए के इनामी दो नक्सली कमांडर मारे गए

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो वरिष्ठ नक्सली कमांडर मारे गए। यह घटना बुधवार, 13 अगस्त 2025 को हुई, जिसमें कुल मिलाकर 35 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों को सफलतापूर्वक समाप्त किया गया। यह राज्य के वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता है।

मुठभेड़ का विवरण

यह ऑपरेशन मदनवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेतेगांव गांव के निकट बांदा पहाड़ वन क्षेत्र में हुआ। जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) की 27वीं बटालियन के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान यह मुठभेड़ हुई। सुरक्षा बलों ने मंगलवार रात विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान शुरू किया था, जिसमें वरिष्ठ माओवादी कैडरों की मौजूदगी की सूचना थी।

बुधवार दोपहर भारी बारिश के बीच जब सुरक्षाकर्मी क्षेत्र की घेराबंदी कर रहे थे, तभी मुठभेड़ शुरू हुई। लगभग एक घंटे तक चली इस गोलीबारी में दो नक्सली कमांडर मारे गए।

मारे गए नक्सली नेताओं की पहचान

55 वर्षीय विजय रेड्डी, जो सीपीआई (माओवादी) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का सदस्य था और आंध्र प्रदेश का मूल निवासी था। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम था। वह पिछले 12-14 वर्षों से राजनांदगांव-कांकेर सीमा क्षेत्र में सक्रिय था और महाराष्ट्र सहित पड़ोसी राज्यों में भी उस पर अतिरिक्त इनाम था।

40 वर्षीय लोकेश सलामे राजनांदगांव-कांकेर-बॉर्डर डिवीजन का डिवीजनल कमेटी सदस्य था और राजनांदगांव जिले का निवासी था। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम था। वह 2008 से सक्रिय था और पहले गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण कर चुका था लेकिन बाद में फिर से ऑपरेशन में लौट आया था।

ऐतिहासिक महत्व और 2009 राजनांदगांव हमला

दोनों कमांडर कथित रूप से 2009 के राजनांदगांव हमले में शामिल थे, जिसमें पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे सहित 30 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। यह मुठभेड़ उसी स्थान के करीब हुई जहां 29 जुलाई 2009 को यह बड़ा हमला हुआ था।

व्यापक माओवाद विरोधी अभियान

यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ के माओवादी गतिविधियों के खिलाफ तेज किए गए अभियान का हिस्सा है, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लक्ष्य के अनुरूप है। 2025 में अब तक छत्तीसगढ़ भर में मुठभेड़ों में 229 माओवादी मारे जा चुके हैं, जिनमें से 208 बस्तर क्षेत्र में समाप्त किए गए हैं।

मदनवाड़ा वन क्षेत्र लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का एक रणनीतिक गढ़ रहा है, जहां प्रशिक्षण शिविर और हथियारों के भंडार थे। इस क्षेत्र का उपयोग सीपीआई (माओवादी) की कंपनी नंबर 5 द्वारा किया जा रहा था।

सुरक्षा बल इस क्षेत्र में खोजी अभियान जारी रखे हुए हैं क्योंकि अभी भी अतिरिक्त हथियार और शव बरामद हो सकते हैं। यह सफल ऑपरेशन राज्य सरकार की माओवादी समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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