छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें राकेश सूर्यवंशी के बैंक खाते से सुबह OTP भेजकर 2 लाख 35 हजार रुपये की ठगी की गई है। यह घटना तारबहार थाना क्षेत्र के विनोबानगर की है, जहाँ पीड़ित ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
विनोबानगर में किराए के मकान में रहने वाले राकेश कुमार सूर्यवंशी (38) की सामान्य सुबह एक डरावने सपने में बदल गई जब उसके मोबाइल पर एक OTP मैसेज आया। इस एक मैसेज के बाद कुछ ही मिनटों में उसके बैंक खाते से 2,35,338 रुपये गायब हो गए। जब उसने अपना बैलेंस चेक किया तो खाते में केवल 1,423.97 रुपये बचे थे।
राकेश मूल रूप से ग्राम पंड्रीपारा, पोस्ट ऑफिस घुटक, बिलासपुर का निवासी है और किसी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। उसने बताया कि उसने किसी को अपनी बैंकिंग जानकारी नहीं दी थी और न ही कोई संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया था।
घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद पीड़ित ने तारबहार थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 318 (4) भादंसं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
थाना इंचार्ज और साइबर सेल की टीम इस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस के अनुसार यह तकनीकी रूप से संगठित ठगी है जिसमें अपराधी बिना पीड़ित की जानकारी के ही उसके बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं।
बिलासपुर साइबर सेल के अनुसार अपराधी अब नए तरीकों से काम कर रहे हैं। वे SIM स्वैपिंग, मैलवेयर और फिशिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए लोगों के मोबाइल फोन को हैक कर लेते हैं। इसके बाद बैंक द्वारा भेजे गए OTP का दुरुपयोग करके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
इस तरह की ठगी में अपराधी अक्सर फर्जी सिम कार्ड, बैंक खाते और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। वे अलग-अलग राज्यों से ऑपरेट करते हैं जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
बिलासपुर में साइबर ठगी के मामले चिंताजनक दर से बढ़ रहे हैं। हाल ही में मस्तूरी थाना क्षेत्र में भी 1.21 लाख रुपये की इसी तरह की ठगी हुई थी। मई 2025 में KYC फ्रॉड के नाम पर 26.74 लाख रुपये की ठगी के मामले में तीन अंतर्राज्यीय ठग ओडिशा से गिरफ्तार किए गए थे।
पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार इस साल अब तक बिलासपुर जिले में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के दर्जनों मामले दर्ज हुए हैं। इसमें बुजुर्ग और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग मुख्य निशाना हैं।
बिलासपुर पुलिस ने लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक डिटेल, OTP या आधार कार्ड की जानकारी साझा न करें। फर्जी कॉल्स, सोशल मीडिया पर संदिग्ध चैट या लालच देने वाले ऑफर्स से बचें।
अपने मोबाइल फोन में एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें और केवल ऑफिशियल स्टोर से ऐप डाउनलोड करें। बैंक खाते की नियमित निगरानी करें और किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन के लिए तुरंत बैंक से संपर्क करें।
साइबर ठगी की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें। ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है और तत्काल कार्रवाई में मदद करती है।
पुलिस का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। बैंक भी ऐसे मामलों में तत्काल खाता ब्लॉक करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
राकेश सूर्यवंशी का मामला डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है। जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधी भी नई तकनीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं। तारबहार थाना क्षेत्र में दर्ज यह मामला एक चेतावनी है कि कैसे एक छोटा सा OTP किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है।
पुलिस अब इस मामले की गहरी जांच कर रही है और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से ठगों का पता लगाने में जुटी है। यह मामला साइबर सुरक्षा के महत्व और जनजागरूकता की जरूरत को एक बार फिर उजागर करता है