छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विवाद: भाजपा-कांग्रेस के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग, सरकार पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर से गर्म बहस का केंद्र बन गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी नोकझोंक जारी है। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद कार्टून पोस्टर के जरिए कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए उसे ‘धर्मांतरण स्पेशलिस्ट’ का तगमा दिया है। इसके जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मौजूदा भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कड़े सवाल दागे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में धर्मांतरण की गतिविधियां चिंताजनक रूप से बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के प्रवक्ताओं के अनुसार बस्तर और सरगुजा संभाग के साथ-साथ रायधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कवर्धा और अन्य प्रमुख जिलों में भी यह समस्या गंभीर रूप धारण कर रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि इन गतिविधियों से प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच रहा है और धार्मिक सौहार्द्र में बाधा आ रही है।

पार्टी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस का धर्मांतरण से पुराना रिश्ता है। उनका आरोप है कि चाहे कांग्रेस सत्ता में हो या विपक्ष में बैठी हो, यह पार्टी हमेशा से धर्मांतरण की गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देने का काम करती आई है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी रोकथाम के लिए कभी भी कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाती।

हालांकि इन गंभीर आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अगर सच में धर्मांतरण के आंकड़े निकालने हैं तो पहले डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल और बाद में कांग्रेस सरकार के समय के डेटा की निष्पक्ष तुलना होनी चाहिए। बघेल का सवाल है कि जब से भाजपा की डबल इंजन सरकार छत्तीसगढ़ में सत्ता संभाली है, तब से अब तक कई महीने बीत चुके हैं। यदि वास्तव में धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार पर आती है।

कांग्रेस नेता का यह भी कहना है कि भाजपा सरकार के पास प्रशासनिक मशीनरी, पुलिस व्यवस्था और तमाम संसाधन मौजूद हैं। ऐसे में अगर वह चाहती है तो इस समस्या को रोकने के लिए तुरंत प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। लेकिन सवाल यह है कि भाजपा सरकार इस दिशा में कोई ठोस और दीर्घकालीन कदम क्यों नहीं उठा रही है।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धर्मांतरण को लेकर स्थिति काफी गरमाई हुई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता राज्य के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं और ईसाई समुदाय की धार्मिक सभाओं और प्रार्थना गतिविधियों को संदेह की नजर से देख रहे हैं। इन संगठनों के सदस्य ऐसी सभाओं को जबरन धर्मांतरण की गतिविधि बताकर स्थानीय पुलिस स्टेशनों में एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं।

पुलिस प्रशासन भी इन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए ईसाई समुदाय के लोगों को गिरफ्तार कर रही है। कई मामलों में बिना विस्तृत जांच के ही गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जिससे समुदाय में चिंता और डर का माहौल फैल रहा है। बिलासपुर जिले में हाल ही में एक घटना में जिस मकान में धार्मिक प्रार्थना सभा का आयोजन हो रहा था, उसे प्रशासन ने अवैध घोषित करते हुए बुलडोजर से ढहा दिया था। इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है।

धर्मांतरण के इस पूरे मुद्दे में राज्य के आदिवासी और दलित समुदायों की स्थिति सबसे संवेदनशील है। इन समुदायों में ईसाई धर्म अपनाने की परंपरा पुरानी है और यह मुख्यतः सामाजिक न्याय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में होता आया है। हालांकि राजनीतिक दल इसे अलग-अलग नजरिए से देखते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि धर्मांतरण का मुद्दा संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रत्येक व्यक्ति को अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन साथ ही जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना गैरकानूनी है।

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छत्तीसगढ़ सरकार के पास अब यह चुनौती है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द्र के बीच संतुलन कैसे बनाए। एक तरफ जहां संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है, वहीं दूसरी तरफ जबरन धर्मांतरण की रोकथाम भी जरूरी है। इस संदर्भ में सरकार को पारदर्शी और निष्पक्ष नीति अपनानी होगी।

वर्तमान राजनीतिक माहौल में यह विवाद और भी गहरा होने की संभावना है। अगले विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों पार्टियां इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि जरूरत है कि राजनीतिक दल अपने निजी फायदे से ऊपर उठकर प्रदेश की शांति और सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने की दिशा में काम करें। छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में धार्मिक सौहार्द्र बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

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