अनिल अंबानी के 3,000 करोड़ लोन फ्रॉड केस में ED की बड़ी कार्रवाई, पहली गिरफ्तारी

नई दिल्ली। अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के खिलाफ चल रहे 3000 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अहम गिरफ्तारी की है। एजेंसी ने पार्थ सारथी बिस्वाल नामक व्यक्ति को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है, जो बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड का मैनेजिंग डायरेक्टर है। इस गिरफ्तारी के साथ ही अनिल अंबानी के खिलाफ चल रही जांच में एक नया मोड़ आया है।

सूत्रों के अनुसार पार्थ सारथी बिस्वाल पर 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का आरोप है। यह फर्जी गारंटी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को दी गई थी और इसकी व्यवस्था रिलायंस पावर की ओर से की गई थी। एडी की जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल एक सोची समझी साजिश का हिस्सा था जिसका मकसद सरकारी संस्थानों को धोखा देना था।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक बिस्वाल ट्रेडलिंक कंपनी की स्थापना 2019 में हुई थी। इस कंपनी और इसके निदेशकों ने मिलकर सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को 68.2 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी सौंपी थी। जांच एजेंसी का कहना है कि यह गारंटी पूरी तरह से जाली थी और इसे तैयार करने में अत्याधुनिक तकनीकी धोखाधड़ी का सहारा लिया गया था।

एडी की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस फर्जी गारंटी को बनाने के लिए जालसाजों ने एक नकली डोमेन ‘s-bi.co.in’ का इस्तेमाल किया था। यह डोमेन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के असली डोमेन ‘sbi.co.in’ के बेहद करीब था। इस तरीके से उन्होंने फर्जी ईमेल पुष्टि भेजी और सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को भ्रम में डाला। यह साइबर अपराध का एक गंभीर मामला है जो दिखाता है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा सकती है।

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पता चला है कि बिस्वाल ट्रेडलिंक ने इस फर्जी गारंटी की व्यवस्था के एवज में रिलायंस पावर से 5.4 करोड़ रुपये की रकम हासिल की थी। यह पैसा कमीशन के रूप में लिया गया था। इससे भी गंभीर बात यह है कि यह कंपनी कम से कम सात अघोषित बैंक खाते चला रही थी जिनकी जानकारी किसी को नहीं थी। इन खातों के जरिए काले धन की आवाजाही की जा रही थी।

एडी की जांच में बिस्वाल ट्रेडलिंक कंपनी की कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पहली बात यह है कि कंपनी कानून के अनुसार अनिवार्य रिकॉर्ड नहीं रख रही थी। दूसरी समस्या यह थी कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए डमी डायरेक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। तीसरी बात यह कि कंपनी अपने घोषित टर्नओवर के अनुपात में बेहद असंगत लेन-देन कर रही थी जो स्पष्ट रूप से संदेहजनक था।

पार्थ सारथी बिस्वाल को शुक्रवार को गिरफ्तार करने के बाद एक विशेष न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने एडी के आवेदन पर बुधवार तक उसे एजेंसी की हिरासत में रखने का आदेश दिया है। इस दौरान एडी उससे विस्तृत पूछताछ करेगी और इस मामले की अन्य कड़ियों का पता लगाने की कोशिश करेगी।

यह गिरफ्तारी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने के ठीक एक दिन बाद हुई है। एडी ने अनिल अंबानी के नाम पर लुकआउट सर्कुलर जारी किया है जिससे वे देश छोड़कर नहीं जा सकते। इसके अलावा अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में एडी के दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

इस पूरे मामले की जड़ 2017 से 2019 के बीच के उस दौर में है जब यस बैंक ने रिलायंस ग्रुप की विभिन्न कंपनियों को करीब 3000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। एडी का आरोप है कि इस कर्ज की रकम को गलत तरीकों से इस्तेमाल किया गया और वास्तविक उद्देश्यों के लिए खर्च नहीं किया गया। जांच में पता चला है कि कर्ज मंजूर होने से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटरों को भी कुछ भुगतान किए गए थे जो स्पष्ट रूप से एक क्विड प्रो क्वो यानी एहसान के बदले एहसान की व्यवस्था का संकेत देता है।

एडी ने 24 जुलाई को इस मामले से जुड़ी 50 से अधिक कंपनियों और फर्मों पर व्यापक छापेमारी की थी। यह छापेमारी तीन दिनों तक चली और इसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत मिले। इस ऑपरेशन को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अंजाम दिया गया था।

छापेमारी के बाद रिलायंस पावर ने स्टॉक एक्सचेंजों को एक सफाई भेजी थी। कंपनी का कहना था कि मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स रिलायंस कम्युनिकेशन्स लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के 10 साल से भी अधिक पुराने लेन-देन से संबंधित हैं। कंपनी ने इशारा किया कि ये मामले बहुत पुराने हैं और वर्तमान कारोबार से इनका कोई लेना देना नहीं है।

हालांकि एडी इस सफाई से संतुष्ट नहीं दिख रही है और एजेंसी का मानना है कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है जिसमें व्यवस्थित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि यह एक बड़ा नेटवर्क है जिसमें कई लोग शामिल हैं।

यह मामला भारतीय बैंकिंग सिस्टम में बढ़ रही धोखाधड़ी की समस्या को भी उजागर करता है। यस बैंक का मामला पहले भी चर्चा में रहा है और अब एक बार फिर यह सामने आया है कि कैसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों और बैंकों के बीच अनुचित तालमेल से आम जनता का नुकसान होता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार को इस तरह के मामलों की रोकथाम के लिए और सख्त नियम बनाने होंगे।

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