दुर्ग में साइबर जागरूकता रथ शुरू, पुलिस और एसबीआई की संयुक्त पहल से डिजिटल सुरक्षा अभियान

छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। दुर्ग पुलिस और भारतीय स्टेट बैंक की संयुक्त पहल पर रविवार को भिलाई के पुलिस नियंत्रण कक्ष परिसर से साइबर जागरूकता रथ को रवाना किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के नागरिकों को ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड से बचाव के तरीकों की जानकारी देना है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने साइबर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में एएसपी सुखनंदन राठौर, एएसपी पद्मश्री तंवर, सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी के साथ-साथ एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। बैंक की तरफ से क्षेत्रीय प्रबंधक रूपक कुमार मंडल, सेक्टर-1 के मुख्य प्रबंधक निशेष कश्यप और मुख्य प्रबंधक देव रंजन मिश्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

साइबर जागरूकता रथ पहले चरण में दुर्ग के प्रमुख स्थानों पर जाकर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करेगा। इसमें दुर्ग रेलवे स्टेशन, सुपेला मार्केट, बस स्टैंड दुर्ग, सिविक सेंटर और नेहरू नगर जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। इन सभी जगहों पर नुक्कड़ नाटक, ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति और इंटरैक्टिव वार्ताओं के माध्यम से आम नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए जाएंगे।

इस अभियान में टोल फ्री नंबर 1930 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। यह साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर है जिस पर कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज करा सकता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस नंबर की मदद से तत्काल कार्रवाई की जा सकती है और पीड़ितों को राहत मिल सकती है।

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन लेनदेन और इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही साइबर फ्रॉड के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। फर्जी कॉल, फिशिंग मैसेज, फेक वेबसाइट और ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड जैसे अपराध आम हो गए हैं। इन सभी समस्याओं को देखते हुए पुलिस और बैंक की यह संयुक्त पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है।

साइबर जागरूकता रथ के माध्यम से लोगों को OTP शेयर न करने, अज्ञात लिंक पर क्लिक न करने, बैंक डिटेल्स सुरक्षित रखने और संदिग्ध कॉल्स से बचने जैसी जरूरी बातें बताई जाएंगी। यह अभियान विशेष रूप से बुजुर्गों और तकनीकी जानकारी में कम लोगों पर केंद्रित है क्योंकि वे साइबर अपराधियों के आसान निशाने बनते हैं।

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