छत्तीसगढ़ में फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी कार्यवाही की गई है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) ने 52 ऐसे फार्मेसी कॉलेजों की सीटों में कटौती कर दी है जो गुणवत्ता और मानकों के मामले में पूरी तरह से खरे नहीं उतर रहे हैं। ये कॉलेज न तो स्थायी प्राचार्य की व्यवस्था कर पाए हैं, न ही योग्य फैकल्टी और प्रयोगशाला की जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा पा रहे हैं। परिणामस्वरूप इन कॉलेजों का सीट इनटेक 50 प्रतिशत घटा दिया गया है, जिसका असर आगामी काउंसलिंग में देखने को मिलेगा।
प्रदेश में कुल 99 फार्मेसी कॉलेज हैं, जिनमें से केवल 38 कॉलेज ऐसे हैं जिन्होंने मानकों के करीब 70 से 75 प्रतिशत तक पालन किया है। इन कॉलेजों को ए केटेगरी में रखा गया है, लेकिन इन्हें भी सुधार के लिए चेतावनी मिली है। बाकी लगभग 52 कॉलेजों की स्थिति इतनी खराब है कि CSVTU ने उनकी सीटें आधी करने का निर्णय लिया है। इससे इस सत्र में फार्मेसी कॉलेजों की कुल सीटों में करीब 1700 सीटों की कटौती होगी।
इन कॉलेजों की स्थिति खराब होने के कई कारण हैं। सबसे बड़ी कमजोरी फैकल्टी की कमी और उनकी गुणवत्ता पर सवाल है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के नियमों के अनुसार फैकल्टियों की नियुक्ति करनी होती है, लेकिन कई कॉलेजों में यह मानक पूरी तरह से पूरा नहीं किया गया है। कई जगह प्राचार्य के पद पर वर्षों से नियुक्ति नहीं हुई है, जबकि शिक्षकों की स्थिति भी अस्थायी या दैनिक वेतनभोगी की तरह की गई है, जो PCI के नियमों के अनुरूप नहीं है।
प्रयोगशाला, भवन और कक्षाओं की मूलभूत सुविधाएं भी इन कॉलेजों में काफी हद तक कम हैं। CSVTU के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कहा गया है कि जो कॉलेज PCI और विश्वविद्यालय के निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर पा रहे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि छात्रों को उचित शिक्षा मिल सके।
इस वर्ष प्रदेश में सात नए फार्मेसी कॉलेज खोलने के प्रस्ताव थे, जिनमें से पांच को PCI से मान्यता मिल चुकी है, जबकि दो की मान्यता प्रक्रिया अभी लंबित है। इसके अलावा, दो कॉलेजों में ट्रस्ट विवादों के चलते मान्यता पर रोक लगा दी गई है। इन मामलों की जांच के लिए CSVTU ने विशेष कमेटी भी बनाई है।
फार्मेसी कॉलेजों की यह स्थिति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य पर भी प्रभाव डालती है। यदि कॉलेजों में योग्य फैकल्टी, प्राचार्य और प्रयोगशाला की व्यवस्था ठीक नहीं होगी, तो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए सीट घटाने जैसे कठोर निर्णय लिए गए हैं ताकि संस्थानों पर दबाव बने और वे अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करें।
CSVTU का यह भी कहना है कि अगली काउंसलिंग से पहले सभी कॉलेजों को निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए कड़ी समयावधि दी जाएगी। जो कॉलेज समय पर सुधार नहीं करेंगे, उनकी संबद्धता पर भी पुनर्विचार होगा। CSVTU का यह कदम प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे ऐसे कॉलेजों का चुनाव करें जो PCI की मान्यता और विश्वविद्यालय के मानकों पर खरे उतरते हों, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके। CSVTU की यह पहल फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस कठोर निर्णय से कॉलेजों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में फार्मेसी शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
इस प्रकार यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के फार्मेसी शिक्षा क्षेत्र की मजबूती और विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो शिक्षा के स्तर को बनाए रखने और सुधारने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित होगी।
(यह लेख छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में चल रहे परिवर्तनों और CSVTU की सख्त कार्रवाई पर आधारित है, जिसमें 52 फार्मेसी कॉलेजों के सीट कटौती, फैकल्टी एवं लैब सुविधाओं की कमी के मुद्दे प्रमुख हैं).