रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य के प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाई जा रही फीस पर अब कानूनी लगाम लग गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों की फीस के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के फीस नियंत्रण अधिकार को वैध ठहराया है।
न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल और न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने छत्तीसगढ़ गैर-सरकारी स्कूल फीस विनियमन अधिनियम 2020 को पूर्णतः संवैधानिक माना है। इस फैसले के साथ ही निजी स्कूल एसोसिएशन द्वारा दायर की गई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार निजी स्कूलों की फीस निर्धारित करने का पूर्ण अधिकार रखती है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि निजی स्कूलों की स्वायत्तता बनी रहेगी, लेकिन फीस के नाम पर होने वाली मनमानी वसूली पर सख्त नियंत्रण आवश्यक है।
इससे पूर्व छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन और बिलासपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए तर्क दिया था कि राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। उनका मानना था कि इस प्रकार का हस्तक्षेप असंवैधानिक है और निजी शिक्षण संस्थानों के अधिकारों का हनन करता है।
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद अब छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूल बिना राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के आठ प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा और सभी निजी शिक्षण संस्थानों को इसका कड़ाई से पालन करना होगा।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के अनुसार, अब निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। साथ ही स्कूल प्रबंधन को अपनी फीस संरचना के साथ-साथ सभी प्रकार के खर्चों की विस्तृत जानकारी सरकार को प्रदान करनी होगी।
इस नई व्यवस्था के अंतर्गत फीस समिति को दीवानी न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त होंगे। अभिभावकों की आपत्तियों पर सुनवाई अनिवार्य होगी और जिला स्तर पर कलेक्टर तथा राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह रेगुलेटरी फ्रेमवर्क प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है। इससे फीस निर्धारण में पारदर्शिता आएगी और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर सरकार सक्रिय हो गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि सरकार निजी विद्यालयों में फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में एक व्यापक विधेयक पेश करेगी।
दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के अनुसार हर स्कूल में फीस रेगुलेशन कमिटी का गठन किया जाएगा, जिसमें अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रति छात्र पचास हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
दिल्ली सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार फीस बढ़ोतरी केवल तीन साल में एक बार ही संभव होगी। यह नियम प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने और फीस वृद्धि में नियंत्रण लाने के लिए बनाया गया है।
छत्तीसगढ़ और दिल्ली सरकार के इन फैसलों से देश भर के अभिभावकों में खुशी की लहर है। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती महंगाई और प्राइवेट स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस से परेशान अभिभावकों को अब राहत मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही और संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब प्राइवेट स्कूल अपनी फीस संरचना में पारदर्शिता बनाए रखने और अभिभावकों के साथ न्यायसंगत व्यवहार करने के लिए बाध्य होंगे।
यह फैसला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है, जहां प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती फीस अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।