रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बड़ा GST घोटाला सामने आया है जिसमें मेसर्स मोक्षित कॉरपोरेशन और इससे जुड़ी 85 फर्मों पर 28.46 करोड़ रुपए के अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का गंभीर आरोप लगा है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) की विस्तृत जांच में यह बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है, जिसने पूरे राज्य में तहलका मचा दिया है। इस मामले में तीन राज्यों में व्यापक छापेमारी की गई है और मुख्य आरोपी पहले से ही न्यायिक हिरासत में बंद है।
DGGI के अधिकारियों के मुताबिक मोक्षित कॉरपोरेशन ने 22 करोड़ रुपए के टैक्स योग्य मूल्य पर 28.46 करोड़ रुपए का अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया है। यह घोटाला न केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित है बल्कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक इसका विस्तार है। जांच एजेंसी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित सभी 85 फर्मों को नोटिस जारी किया है।
साल 2024 से शुरू हुई इस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मोक्षित कॉरपोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने अपने रिश्तेदारों और जानकार लोगों के नाम पर दर्जनों फर्जी कंपनियां स्थापित की थीं। इन फर्जी फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर GST की चोरी की गई और अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा उठाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन में 200 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि शशांक चोपड़ा के नेतृत्व में चलाए गए इस घोटाले में मनी लॉन्डरिंग की गतिविधियां भी संचालित की गई थीं। विभिन्न राज्यों में फैले इस नेटवर्क के जरिए न केवल GST की चोरी की गई बल्कि काले धन को सफेद करने का भी काम किया गया। यह पूरा मामला आर्थिक अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है।
मोक्षित कॉरपोरेशन का मामला केवल GST घोटाले तक सीमित नहीं है। इस कंपनी पर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की सप्लाई में भी बड़ी गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप हैं। राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण संस्था में घटिया गुणवत्ता की दवाइयां और उपकरण सप्लाई करके मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप भी लगा है।
रीजेंट घोटाले के मामले में पहले से ही जेल में बंद शशांक चोपड़ा के खिलाफ अब यह नया मामला सामने आया है। एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने दो दिन पहले शशांक के पिता की दो लग्जरी कारें भी जब्त की थीं, जो इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसियां इस मामले में बेहद गंभीर हैं। यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठा रही है।
DGGI की टीमों ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर समन्वित छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, और अन्य सबूत बरामद किए गए हैं। यह सभी सामग्री घोटाले की गहराई और व्यापकता को समझने में मदद कर रही है।
जांच में यह भी पाया गया है कि इन फर्जी फर्मों के जरिए न केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाया गया बल्कि फर्जी बिलिंग भी की गई। यह पूरा तंत्र इतनी चतुराई से बनाया गया था कि शुरुआत में इसका पता लगाना मुश्किल था। हालांकि DGGI की सक्रिय जांच और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से यह घोटाला उजागर हो गया।
इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि 85 से अधिक फर्में इस घोटाले में शामिल हैं। यह दिखाता है कि यह केवल एक व्यक्ति या एक कंपनी का मामला नहीं है बल्कि एक बड़े संगठित गिरोह की करतूत है। सभी संदिग्ध कंपनियों को नोटिस जारी करने के साथ ही उनकी गतिविधियों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
GST व्यवस्था में यह घोटाला टैक्स कलेक्शन सिस्टम की कमजोरियों को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए और भी सख्त निगरानी प्रणाली की जरूरत है। सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और बेहतर नियंत्रण स्थापित करना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
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छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया है। राज्य के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से ऊपर नहीं है और आर्थिक अपराधों के लिए कड़ी सजा मिलेगी।
यह पूरा मामला व्यापारिक समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि GST नियमों का उल्लंघन करने वाले कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों की सक्रियता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अब इस तरह के घोटालों का पता लगाना आसान हो गया है।