छत्तीसगढ़ राजनीति में कार्टून विवाद: भाजपा का कांग्रेस रैली पर तंज

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर कार्टून विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की रैली में भीड़ नहीं जुटने पर तंज कसते हुए एक कार्टून जारी किया । यह घटना राज्य में चल रहे राजनीतिक संघर्ष की नई मिसाल है और दोनों पार्टियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।

भाजपा छत्तीसगढ़ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने एक विवादास्पद कार्टून पोस्ट किया जिसमें लिखा था “छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मची रार, कांग्रेस की रैली में रुपए बांटने के बाद भी नहीं जुट रही भीड़” । इस कार्टून में भूपेश बघेल और दीपक बैज के बीच सचिन पायलट को गुस्से में दिखाया गया है, जहां पायलट कह रहे हैं “इतना पैसा दबाकर बैठे हो, भीड़ कैसे नहीं आई?” । यह कार्टून राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में भाजपा की आक्रामक रणनीति का प्रतिबिंब है।

भाजपा ने 18 सितंबर को एक वीडियो भी पोस्ट किया था जिसमें कांग्रेस पर रैली में पैसे देकर भीड़ बुलाने का आरोप लगाया गया था । पार्टी का दावा था कि यह वीडियो कांग्रेस के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली के दौरान का है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस को अपनी रैली के लिए लोग नहीं मिल रहे तो वे रुपये देकर रैली में भीड़ बुला रही है । इस तरह के आरोप राज्य में राजनीतिक माहौल को और भी तीखा बनाते हैं।

कांग्रेस का ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान भाजपा सरकार पर कथित वोटर लिस्ट में अनियमितताओं का आरोप लगाने के लिए शुरू किया गया था । यह अभियान 15 सितंबर से छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ जिसमें तीन दिवसीय पदयात्रा का आयोजन किया गया । सचिन पायलट ने इस अभियान को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने वोट चोरी पर सबूत दिए हैं । राहुल गांधी ने भी दावा किया कि उनका नारा ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ पूरे देश में साबित हो रहा है ।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्य अध्यक्ष दीपक बैज और कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट के बीच राजनीतिक समीकरण हमेशा चर्चा में रहते हैं । हाल में दीपक बैज के निवास पर सुरक्षा उल्लंघन की घटना हुई जिससे पार्टी में चिंता बढ़ी है । इसके अतिरिक्त जून में बैज का फोन चोरी होने की घटना भी विवाद का कारण बनी थी । ये सभी घटनाएं कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के जटिल समीकरणों को दर्शाती हैं।

भाजपा छत्तीसगढ़ ने सोशल मीडिया को अपने राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हथियार बनाया है । पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान भी इसी रणनीति का उपयोग किया था जो सफल साबित हुई । भाजपा लगातार कांग्रेस को निशाने पर लेने के लिए कार्टून और पोस्टर्स का इस्तेमाल कर रही है । सितंबर में भी भाजपा ने भूपेश बघेल पर बस्तर के विकास में विश्वासघात का आरोप लगाते हुए एक कार्टून जारी किया था ।

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया पर कार्टून युद्ध जारी है । इस रणनीति में पार्टियां विभिन्न विषयों पर एक-दूसरे पर आरोप लगाने के लिए हास्य और व्यंग्य का सहारा लेती हैं। यह प्रवृत्ति न केवल राजनीतिक बहस को तीखा बनाती है बल्कि जनमानस में भी राजनीतिक संदेशों को पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी साबित होती है ।

कांग्रेस ने भाजपा के कार्टून अभियान को निम्न स्तर की राजनीति बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है । पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा है कि यह भाजपा का चरित्र दिखाता है और वे जनहित के मुद्दों पर काम कर रहे हैं । कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा व्यक्तिगत हमलों के जरिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है ।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे कार्टून और सोशल मीडिया अभियान अक्सर राजनीति को और भी तीखा और विवादित बनाते हैं । इससे जनता के बीच असमंजस की स्थिति बनती है और राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि दोनों पार्टियों को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की बजाय विकास और जनता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए ।

यह कार्टून विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है और दिखाता है कि राज्य में राजनीतिक दल किस तरह से एक-दूसरे को घेरने के लिए नई रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं । आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक संघर्ष किस दिशा में जाता है।

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