छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में अगले वर्ष एक बड़ी शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे, जिससे एमबीबीएस की 250 नयी सीटें जुड़ेंगी। इस विकास से राज्य में मेडिकल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे।
प्रदेश के कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, गीदम और जशपुर जिलों में ये मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटें होंगी, जिससे कुल सीटें 2180 से बढ़कर 2430 हो जाएंगी। यह योजना नीट यूजी की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए स्वर्णिम अवसर साबित होगी। सीटों की संख्या में वृद्धि से मेडिकल प्रवेश में कट ऑफ मार्क्स भी कम होने की संभावना है, जिससे अधिक विद्यार्थी सफलता पा सकेंगे।
मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए मेडिकल शिक्षा का नियम यह है कि 50 सीटों के लिए 220 बेड का अस्पताल आवश्यक है। विस्तार से बताया गया है कि कवर्धा, जांजगीर, मनेंद्रगढ़ और गीदम के जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया जाएगा। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं भी बेहतर होंगी और मेडिकल कॉलेज के संचालन के साथ ही चिकित्सा सुविधाएं भी सुचारु रूप से उपलब्ध होंगी। जशपुर कॉलेज के लिए नए बिल्डिंग निर्माण की योजना है, जहां अस्पताल संबद्धता बाद में स्थापित की जाएगी।
पिछले साल अक्टूबर में चार कॉलेजों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन टेंडर विवाद के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। फिलहाल टेंडर प्रक्रिया पुनः शुरू की गई है, जिससे जल्द ही मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य की शुरुआत संभव हो सकेगी। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इस परियोजना को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया है और मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए आवश्यक समस्त तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज सक्रिय हैं, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, अम्बिकापुर, महासमुंद, कांकेर, राजनांदगांव, रायगढ़ और जगदलपुर जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इन कॉलेजों में कुल मिलाकर लगभग 1555 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा, प्रदेश में 5 निजी मेडिकल कॉलेज भी हैं, जिनमें लगभग 700 सीटें हैं। इन नई 5 कॉलेजों के जुड़ने से मेडिकल शिक्षण संस्थानों की संख्या और भी बढ़ेगी।
यह विस्तार प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र को सुदृढ़ करेगा और ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को भी मेडिकल शिक्षा के निकट लाने का माध्यम बनेगा। नीट परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे अनेक युवाओं के लिए यह विकास एक बड़ी खुशी लेकर आएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा जारी नवीनतम नियमों के अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बुनियादी ढांचा, आवश्यक संसाधन और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। छत्तीसगढ़ की कई मेडिकल कॉलेजों ने हाल ही में एनएमसी से अनिवार्य शर्तों के अनुरूप कंडीशनल अप्रूवल भी प्राप्त किया है। यह स्थिति प्रदेश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधार की दिशा में आशा की किरण है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विस्तार से न केवल मेडिकल सीटों में वृद्धि होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा। मेडिकल कॉलेज जिला अस्पतालों के साथ संबद्ध होते हैं, जिससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ ही चिकित्सकीय प्रशिक्षण भी सुधरेगा। यह समग्र स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद करेगा।
सरकार द्वारा 2025-26 में मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में हुए निवेश और नए कॉलेज खोलने की योजना से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दे रहा है। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही, युवा मेडिकल विशेषज्ञों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में भी वृद्धि होगी, जो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।
इस योजना के पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी। इससे प्रदेश का मेडिकल कॉम्युनिटी और छात्र वर्ग दोनों को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से छात्र संख्या अधिक होने के कारण मेडिकल शिक्षण में विविधता और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।
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इस प्रकार, छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए शुरू हो रहे ये 5 नए मेडिकल कॉलेज मेडिकल शिक्षा को सशक्त बनाने के कदम हैं। राज्य सरकार की इस पहल से विद्यार्थियों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली दोनों को लाभ मिलेगा, जो प्रदेश के समग्र विकास में सहायता करेगी। आगामी वर्षों में और अधिक मेडिकल कॉलेज खोलकर छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनाया जाएगा।