रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बड़ा मामला सामने आया है जहां एक युवक ने फर्जी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देने का काम किया था। आमानाका पुलिस की सतर्कता और तत्परता के कारण इस धोखेबाज का खेल समाप्त हो गया है। यह घटना 31 अगस्त 2025 की रात की है जब पुलिस द्वारा की जा रही नियमित वाहन चेकिंग के दौरान यह चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ।
आमानाका थाना क्षेत्र के चंदनडीह चौक और नंदनवन जीई रोड पर देर रात पुलिस अपनी नियमित गश्त के दौरान वाहनों की जांच कर रही थी। इसी समय पुलिस की नजर एक एक्टीवा स्कूटी पर पड़ी जो तेज रफ्तार से चली जा रही थी। स्कूटी का नंबर प्लेट MP04YJ1386 था जो मध्य प्रदेश का रजिस्ट्रेशन दर्शा रहा था। पुलिस ने तुरंत वाहन को रोकने का इशारा किया।
जब पुलिस ने वाहन चालक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम विशाल कुमार बताया। आरोपी की उम्र 29 वर्ष है और उसने अपने पिता का नाम राजीव कुमार बताया। पूछताछ के दौरान उसने अपना पता भोपाल, मध्य प्रदेश का बताया। विशाल कुमार का वर्तमान में रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के टैगोर नगर में अपने रिश्तेदारों के घर निवास था।
पुलिस जब चालानी कार्रवाई करने लगी तो आरोपी विशाल कुमार का रवैया अचानक से बदल गया। उसने पुलिस अधिकारियों को धमकाने और डराने की कोशिश शुरू कर दी। आरोपी ने दावा किया कि वह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत इंटेलिजेंस ब्यूरो का सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी है। अपने झूठे दावे को सच साबित करने के लिए उसने एक आईडी कार्ड भी दिखाया जिस पर भारत सरकार का मोनो और गृह मंत्रालय का नाम अंकित था।
विशाल कुमार ने पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की और कहा कि वह एक सरकारी अधिकारी होने के नाते किसी भी प्रकार के चालान या कार्रवाई से मुक्त है। उसने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके साथ कोई गलत व्यवहार किया गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आरोपी का मानना था कि उसकी फर्जी पहचान के सामने पुलिस डर जाएगी और उसे बिना किसी कार्रवाई के छोड़ देगी।
लेकिन आमानाका पुलिस के अनुभवी अधिकारियों को आरोपी के व्यवहार और दिखाए गए आईडी कार्ड पर संदेह हुआ। पुलिस ने तुरंत आईडी कार्ड की बारीकी से जांच की और कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से इसकी सत्यता की पुष्टि करने की कोशिश की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी द्वारा दिखाया गया आईडी कार्ड पूरी तरह से नकली और फर्जी था।
पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी विशाल कुमार इस प्रकार की फर्जी पहचान का उपयोग करके नियमित रूप से लोगों को धोखा देता था और अपने फायदे के लिए इसका गलत इस्तेमाल करता था। उसने अपनी झूठी पहचान के बल पर कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया था और चालानी कार्रवाई से बचने की कोशिश की थी। आरोपी का मूल निवास स्थान श्रीनिवास रेजीडेंसी, मकान नंबर 13/310, नर्मदापुरम रोड, डी-मार्ट के पास, भोपाल, मध्यप्रदेश है।
आमानाका थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी विशाल कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध क्रमांक 286/25 के तहत केस दर्ज किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 336(3), और 340(2) के साथ-साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वे आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने यह फर्जी आईडी कार्ड कहां से और कैसे बनवाया था। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है जो इस प्रकार के नकली दस्तावेज बनाने का काम करता हो। पुलिस का मानना है कि यह एक व्यापक जांच का विषय हो सकता है।
यह घटना इस बात को दर्शाती है कि आजकल नकली सरकारी पहचान पत्रों का दुरुपयोग एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। अपराधी इस प्रकार की फर्जी पहचान का उपयोग करके न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं बल्कि आम नागरिकों को भी धोखा देते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की सतर्कता और तत्परता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने इस घटना के बाद रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा दिखाए गए सरकारी आईडी कार्ड पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी केंद्रीय या राज्य सरकार की एजेंसी का अधिकारी बताता है और उसके व्यवहार या दस्तावेजों पर संदेह हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या पुलिस हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में जनता का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के जागरूक नागरिक ही ऐसे अपराधियों को पकड़वाने में मदद कर सकते हैं। यह घटना एक सफल उदाहरण है कि पुलिस की नियमित गश्त और चेकिंग कितनी प्रभावी हो सकती है।
आमानाका पुलिस की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस की कुशलता और सतर्कता का प्रमाण है। इस मामले की जांच अभी भी जारी है और पुलिस का मानना है कि जल्द ही इस मामले के सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आ जाएगी।