छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक बड़ी अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी का भंडाफोड़ किया है। 31 अगस्त 2025 को चिल्फी थाना क्षेत्र में एक ट्रक की चेकिंग के दौरान पुलिस ने गुप्त चैंबर से 2 क्विंटल से अधिक गांजा बरामद किया है, जिसकी बाजार में कीमत 50 लाख रुपए आंकी गई है। इस कार्रवाई में दो अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार किए गए हैं जो ओडिशा से दिल्ली तक इस नशीले पदार्थ की आपूर्ति कर रहे थे।
कबीरधाम पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर ट्रक के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। इस जानकारी के आधार पर थाना प्रभारी टीआई उमाशंकर राठौर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने चिल्फी थाना क्षेत्र में नाकाबंदी करके संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। रूटीन चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोका गया जिसमें दो व्यक्ति सवार थे।
प्राथमिक जांच में ट्रक सामान्य लगा, लेकिन पुलिस की संदेह की नजर ट्रक के असामान्य व्यवहार पर पड़ी। तस्करों का घबराया हुआ व्यवहार देखकर पुलिस ने गहन तलाशी का फैसला किया। जब ट्रक की विस्तृत जांच की गई तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि तस्करों ने फिल्मी स्टाइल में हाइड्रोलिक डाला के नीचे गुप्त चैंबर बनाकर गांजा छुपाया था। यह तकनीक इतनी चतुराई से इस्तेमाल की गई थी कि सामान्य नजर से इसका पता लगाना मुश्किल था। ट्रक के अंदरूनी हिस्से में एक विशेष चैंबर तैयार किया गया था जो बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखता था।
जब पुलिस ने हाइड्रोलिक सिस्टम को ऑपरेट किया तो गुप्त चैंबर खुला और अंदर से भारी मात्रा में गांजा मिला। यह देखकर पुलिस भी हैरान रह गई कि तस्कर कितनी तकनीकी जानकारी के साथ इस काम को अंजام दे रहे थे। इस प्रकार की तस्करी की तकनीक अब तक इस क्षेत्र में देखने को नहीं मिली थी।
पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- ईश्वर सिंह (48 वर्ष): हरियाणा के झज्जर जिले के जाखोदा गांव का निवासी, जो इस तस्करी रैकेट का मुख्य संचालक माना जा रहा है
- रामु सिंह परमार (32 वर्ष): राजस्थान के धौलपुर जिले के दौपुरा गांव का निवासी, जो ट्रक चालक की भूमिका में था
प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि दोनों आरोपी कई सालों से इस धंधे में शामिल हैं। वे विभिन्न राज्यों से गांजा खरीदकर दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में बेचने का काम करते थे। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जिसमें अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि यह गांजा ओडिशा राज्य से मंगवाया गया था और दिल्ली में पहुंचाया जाना था। ओडिशा के कुछ जिलों में गांजा की खेती अवैध रूप से की जाती है और वहां से यह पूरे देश में सप्लाई किया जाता है। तस्कर इस रूट का इस्तेमाल करके मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली तक पहुंचते थे।
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इस रूट की खासियत यह थी कि यह राष्ट्रीय राजमार्गों से होकर गुजरता है जहां सामान्यतः ट्रकों की आवाजाही ज्यादा होती है। इसलिए तस्कर इसे सुरक्षित रूट मानकर इसका इस्तेमाल करते थे। लेकिन कबीरधाम पुलिस की सतर्कता के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया।
पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार:
- गांजे की मात्रा: 2 क्विंटल से अधिक (लगभग 200+ किलो)
- बाजार मूल्य: 50-51 लाख रुपए
- कुल जप्त संपत्ति: 70 लाख रुपए (ट्रक और अन्य सामान सहित)
- ट्रक का मॉडल: हाइड्रोलिक सिस्टम वाला कमर्शियल व्हीकल
गांजे की गुणवत्ता की जांच करने पर पता चला कि यह उच्च श्रेणी का गांजा था जिसकी दिल्ली के बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल भी भेजे गए हैं।
कबीरधाम पुलिस की इस सफलता के पीछे एक सुव्यवस्थित रणनीति थी। नशा तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत सभी मुख्य रूट्स पर निगरानी बढ़ाई गई थी। पुलिस टीम को विशेष ट्रेनिंग दी गई थी कि वे किस प्रकार संदिग्ध वाहनों की पहचान करें और उनकी जांच करें।
इस ऑपरेशन में स्थानीय मुखबिर नेटवर्क की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि बिना जनता के सहयोग के इस प्रकार की सफलता संभव नहीं होती। इसलिए वे लगातार लोगों से अपील करते रहते हैं कि यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
वर्तमान में दोनों आरोपी पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे विस्तृत पूछताछ जारी है। पुलिस का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। पुलिस अन्य साथियों की तलाश में जुटी है और उम्मीद करती है कि जल्द ही पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हो जाएगा।
साइबर सेल की मदद से तस्करों के फोन रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। इससे पता चलने की उम्मीद है कि वे किस प्रकार पैसों का लेन-देन करते थे और उनके संपर्क में कौन-कौन से लोग थे।
यह कबीरधाम पुलिस की इस वर्ष की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। इससे न केवल एक बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ को बाजार में पहुंचने से रोका गया है, बल्कि तस्करों को यह संदेश भी मिला है कि पुलिस उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है। इस प्रकार की सफलताएं समाज को नशे की लत से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।