कोरबा, छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका इलाके में एक अद्भुत घटना ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां धनंजय सिंह के घर में पली एक 4 साल की गाय बिना बछड़ा दिए ही प्रतिदिन 5 लीटर दूध दे रही है, जिसे देखकर लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं।
प्राकृतिक नियम के अनुसार गाय केवल बछड़े को जन्म देने के बाद ही दूध देती है, लेकिन इस दुर्लभ घटना ने वैज्ञानिक समुदाय और धर्म में आस्था रखने वाले लोगों दोनों को हैरान कर दिया है। पाली रोड दीपका निवासी कोल व्यापारी धनंजय सिंह ने बताया कि करीब एक महीने पहले गाय की जगह की सफाई करते समय उन्हें दूध गिरा हुआ दिखा।
धनंजय सिंह ने विस्तार से बताते हुए कहा, “जब जांच की गई तो पता चला कि गाय बिना बछड़ा दिए दूध दे रही है। तब से रोजाना दूध निकल रहा है। गाय रोजाना 2 बार 2.5 से 3 लीटर दूध देती है”।
इस अनोखी गाय की खासियतें निम्नलिखित हैं:
- दैनिक दूध उत्पादन: गाय प्रतिदिन सुबह-शाम मिलाकर कुल 5 लीटर दूध दे रही है
- गाय की उम्र: यह गाय वर्तमान में 4 साल की है और 2022 में खरीदी गई थी
- दूध की गुणवत्ता: स्थानीय लोगों के अनुसार दूध की गुणवत्ता बेहतरीन है
- धार्मिक उपयोग: प्रतिदिन एक लोटा दूध भगवान को अर्पित किया जाता है
धार्मिक महत्व और लोगों की आस्था
इस घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से लोग दर्शन के लिए आने लगे हैं। स्थानीय लोग इस गाय को ‘कामधेनु’ का स्वरूप मानकर पूजा-पाठ कर रहे हैं और आरती उतार रहे हैं। हिंदू धर्म में कामधेनु को देवी का स्वरूप माना जाता है, जो सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गाय है।
पड़ोसी आवंकित सिंह ने बताया, “यह गाय 2022 में खरीदी गई थी। उस समय इसे एक बछिया हुई थी। अभी गाय 3 साल की है। पिछले एक महीने से अचानक दूध देना शुरू कर दिया है। यह दूध हर पूजा में उपयोग किया जा रहा है”।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सकों की राय
पशु चिकित्सकों का इस घटना को लेकर स्पष्ट मत है। कोरबा के पशु चिकित्सक डॉ. एच के सोनी का कहना है कि यह स्थिति किसी हॉर्मोनल बदलाव के कारण हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- कभी-कभी हार्मोनल बदलाव या शारीरिक कारणों से गायों में बिना गर्भधारण किए दूध आ सकता है
- यह घटना बेहद असामान्य और दुर्लभ है
- ऐसे मामले पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए भी अध्ययन का विषय हैं
पर्यटन और सामाजिक प्रभाव
बिना बछड़ा दिए दूध देने वाली इस गाय को देखने के लिए अब दूर-दराज के लोग भी दीपका इलाके पहुंच रहे हैं। यह घटना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन गई है, बल्कि स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है।
आसपास के लोग भी इस गाय का दूध लेने के लिए आ रहे हैं, और धनंजय सिंह का घर अब केवल एक पशुपालन स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आस्था और कौतूहल का मिलन स्थल बन गया है।
समान घटनाओं के उदाहरण
यह कोई पहला मामला नहीं है जहां गाय बिना बछड़ा दिए दूध दे रही हो। इससे पहले भी भारत के विभिन्न हिस्सों में ऐसी घटनाएं देखी गई हैं, जो वैज्ञानिक समुदाय के लिए अनुसंधान का विषय रही हैं।
फिलहाल वैज्ञानिक कारणों से परे, गांव के लोग इसे ईश्वर का आशीर्वाद मान रहे हैं और इस दुर्लभ घटना को प्रकृति के चमत्कार के रूप में देख रहे हैं।