हथियार से हमला करने वाले 18 साल के युवक को मिली 10 साल की कड़ी सजा, जानें पूरा मामला

An Indian courtroom scene showing a judge's bench with the Indian national emblem, wooden furniture, and formal legal proceedings taking place. The scene depicts the sentencing of an 18-year-old defendant for a violent sharp weapon attack case, with lawyers, court officials, and the accused present in a traditional Indian judicial setting."

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक चौंकाने वाली खबर आई है, जहां महज 18 साल के एक युवक को धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के लिए 10 साल की कड़ी सजा मिली है। यह मामला दिखाता है कि कैसे एक सामान्य सामाजिक कार्यक्रम में हुई छोटी-सी बात खूनी संघर्ष में बदल गई।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना बालोद जिले के नाहंदा गांव की है, जहां 2 जुलाई 2023 की रात को एक नामकरण समारोह चल रहा था। नरसिंह मंडावी के घर में हो रहे इस खुशी के माहौल में कोई नहीं सोच सकता था कि रात 10:15 बजे तक स्थिति इतनी गंभीर हो जाएगी।

आरोपी दुर्गेश मंडावी, जो उस समय सिर्फ 18 वर्ष 7 महीने का था, घर के बाहर खड़े होकर रवि मंडावी को गाली-गलौज कर रहा था। जब ड्राइवर सुरेंद्र गंगराले ने विवाद का कारण पूछा, तो पता चला कि दुर्गेश ने रवि को फोन करके बाहर आने को कहा था, लेकिन रवि नहीं गया था। इसी बात को लेकर दुर्गेश गुस्से में था।

कैसे हुआ जानलेवा हमला?

सुरेंद्र ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की और अंदर चला गया। लेकिन कुछ समय बाद जब वह बाहर निकला, तो टेंगनाबरपारा के पुरानिक निषाद ने उसे बताया कि दुर्गेश ने धारदार औजार से रवि मंडावी पर हमला कर दिया है।

जब सुरेंद्र रवि के पास पहुंचा, तो वह खून से लथपथ था। रवि की पीठ और पेट पर गहरे घाव थे, और खून बह रहा था। हैरानी की बात यह थी कि इतनी गंभीर हालत में भी रवि ने दुर्गेश को पकड़ रखा था। लेकिन दुर्गेश ने जोर से झटका देकर अपने आप को छुड़ाया और भागने में सफल हो गया।

तत्काल इलाज और पुलिसी कार्रवाई

रवि की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत प्राइवेट गाड़ी से धमतरी के क्रिश्चियन अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के अगले दिन, 3 जुलाई 2023 को सुरेंद्र गंगराले ने गुरुर थाने में दुर्गेश मंडावी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए IPC की धारा 294 (अभद्र भाषा), 506(बी) (धमकी), 323 (सामान्य चोट) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत केस दर्ज किया। जांच के बाद 20 सितंबर 2023 को अदालत में चार्जशीट पेश की गई।

अदालत का फैसला

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बालोद किरण कुमार जांगड़े ने सभी सबूतों की जांच के बाद दुर्गेश मंडावी को IPC की धारा 307 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 10 साल की सश्रम कारावास और 1000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने इस केस की पैरवी की और अदालत के सामने सभी गवाहों और सबूतों को पेश किया। घटना के समय मौजूद पुरानिक निषाद, संतीष मंडावी, तरुण विश्वकर्मा और अन्य लोगों की गवाही भी अहम साबित हुई।

समाज के लिए संदेश

यह मामला दिखाता है कि कैसे छोटी-सी बात भी गंभीर परिणाम ला सकती है। महज 18 साल की उम्र में दुर्गेश को 10 साल की सजा मिलना इस बात का प्रमाण है कि न्यायपालिका हिंसक अपराधों को लेकर कितनी सख्त है।

इस घटना से यह सीख मिलती है कि गुस्से में लिए गए फैसले कैसे पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकते हैं। समाज में शांति बनाए रखने के लिए हमें विवादों को बातचीत से सुलझाना चाहिए, न कि हिंसा का रास्ता अपनाना चाहिए।

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