गीदम। छत्तीसगढ़ के गीदम जिले में पुलिस ने अवैध गौ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 54 कृषक पशुओं को बचाया है। यह ऑपरेशन गीदम थाना पुलिस द्वारा छिंदनार जंगल के पहाड़ी इलाके में चलाया गया, जिसमें तस्करों को रंगे हाथों पकड़ा गया।
थाना प्रभारी निरीक्षक विजय पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग बड़ी संख्या में मवेशियों को जंगली रास्ते से तेलंगाना की ओर ले जा रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छिंदनार जंगल क्षेत्र में दबिश दी और तस्करों की घेराबंदी कर उन्हें काबू में किया।
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने अपनी पहचान विष्णु कोर्राम (40 वर्ष) और चंदन कश्यप (58 वर्ष) के रूप में दी है। दोनों आरोपी कोंडागांव जिले के असलनार गांव के निवासी हैं और मर्दापाल थाना क्षेत्र में रहते हैं। पुलिस के अनुसार ये तस्कर लंबे समय से इस अवैध धंधे में सक्रिय थे और पशुओं को क्रूरतापूर्वक हांकते हुए अंतरराज्यीय सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस जांच से पता चला है कि आरोपी इन 54 बैलों को एक पूर्वनिर्धारित मार्ग से तेलंगाना के मुलगू स्थित बूचड़खाने तक पहुंचाने की योजना बना रहे थे। तस्कर असलनार, कुदुर, कोडे, इरपुन, सातधार, बारसूर और छिंदनार जंगल के रास्ते से इन पशुओं को ले जा रहे थे। यह मार्ग पारंपरिक रूप से मवेशी तस्करों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह सुनसान और दुर्गम क्षेत्र है जहां पुलिस की नजर से बचकर अवैध कारोबार किया जा सकता है।
इस मामले में पुलिस ने थाना गीदम में अपराध क्रमांक 75/2025 दर्ज किया है। आरोपियों पर छत्तीसगढ़ कृषक पशु संरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6 और 10 के साथ-साथ पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ये धाराएं अवैध गौ तस्करी और पशुओं के साथ क्रूरता के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करती हैं।
छत्तीसगढ़ कृषक पशु संरक्षण अधिनियम के तहत गौवंशीय पशुओं की तस्करी एक गंभीर अपराध माना जाता है। इस कानून के अनुसार बिना अनुमति के गौवंशीय पशुओं का परिवहन, बिक्री या वध करना दंडनीय अपराध है। वहीं पशु क्रूरता अधिनियम के तहत पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार करना भी कानूनन जुर्म है। इन कानूनों का उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।
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बरामद किए गए सभी 54 बैलों को तत्काल सुरक्षित गौशाला में भेज दिया गया है जहां उनकी उचित देखभाल की जा रही है। इन पशुओं की हालत से पता चलता है कि तस्कर इन्हें बेहद कष्टकारी परिस्थितियों में रख रहे थे। गौशाला में पहुंचने के बाद इन पशुओं को चारा-पानी की व्यवस्था के साथ-साथ पशु चिकित्सक द्वारा जांच भी कराई जा रही है।
इस सफल ऑपरेशन में उपनिरीक्षक दीनानाथ वैष्णव, उपनिरीक्षक प्रशांत सिंह, प्रधान आरक्षक राजकुमार, प्रधान आरक्षक नथलू कवासी, आरक्षक गिरीश नेताम, देवचरण मरकाम, रामचन्द्र जुर्री, खेमलाल रावटे, बालचंद गावड़े और मनीष ठाकुर सहित पूरी पुलिस टीम की अहम भूमिका रही है। इन सभी पुलिसकर्मियों ने अपनी रणनीतिक सूझबूझ और समन्वित कार्रवाई से इस मिशन को सफल बनाया।
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गीदम जिला पुलिस का यह कदम अपराध और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर अभियान का हिस्सा है। जिला पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं और किसी भी प्रकार की गैरकानूनी कार्रवाई की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करते हैं।
मवेशी तस्करी की समस्या न केवल कानून व्यवस्था का मामला है बल्कि यह किसानों की आजीविका और पशुपालन व्यवसाय को भी प्रभावित करती है। किसान अपनी खेती और दैनिक जरूरतों के लिए इन पशुओं पर निर्भर रहते हैं। जब उनके पशुओं की चोरी होती है या उन्हें जबरदस्ती ले जाया जाता है तो इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे आगे भी इस तरह की कार्रवाइयों को जारी रखेंगे और मवेशी तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है तो वे तत्काल पुलिस को सूचित करें। सामुदायिक सहयोग से ही इस तरह के अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।