बिलासपुर रेलवे डिपो हादसा: वंदे भारत कोच पर काम करते समय हाई टेंशन तार से झुलसा ठेका कर्मी की मौत, सुरक्षा इंचार्ज पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में घटित हुई एक दुखद घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार 24 अगस्त को वंदे भारत ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच की सफाई के दौरान हाई टेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे ठेका कर्मी प्रताप बर्मन की सोमवार सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है।

हादसे की पूरी कहानी:

शनिवार दोपहर लगभग 1:00 बजे बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में एक भयावह हादसा हुआ। जांजगीर-चांपा निवासी 28 वर्षीय प्रताप बर्मन एक ठेका कंपनी के अंतर्गत रेलवे कोच की सफाई का कार्य करता था। हादसे के दिन वह अपने साथी कर्मचारियों के साथ वंदे भारत ट्रेन के एक्स्ट्रा कोच की धुलाई और वॉटर टेस्टिंग का काम कर रहा था।

घटना के समय बारिश शुरू हो गई थी। रेलवे अधिकारी मीणा ने कर्मचारियों को बताया था कि “जैमर लग गया है” और बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है। इसी भरोसे पर प्रताप को कोच के ऊपर वॉटर टैंक से पाइप निकालने का काम सौंपा गया। लेकिन वास्तविकता यह थी कि 133 केवी ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) लाइन में उस समय करंट प्रवाहित हो रहा था।

घातक संपर्क और तत्काल प्रभाव:

जैसे ही प्रताप ने कोच के ऊपर काम करना शुरू किया, उसका शरीर हाई वोल्टेज तार के संपर्क में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसे लगातार दो बार तेज करंट लगा। पहले तो वह तार से चिपक गया, फिर तड़पता रहा और अंततः नीचे गिर पड़ा। इस दौरान उसका शरीर बुरी तरह झुलस गया।

हादसे का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रताप को दर्द से तड़पते हुए देखा जा सकता है। यह दृश्य इतना दिल दहला देने वाला था कि मौजूद सभी कर्मचारी सदमे में आ गए।

चिकित्सा उपचार और संघर्ष:

  • तत्काल प्राथमिक उपचार: घायल प्रताप को पहले रेलवे अस्पताल ले जाया गया
  • रेफरल प्रक्रिया: आवश्यक सुविधाओं के अभाव में उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया
  • विशेषज्ञ उपचार: बेहतर इलाज के लिए परिजनों ने अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया
  • अंतिम परिणाम: डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार सुबह उसने दम तोड़ दिया

सुरक्षा लापरवाही के गंभीर आरोप:

इस हादसे में कई गंभीर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आया है:

  • गलत सूचना का मामला: OHE सप्लाई की गलत जानकारी देकर कर्मचारी को जानबूझकर खतरे में डाला गया
  • सुरक्षा उपकरण का अभाव: हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और इंसुलेटेड औजार उपलब्ध नहीं थे
  • प्रोटोकॉल का उल्लंघन: अर्थिंग और परमिट-टू-वर्क की आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
  • संचार की कमी: लाइन चालू या बंद होने की सही जानकारी ठेका कर्मियों को नहीं दी गई

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान:

कर्मचारी चरणदास ने बताया, “हम वॉटर टेस्टिंग और शिखा फ्लेक्स लगाने का काम करते हैं। मीणा सर के कहने पर प्रताप ऊपर चढ़ा। लेकिन तभी बारिश शुरू हो गई और हादसा हो गया।” उन्होंने यह भी कहा कि लाइन चालू या बंद है, इसकी जानकारी केवल रेलवे अधिकारी को होती है, लेकिन ठेका कर्मियों को बिना बताए ही काम पर भेज दिया गया।

प्रताप के साथी अरुण सोनवानी ने स्पष्ट किया कि सफाई के दौरान बिजली सप्लाई आमतौर पर बंद की जाती है। लेकिन हादसे के समय वंदे भारत ट्रेन आने के चलते 133KV हाईटेंशन लाइन चालू थी, जिसकी जानकारी ठेका कर्मचारियों को नहीं दी गई थी।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच:

इस गंभीर हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • FIR दर्ज: सुरक्षा इंचार्ज के खिलाफ लापरवाही के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है
  • जांच कमेटी: रेलवे प्रशासन ने एक विस्तृत जांच कमेटी का गठन किया है
  • सेफ्टी ऑडिट: घटना की पूरी जांच के लिए सेफ्टी डिपार्टमेंट को निर्देश दिए गए हैं

रेलवे के सीनियर DCM अनुराग सिंह ने कहा, “हादसे के बाद घायल के इलाज पर पूरा ध्यान दिया गया था। हादसा क्यों और कैसे हुआ, इसकी विस्तृत जांच के लिए सेफ्टी डिपार्टमेंट को निर्देशित किया गया है। जो भी जिम्मेदार होगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

व्यापक सुरक्षा चिंताएं:

यह घटना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियों को उजागर करती है:

  • ठेका कर्मियों की सुरक्षा: ठेका श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण और उपकरण का अभाव
  • संचार गैप: अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच महत्वपूर्ण सूचनाओं का सही आदान-प्रदान नहीं होना
  • प्रोटोकॉल का पालन: आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन नहीं किया जाना
  • जिम्मेदारी का अभाव: कार्यस्थल पर सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता का अभाव

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सामाजिक प्रभाव और मांगें:

इस दुखद घटना के बाद स्थानीय समुदाय और रेलवे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश है। कर्मचारी संघों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
  • ठेका कर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षण
  • मृतक के परिवार को उचित मुआवजा
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सख्त दिशा-निर्देश

निष्कर्ष:

प्रताप बर्मन की यह दुखद मृत्यु न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह पूरी रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी भी है। यह घटना दिखाती है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कितना आवश्यक है, विशेषकर जब ठेका कर्मियों की बात आती है। रेलवे प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

यह हादसा यह भी याद दिलाता है कि सुरक्षा कभी भी समझौते का विषय नहीं हो सकती और हर कर्मचारी, चाहे वह स्थायी हो या ठेका पर काम करने वाला, का जीवन समान रूप से महत्वपूर्ण है।

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