छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में पुलिस की कड़ी कार्रवाई से नशे की तस्करी पर बड़ा प्रहार हुआ है। जिला पुलिस ने साढ़े साल की अवधि में चलाए गए व्यापक अभियान में गांजा, हेरोइन, ब्राउन शुगर समेत विभिन्न प्रकार की 1628 क्विंटल नशीली दवाएं बरामद की हैं। इस मामले में 83 अपराधियों को न्यायालय द्वारा दंडित किया गया है, जिसमें कई महिला तस्कर भी शामिल हैं।
मामले की न्यायिक जांच के बाद अदालत ने जब्त की गई समस्त नशीली सामग्री को नष्ट करने का आदेश जारी किया है। पुलिस विभाग न्यायालय के निर्देशानुसार गांजा, ब्राउन शुगर, हेरोइन (चिट्टा), कैप्सूल, सीरप, टेबलेट और इंजेक्शन को पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। नष्टीकरण कार्य नियमानुसार भिलाई स्टील प्लांट की धमन भट्ठी में जलाकर किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बीएसपी प्रबंधन से इस संबंध में चर्चा पूरी हो गई है। सोमवार को संभावित रूप से कंट्रोल रुम से विशेष वाहनों में भरकर सभी नशीली सामग्री को बीएसपी की धमन भट्ठी में जलाने के लिए ले जाया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में और कड़ी सुरक्षा के साथ संपन्न होगी।
भिलाई जिला पुलिस के इस व्यापक अभियान में कुल 239 मामले दर्ज किए गए हैं। बरामदगी के आंकड़े देखें तो 1620.49 किलोग्राम गांजा, 8.162 किलोग्राम गांजा के पौधे, 277.29 ग्राम हेरोइन, और 214.398 ग्राम ब्राउन शुगर जब्त किया गया है। इसके अतिरिक्त 194,856 नशीली दवा की गोलियां, 76,258 कैप्सूल, और 1,212 सीरप की बोतलें भी बरामद की गई हैं।
एसएसपी विजय अग्रवाल ने इस संबंध में कहा कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी एक गंभीर अपराध है जो युवाओं के शारीरिक विकास को नष्ट करता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी गतिविधियों से दूर रहें क्योंकि इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। नष्टीकरण कार्य नियमानुसार दिए गए निर्देशों के आधार पर बीएसपी की धमन भट्ठी में किया जाएगा। इन मामलों में वर्ष 2013 के कुछ पुराने प्रकरण भी शामिल हैं।
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट 1985 के अंतर्गत मादक पदार्थों और मन:प्रभावी औषधियों के अवैध व्यापार, सेवन और उत्पादन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं। इस कानून के तहत अपराध की प्रकृति और मात्रा के आधार पर विभिन्न स्तर की सजा का प्रावधान है।
कम मात्रा में नशीले पदार्थ रखने पर 6 महीने की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। वहीं व्यावसायिक मात्रा में तस्करी के मामले में 10 से 20 साल तक की कठोर कारावास की सजा या 1 लाख से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। न्यायालय विशेष परिस्थितियों में इससे भी अधिक दंड दे सकती है। छोटी और व्यावसायिक मात्रा के बीच की श्रेणी में 10 साल की कैद और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना निर्धारित है।
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एनडीपीएस अपराधों में दोबारा अपराध करने पर सजा दोगुनी हो सकती है। इस कानून के तहत जमानत के भी कठोर प्रावधान हैं और आसानी से जमानत नहीं मिलती है। हाल की घटनाओं में छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में अपराधियों को 10 साल की कठोर कारावास और 1 लाख रुपए जुर्माने की सजा मिली है।
जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के सचिव रविशंकर सिंह ने बताया कि एनडीपीएस अपराधों में कानूनी प्रक्रिया काफी जटिल है और इन मामलों में सख्ती से कार्रवाई होती है। न्यायालय इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए उचित दंड देती है।
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यह व्यापक अभियान समाज में नशे की बढ़ती समस्या के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। नशीली दवाओं की तस्करी न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि यह समाज के युवाओं के लिए गंभीर खतरा भी है। भिलाई पुलिस का यह अभियान दिखाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस समस्या से निपटने के लिए गंभीर हैं।
पुलिस विभाग और न्यायपालिका के बीच समन्वय से इस प्रकार के मामलों की त्वरित सुनवाई और उचित दंड दिया जा रहा है। नशीली सामग्री का वैज्ञानिक तरीके से नष्टीकरण यह सुनिश्चित करता है कि ये पदार्थ दोबारा गलत हाथों में न पहुंचें।
भिलाई का यह अभियान छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के लिए एक उदाहरण है। इस प्रकार के निरंतर अभियानों से नशे की तस्करी पर अंकुश लगाया जा सकता है और समाज को इस बुराई से मुक्त कराया जा सकता है। पुलिस का यह संदेश स्पष्ट है कि नशे की तस्करी में शामिल व्यक्तियों के साथ कोई समझौता नहीं होगा और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।