नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मंगलवार को संसद में एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि देश के 140 करोड़ नागरिकों को ChatGPT, Gemini, Claude और Grok जैसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की निःशुल्क सब्सक्रिप्शन प्रदान की जानी चाहिए।
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान चड्ढा ने कहा कि “एआई कोई तकनीक नहीं बल्कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीयों को 2030 के लिए तैयार होना चाहिए और देश की उत्पादकता बढ़ाने तथा कीमती समय बचाने के लिए जेनेरेटिव एआई टूल्स की निःशुल्क सब्सक्रिप्शन मिलनी चाहिए।
एआई इंडस्ट्री की भविष्य की संभावनाएं
सांसद राघव चड्ढा ने बताया कि वर्तमान में 140 करोड़ भारतीय एआई की संभावनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि इसकी लागत बहुत अधिक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2030 तक एआई से 15 ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनने की उम्मीद है। इसलिए भारत को इस क्षेत्र में पिछड़ने की बजाय आगे बढ़ना चाहिए।
चड्ढा ने कहा कि एआई टूल्स केवल विशेषाधिकार प्राप्त लोगों तक सीमित नहीं रहने चाहिए बल्कि इन्हें सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि एआई क्रांति में कोई भी भारतीय पीछे न छूटे।
विभिन्न वर्गों के लिए एआई के फायदे
राघव चड्ढा ने समझाया कि एआई टूल्स भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कैसे लाभकारी हो सकते हैं:
- किसानों के लिए: स्मार्ट फार्मिंग और फसल प्रबंधन में सहायता मिल सकती है। एआई टूल्स मौसम की भविष्यवाणी, मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण और बेहतर कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान कर सकते हैं।
- छात्रों के लिए: 24×7 ट्यूटरिंग सहायता उपलब्ध हो सकती है। छात्र किसी भी विषय में अपनी शंकाओं का समाधान तुरंत पा सकते हैं और व्यक्तिगत शिक्षण सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
- उद्यमियों के लिए: बिजनेस प्लानिंग में मार्गदर्शन मिल सकता है। स्टार्टअप आइडिया से लेकर मार्केट रिसर्च तक, एआई हर स्तर पर सहायता प्रदान कर सकता है।
- युवाओं के लिए: करियर गाइडेंस और स्किल डेवलपमेंट में मदद मिल सकती है। नौकरी खोजने से लेकर इंटरव्यू की तैयारी तक, एआई सभी में सहायक हो सकता है।
- बुजुर्ग नागरिकों के लिए: स्वास्थ्य सेवा सहायता और दैनिक जरूरतों में सपोर्ट मिल सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण और तुलना
अपनी मांग को मजबूत बनाने के लिए राघव चड्ढा ने यूएई, सिंगापुर और चीन जैसे देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इन देशों ने पहले से ही अपने नागरिकों को उन्नत एआई टूल्स तक निःशुल्क पहुंच प्रदान करना शुरू कर दिया है। चड्ढा ने जोर देकर कहा कि भारत को प्रतिस्पर्धी और दूरदर्शी बने रहने के लिए इस वैश्विक प्रवृत्ति का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि अन्य देश अपने नागरिकों को एआई का लाभ उठाने में मदद कर रहे हैं, तो भारत क्यों पीछे रहे। देश को डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए इस तरह के कदम उठाने चाहिए।
डिजिटल डेमोक्रेसी की दिशा में कदम
चड्ढा ने अपने प्रस्ताव को डिजिटल डेमोक्रेसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि एआई के आगमन में हर भारतीय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि एआई क्रांति में कोई भी भारतीय पीछे न रह जाए।
वर्तमान एआई सब्सक्रिप्शन की लागत
वर्तमान में, एआई टूल्स की पहुंच भारत में कई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है क्योंकि सब्स्क्रिप्शन की लागत काफी अधिक है। ChatGPT Plus जैसे प्रीमियम एआई टूल्स की वर्तमान में कीमत ₹1,999 प्रति माह है। हालांकि, OpenAI ने हाल ही में ₹399 प्रति माह की दर से अधिक किफायती ChatGPT Go प्लान पेश किया है, लेकिन यह भी कई भारतीयों के लिए महंगा है।
सरकारी नीति और भविष्य की संभावनाएं
राघव चड्ढा की यह मांग ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने में लगी हुई है। एआई और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए इस तरह की पहल की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यह न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि राष्ट्रीय विकास के लिए भी आवश्यक है। जब सभी नागरिक एआई का उपयोग कर सकेंगे तो देश की समग्र उत्पादकता में वृद्धि होगी और भारत वैश्विक एआई दौड़ में अग्रणी स्थान हासिल कर सकेगा।
निष्कर्ष
राघव चड्ढा का यह प्रस्ताव भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव है। यदि सरकार इस मांग पर विचार करती है और इसे लागू करती है, तो यह भारत को एआई के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीकी प्रगति का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहे बल्कि पूरे देश को मिले।