बस्तर (छत्तीसगढ़), 15 जुलाई 2025 | AlertNationNews
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों की लगातार और आक्रामक कार्रवाई के चलते नक्सलियों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से चल रही सघन अभियान प्रक्रिया ने माओवादियों को बैकफुट पर ला दिया है, जिससे वे अब सीधी मुठभेड़ों से बचते हुए छिपकर हमले करने की रणनीति अपना रहे हैं।
ऑपरेशन तेज, दबाव में नक्सली
CRPF, DRG, STF और कोबरा बटालियन की संयुक्त कार्रवाइयों के चलते सुरक्षाबलों को माओवादियों के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं। कई बड़े कमांडर मारे गए हैं, भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है और जंगलों के भीतर नए पुलिस कैंप स्थापित किए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, माओवादी अब दक्षिण बस्तर से पलायन कर झारखंड और ओडिशा सीमा की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि अभियान ने उन्हें अपने पारंपरिक इलाकों से हटा दिया है।
बदली हुई रणनीति: छोटे दल, घातक वार
नक्सली अब बड़े समूहों की जगह छोटे-छोटे दस्तों में बंटकर घात लगाकर हमले करने, IED ब्लास्ट और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की निगरानी जैसी रणनीतियां अपना रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थानीय सहयोगियों के ज़रिए खुफिया जानकारी जुटाने और जनसमर्थन बढ़ाने की कोशिशें भी तेज़ की गई हैं।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने AlertNationNews से बात करते हुए बताया कि:
“हमारी रणनीति माओवादियों के ठिकानों तक पहुंच चुकी है। उनकी गतिविधियों में गिरावट आई है और आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ी हैं। अब वे खुलेआम चुनौती देने की स्थिति में नहीं हैं।”
जनसहयोग बना बड़ा हथियार
बस्तर के कई क्षेत्रों में आम जनता अब माओवादियों के खिलाफ मुखर हो रही है। सुरक्षाबलों के साथ ग्रामीणों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में नक्सली अब पैर जमाने में असफल हो रहे हैं।