छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल की एक बैरक इन दिनों राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहां एक ऐसी घटना घटी है जो शायद ही कभी देखने को मिलती है। बघेल परिवार की तीनों पीढ़ियां अलग-अलग समय पर इसी बैरक में रह चुकी हैं। पहले स्वर्गीय नंद कुमार बघेल, फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अब उनके बेटे चैतन्य बघेल इसी बैरक में अपना समय काट चुके हैं या काट रहे हैं।
राजनीतिक विरासत और जेल की दीवारें
यह संयोग छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है। तीन अलग-अलग दशकों में, तीन अलग-अलग कारणों से, लेकिन एक ही स्थान पर बघेल परिवार के सदस्यों का रहना राजनीतिक इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
नंद कुमार बघेल: पहली पीढ़ी का जेल प्रवास
बघेल परिवार की इस अनूठी कहानी की शुरुआत 2021 में हुई जब नंद कुमार बघेल को विवादास्पद टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ब्राह्मण कुमार रावण को मत मारो’ में ब्राह्मण समुदाय के बारे में कुछ ऐसी बातें लिखी थीं जिससे विवाद खड़ा हो गया था। उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किए गए नंद कुमार बघेल को बाद में रायपुर जेल में रखा गया था।
इस मामले में दिलचस्प बात यह थी कि उस समय उनके बेटे भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। अपने पिता की गिरफ्तारी पर भूपेश बघेल ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा था कि “कानून अपना काम करेगा।” उन्होंने अपनी सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया और न्याय व्यवस्था को अपना काम करने दिया।
भूपेश बघेल: दूसरी पीढ़ी का सत्याग्रह
2017 में भूपेश बघेल, जो उस समय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, को कथित सेक्स सीडी कांड में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला तब शुरू हुआ जब उनके सहयोगी और पत्रकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान हुई इस गिरफ्तारी के बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक हंगामा मचा था।
भूपेश बघेल ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था और जेल में रहने का फैसला किया था। उन्होंने घोषणा की थी कि वे जेल में सत्याग्रह करेंगे। बाद में न्यायालय से उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने जेल में अपना समय बिताया था। दिलचस्प बात यह है कि वे उसी बैरक में रहे थे जहां आज उनके बेटे चैतन्य बघेल हैं।
चैतन्य बघेल: तीसरी पीढ़ी का वर्तमान संघर्ष
वर्तमान में चैतन्य बघेल छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले के मामले में 18 जुलाई, 2025 से रायपुर जेल में बंद हैं। वे बघेल परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो इसी बैरक में अपना समय काट रहे हैं। इस मामले में उन पर गंभीर आरोप लगे हैं और न्यायालय ने बार-बार उनकी रिमांड बढ़ाई है।
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य बघेल अक्सर अपने पिता और दादा के जेल प्रवास के बारे में सोचते रहते हैं। वे इस बात से प्रेरणा लेते हैं कि उनके परिवार के सदस्यों ने कैसे कठिन समय का सामना किया है। जेल में रहने के दौरान उन्होंने अध्ययन को अपना सहारा बनाया है।
जेल में अध्ययन और आत्म-चिंतन
चैतन्य बघेल ने जेल में अपना समय सदुपयोग करने का फैसला किया है। उन्होंने दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का अध्ययन किया है – जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध कृति ‘भारत की खोज’ और महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग की कहानी’। ये दोनों पुस्तकें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय विचारधारा की आधारशिलाओं को समझने में महत्वपूर्ण हैं।
इन पुस्तकों का चुनाव दिखाता है कि चैतन्य बघेल अपने कठिन समय का उपयोग आत्म-विकास और राष्ट्रीय मूल्यों को समझने में कर रहे हैं। गांधी जी की आत्मकथा विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यह घटना छत्तीसगढ़ की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल रही है। विपक्षी दल इसे अलग-अलग तरीकों से देख रहे हैं। कुछ इसे एक दुखद संयोग मानते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक न्याय का प्रतीक बताते हैं। कांग्रेस पार्टी इसे अपने नेताओं पर राजनीतिक बदला बताती है, जबकि भाजपा इसे कानून व्यवस्था की जीत करार देती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बघेल परिवार की राजनीतिक विरासत को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इतिहास गवाह है कि कई महान नेताओं ने जेल की सजा के बाद भी सफल राजनीतिक करियर बनाया है।
न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी पहलू
तीनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग रही है। नंद कुमार बघेल का मामला भाषणों और लेखन से जुड़ा था, भूपेश बघेल का मामला राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़ा था, जबकि चैतन्य बघेल का मामला आर्थिक अनियमितताओं से संबंधित है। तीनों मामलों में न्यायालय ने अपना फैसला संविधान और कानून के अनुसार दिया है या दे रहा है।
मंगलवार को न्यायालय ने चैतन्य बघेल की रिमांड चार दिन के लिए और बढ़ा दी है, जो दिखाता है कि जांच अभी भी जारी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अभी और समय लग सकता है।
यह अनूठी घटना छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। तीन पीढ़ियों का एक ही स्थान पर होना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि समय के साथ राजनीति में आने वाले बदलावों का भी प्रतीक है। यह घटना यह भी दिखाती है कि कानून व्यवस्था किसी भी व्यक्ति या परिवार के लिए अलग नहीं होती, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।