चीन के चांगझोउ शहर में चल रहे प्रतिष्ठित चाइना ओपन बैडमिंटन 2025 में भारत ने शानदार शुरुआत करते हुए खेल प्रेमियों को नई उम्मीद दी है। पीवी सिंधु और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी की जोड़ी ने अपने-अपने मैचों में आसान जीत दर्ज कर कोर्ट पर भारत का परचम फहराया है। यह सफलता न सिर्फ ओलंपिक से पहले अहम मानी जा रही है, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देती है।
पीवी सिंधु का शानदार कमबैक
पीवी सिंधु ने जापान की टोमोका मियाजाकी को 21-18, 21-12 के स्कोर से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। सिंधु ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक और रणनीतिक खेल दिखाया। उनकी तेज हरकतें, सटीक स्मैश और धैर्यपूर्ण रणनीति ने मियाजाकी को कभी भी मैच में बराबरी का मौका नहीं दिया। पहले गेम में जहां सिंधु ने अहम पलों पर कंट्रोल रखा, वहीं दूसरे गेम में उन्होंने और ज्यादा प्रभावी प्रदर्शन किया।
ओलंपिकचैंपियन बनने का सपना देख रही सिंधु के लिए यह जीत काफी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से चोट और फॉर्म को लेकर चिंताएं रही थीं, लेकिन चाइना ओपन में उनका शत-प्रतिशत एनर्जी के साथ उतरना टीम और देशवासियों के लिए बड़ी राहत है। सिंधु की इस जीत ने यह साबित किया है कि वे किसी भी बड़े टूर्नामेंट से पहले खुद को पूरी तरह तैयार कर रही हैं।
सात्विक-चिराग की जोड़ी ने दिखाया वर्चस्व
पुरुष डबल्स में भारत की सबसे चर्चित जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पहले राउंड में अपने प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती नहीं दी। सात्विक-चिराग ने मैच के शुरू से ही तालमेल और रणनीति की बुलंदी पर जोर दिया। उनकी पावर प्ले और शॉर्ट गेम के सामने विपक्षी जोड़ी कभी भी रिएक्ट नहीं कर सकी। इस मैच में भारतीय जोड़ी ने न केवल गति, बल्कि सटीकता का भी बेहतरीन मिश्रण दिखाया।
सात्विक-चिराग की जोड़ी अभी विश्व रैंकिंग की शीर्ष 5 में हैं और उनकी इस फॉर्म के चलते भारत को पेरिस ओलंपिक में मेडल की बड़ी उम्मीद है। उनका खेल दिखाता है कि भारतीय डबल्स बैडमिंटन में पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गहराई और प्रतिस्पर्धात्मकता आई है। इस जीत के बाद कोचिंग स्टाफ और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल ऊंचा हुआ है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि चाइना ओपन 2025 में भारतीय खिलाड़ियों की शुरुआती सफलता काफी हद तक उनकी ओलंपिक तैयारी की दिशा में अहम है। इस तरह के सुपर 1000 स्तर के टूर्नामेंट में जीत से खिलाड़ियों को आत्मविश्वास मिलता है और उनकी फॉर्म का आकलन भी बेहतर होता है। स्पोर्ट्स एनालिस्ट्स का कहना है कि पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग दोनों की ही पिछले कुछ महीनों में गंभीरता से की गई फिटनेस और ट्रेनिंग साफ झलक रही है।
ओलंपिक से पहले इन जीतों का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह खिलाड़ियों की मानसिक ताकत, रणनीतिक सोच और टीम वर्क की बेहतरीन झलक है। इनके अच्छे प्रदर्शन से न सिर्फ भारतीय फैंस को बल्कि अंतरराष्ट्रीय सर्कल में भी भारतीय बैडमिंटन की छवि मजबूत हुई है।
भविष्य के लिए संकेत
चाइना ओपन 2025 में हुई भारतीय खिलाड़ियों की शुरुआती जीत ने देश को एक बार फिर सिग्नल दिया है कि भारत बैडमिंटन के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित हो रहा है। पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग ने अपनी गति और ताकत के साथ यह साबित किया है कि वे किसी भी टूर्नामेंट में मेडल की मजबूत दावेदार हैं।
आगे के मुकाबलों में दोनों खिलाड़ियों से बड़े कारनामों की उम्मीद है। विशेष रूप से सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी से पूरे टूर्नामेंट में अपने कदम मजबूत करने की उम्मीद है। यदि ऐसा हुआ तो यह टूर्नामेंट भारतीय बैडमिंटन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा।
चाइना ओपन 2025 के पहले राउंड में पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग की जोड़ी ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। चाइना ओपन जैसे बड़े टूर्नामेंट में इन जीतों का असर सिर्फ रैंकिंग पर ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के मनोबल और आत्मविश्वास पर भी पड़ेगा। पेरिस ओलंपिक की ओर बढ़ रहे भारत के लिए यह शुरुआती सफलता नई उम्मीदें लेकर आई है। बैडमिंटन प्रेमियों के लिए अब बस यही आस है कि यह जीत का सिलसिला आगे भी जारी रहे और टीम इंडिया कोचिंग स्टाफ, दर्शकों और भारत सरकार का विश्वास कायम रख सके।