रायपुर में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में हुई संभावित गड़बड़ियों की गहन जांच शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का यह कदम राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रव्यापी ‘वोट चोरी’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश की चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि 2023 के विधानसभा चुनावों में मिले अप्रत्याशित परिणामों के बाद मतदाता सूची में व्यापक अनियमितताओं की आशंका बढ़ी है। इसी आशंका को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी जिला, शहर, नगर और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को विस्तृत निर्देश भेजे हैं, जिसमें स्थानीय स्तर पर मतदाता सूचियों का पुनर्निरीक्षण करने को कहा गया है।
कांग्रेस का यह अभियान पांच मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है जो चुनावी धोखाधड़ी की पहचान करने में सहायक हो सकते हैं। पहला बिंदु डुप्लिकेट मतदाताओं की जांच है, जहां एक ही व्यक्ति का नाम कई अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज हो सकता है। पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने पहले भी भाजपा विधायकों राजेश मूणत और संपत अग्रवाल पर दो अलग-अलग विधानसभाओं से नाम होने के गंभीर आरोप लगाए थे और प्रमाणित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे।
दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु फर्जी और अमान्य पतों की जांच है। इसमें उन पतों को शामिल किया जाएगा जहां वास्तव में कोई निवास नहीं करता लेकिन मतदाता सूची में नाम दर्ज है। यह समस्या विशेषकर शहरी क्षेत्रों में अधिक देखी जा रही है जहां कई बार ‘हाउस नंबर 0’ जैसी अनियमित प्रविष्टियां मिलती हैं।
तीसरा बिंदु एक ही पते पर असामान्य रूप से अधिक संख्या में मतदाताओं का पंजीकरण है। कांग्रेस के अनुसार कई स्थानों पर छोटे फ्लैट या कमरों में सैकड़ों मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं, जो संदिग्ध है। चौथा बिंदु गलत या अस्पष्ट फोटो वाले मतदाताओं की पहचान है, जहां फोटो में व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
पांचवां और अंतिम बिंदु फॉर्म-6 के गलत उपयोग की जांच है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के लिए निर्धारित है, लेकिन कई बार वृद्ध व्यक्तियों द्वारा भी इसका उपयोग किया जाता है जो नियमों के विरुद्ध है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में भी चुनाव परिणाम अप्रत्याशित रहे हैं और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की प्रबल आशंका है। उन्होंने बताया कि पार्टी सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान चला रही है और जल्द ही चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेगी।
इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि विपक्षी दल को हार स्वीकारने में दिक्कत हो रही है। मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि पहले कांग्रेस ईवीएम पर सवाल उठाती थी, अब मतदाता सूची को लेकर शंका जता रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को निरीक्षण कराने से कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि जनता ने कांग्रेस को पहले ही किनारे कर दिया है।
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पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने दावा किया है कि वे इसी हेराफेरी के कारण चुनाव हारे हैं और वर्तमान में अपने समर्थकों के साथ अपने क्षेत्र में वोटर लिस्ट की विस्तृत जांच कर रहे हैं। पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने भी समान आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जीत का भरोसा था, लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी का झूठा माहौल बनाकर चुनावी खेल किया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों को डिजिटल वोटर लिस्ट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और सीसीटीवी तथा वीडियो सबूत को व्यवस्थित रूप से मिटाया जा रहा है। इन गंभीर आरोपों के समर्थन में सोशल मीडिया पर कांग्रेस कार्यकर्ता ‘मैं भी वोट चोरी के खिलाफ हूं’ हैशटैग के साथ व्यापक अभियान चला रहे हैं और राहुल गांधी की डिजिटल वोटर लिस्ट की मांग का समर्थन कर रहे हैं।
यह जांच अभियान केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों में समान चुनौतियों की पहचान की है। कर्नाटक में महादेवपुरा विधानसभा सीट का विस्तृत विश्लेषण करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि वहां एक लाख से अधिक नकली वोट थे।
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कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद पार्टी एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन शुरू करेगी। इस आंदोलन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की अखंडता को बनाए रखना है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पाई जाने वाली गड़बड़ियों को सार्वजनिक करेगी और दोषी व्यक्तियों तथा संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करेगी।
यह मामला भारतीय लोकतंत्र की मूलभूत संरचना से जुड़ा हुआ है और इसका प्रभाव केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा। चुनावी सुधार और मतदाता सूची की पवित्रता का यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।