बिलासपुर, छत्तीसगढ़:
हरेली पर्व के उत्साह भरे माहौल में 25 जुलाई 2025 की शाम एक दर्दनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया। सीपत थाना क्षेत्र के झलमला–खम्हरिया मार्ग पर स्थित तुंगन नाले के उफान में बहते पानी ने अचानक वाहन को अपने बहाव में उठा लिया। इस हादसे में एक पूरा परिवार बच निकला, लेकिन तीन साल के मासूम तेजस का कोई सुराग नहीं मिला है।
घटना की शुरुआत तब हुई, जब मोहनलाल साहू उर्फ भोला (29) अपने परिवार के आठ अन्य सदस्यों के साथ शिव शक्ति पीठ मंदिर में हरेली पर्व की पूजा-अर्चना करके लौट रहा था। शाम करीब साढ़े छह बजे, सीपत-झलमला मार्ग पर जलस्तर अचानक बढ़ गया और वैगन आर कार पुल पार करते ही नियंत्रण खो बैठी। पानी की तेज धारा ने कार को घुमाकर नाले के बीचोबीच ले जाया, जहां वाहन पानी के तेज बहाव में बह गया।
स्थानीय ग्रामीणों की त्वरित सूचना पर पुलिस, स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) की टीम घटनास्थल पर पहुंची। इलाके में फैली घनी अंधेरी छाया और तेज बहाव ने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया। करीब एक घंटे तक चलती मशक्कत के बाद, कार में सवार चार वयस्क और चार बच्चे किसी तरह तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे। इन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उन्हें हाइपोथर्मिया और हल्की चोटों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
लेकिन इसी बीच कार के साथ बहता बच्चा तेजस कहीं खो गया। बचावकर्ता उसे ढूंढते–ढूंढते नदी के करीब आठ सौ मीटर तक जा पहुँचे, पर रात के अंधेरे और पानी के तेज बहाव में वह मिल नहीं सका। परिवार के सदस्य रोते–बिलखते एक दूसरे का हाथ थामे खड़े रहे, जबकि अन्य ग्रामीण और पड़ोसी भी बच्चों की गुमशुदगी की सूचना सुनकर घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए।
बचाव अभियान का विस्तार सुबह होते ही किया गया। SDRF की दो दोस्ती नौकाएं, गोताखोर दल और स्थानीय फायर ब्रिगेड की टीम नाले में गहराई तक खोजबीन कर रही है। प्रशासन ने आसपास के सभी एनीकट, पुल, और नदी तटों पर निगरानी बढ़ा दी है, ताकि तेजस कहीं और बहकर न पहुंच गया हो। वहीं पुलिस ने घटना की जांच शुरू करते हुए बताया कि नाले की तरफ जाने का मार्ग ट्रैफिक पुलिस की ओर से अस्थायी रूप से बंद नहीं रखा गया था, जो दुर्घटना का एक कारण माना जा रहा है।
वहीं स्थानीय प्रशासन ने सभी नाले-नदी क्रॉसिंग पर अतिरिक्त चेतावनी बोर्ड लगवाए हैं और क्षेत्रीय वाशिंदों से अपील की है कि भारी वर्षा के समय इन मार्गों का उपयोग करने से बचें। एसडीआरएफ के एक अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, “हम पूरी ताकत लगा रहे हैं, लेकिन पानी का बहाव कम नहीं हो रहा। हम तब तक खोज जारी रखेंगे, जब तक कोई सुराग नहीं मिलता।”
घटना ने पूरे झलमला-खम्हरिया क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। तेजस के माता-पिता और परिवारजन अस्पताल परिसर में निराशा और बेचैनी की स्थिति में हैं। स्थानीय सरपंच राजीव पटेल ने बताया, “पूरे गांव में मातम का माहौल है। हम सब प्रार्थना कर रहे हैं कि बच्चा सुरक्षित मिले।”
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भी मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन ने जिलेभर में हाईअलर्ट जारी कर दिया है। सभी प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, एनजीओ और स्वयंसेवी संस्थाएं राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहायता केंद्र खोले गए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि मानसून में कमजोर पुलों, उफनते नालों और अपर्याप्त यातायात नियंत्रण के कारण ऐसे हादसे पुनः हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि स्थायी संरचनात्मक सुधार, सतत जल प्रबंधन, नदी घाटों पर विज्ञापन पैनल और स्थानीय लोगों को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण दिया जाए।
फिलहाल, प्रशासन और पुलिस को सबसे बड़ी चुनौती तेजस की खोज है। परिवार और पूरा शहर एकजुट होकर आशा की किरण खोज रहा है कि यह बच्चा सुरक्षित मिलेगा। इस हादसे ने हमें याद दिलाया है कि प्रकृति की क्षमता को हल्के में नहीं लेना चाहिए और आपदा प्रबंधन को सतर्कता से लागू करना कितना आवश्यक है। जल्दबाजी में पुल पार करते समय सावधानी और स्थानीय प्रशासन की चेतावनाओं का पालन ही ऐसी त्रासदियों से बचाव का एकमात्र मार्ग है।