Chhattisgarh के Baloda Bazar जिले से पुलिस बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मध्य प्रदेश के Bhopal में हाल ही में हुई इंजीनियर उदित गायकी की मौत की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं. यहां कोतवाली पुलिस पर गश्त के दौरान एक आदिवासी युवक हितेश्वर भट्ट को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. पीड़ित की कमर में कांच का टुकड़ा घुसने से उसे 14 टांके लगे हैं. इस घटना ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इसने राजनीतिक रूप भी ले लिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए थाने के बाहर प्रदर्शन किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
पीड़ित युवक हितेश्वर भट्ट, जो एक स्कूल में प्यून के पद पर कार्यरत है, ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि रविवार की रात करीब 9 बजे वह रिसदा रोड पर एक दुकान के पास खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था. उसी समय कोतवाली थाना प्रभारी अजय झा अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे. पुलिस को देखकर वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई. हितेश्वर के अनुसार, इसी दौरान थाना प्रभारी झा ने उसे पीछे से जोर से लात मारी, जिससे वह गिर गया. उसके पैंट की पिछली जेब में रखी शराब की बोतल टूट गई और कांच का एक बड़ा टुकड़ा उसकी कमर के निचले हिस्से में घुस गया, जिससे वह लहूलुहान हो गया. बाद में उसके दोस्तों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसके घाव पर 14 टांके लगाए. जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा ने पुष्टि की है कि युवक की कमर में गहरी चोट आई थी, लेकिन इलाज के बाद अब उसकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर है.
इस मामले पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने पुलिस का पक्ष रखते हुए आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने बताया कि जिले में नशे के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत कोतवाली पुलिस रिसदा रोड पर जांच कर रही थी, जहां कुछ लोग शराब पी रहे थे. पुलिस को देखकर वे लोग भागने लगे. पुलिस ने जब उनका पीछा किया तो हितेश्वर भट्ट भागने के दौरान गिर गया, जिससे उसकी जेब में रखी बोतल टूट गई और उसे चोट लग गई. अधिकारी ने यह भी कहा कि पुलिस ने ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पीड़ित की ओर से लिखित शिकायत मिलने पर मामले की पूरी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुलिस ने घायल युवक का इलाज कराने के बजाय कथित तौर पर उसी के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 36(सी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. इस कार्रवाई ने मामले को और भी तूल दे दिया है. पीड़ित की मां रानी भट्ट ने पुलिस पर बिना किसी वजह के मारपीट करने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है.
यह घटना अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है. जिला युवक कांग्रेस के अध्यक्ष शैलेन्द्र बंजारे के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “पुलिसिया अत्याचार” और “दबंगई” करार देते हुए थाने के बाहर महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ शांतिपूर्ण धरना दिया. उन्होंने थाना प्रभारी अजय झा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम है और निर्दोष आदिवासियों पर अपना गुस्सा निकाल रही है. वहीं, पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पुलिस द्वारा घायल युवक पर ही FIR दर्ज करने की कड़ी निंदा की और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है. इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है.