बीजापुर, 30 जुलाई 2025 – छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 22वीं बटालियन के एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है।
घटना का विवरण
मृतक की पहचान पप्पू यादव के रूप में हुई है, जो बिहार के भोजपुर जिले के चाल पोखरी थाना क्षेत्र के ठाकुरी गांव का निवासी था। वह नैमेड थाना क्षेत्र के मिंगाचल कैंप में CRPF की 22वीं बटालियन में एक कांस्टेबल के रूप में तैनात था।
घटना बुधवार सुबह करीब 5 बजे हुई, जब यादव ने अपनी सरकारी इंसास राइफल का उपयोग करते हुए खुद पर गोली चलाई। पुलिस के अनुसार, गोली गले से होते हुए सिर को चीरते हुए निकल गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
छुट्टी से लौटे थे एक दिन पहले
विशेष बात यह है कि पप्पू यादव 29 जुलाई को ही छुट्टी से वापस लौटे थे और अगले ही दिन इस दुखद घटना को अंजाम दिया। वह अपने घर बिहार गए हुए थे और हाल ही में ड्यूटी पर वापस आए थे।
घटना की सूचना मिलने पर तुरंत साथी जवान और अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक यादव का निधन हो चुका था। कैंप में यह घटना हड़कंप मचा गई है।
पुलिस जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। जिला एसपी जितेंद्र यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जवान ने अपने सरकारी हथियार का इस्तेमाल किया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जिसके बाद उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।
सुरक्षा बलों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति
यह घटना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आत्महत्याओं की बढ़ती समस्या को एक बार फिर उजागर करती है। आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2019 से जून 2025 के बीच 177 सुरक्षा कर्मियों की आत्महत्या से मौत हो चुकी है, जिनमें 26 सीआरपीएफ के जवान भी शामिल हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बल अक्सर अत्यधिक तनाव और दबाव का सामना करते हैं। लंबी तैनाती, पारिवारिक दूरी, छुट्टी की कमी, और लगातार सुरक्षा खतरों के बीच काम करने का दबाव इन घटनाओं के पीछे प्रमुख कारक माने जाते हैं।
प्रशासन की चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा बलों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के मुद्दे को सामने लाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों से संवादहीनता और तनावपूर्ण कार्य वातावरण भी इन दुखद घटनाओं में भूमिका निभाते हैं।
पप्पू यादव की मौत न केवल उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत भी है। इस घटना के बाद सुरक्षा बलों में तैनात जवानों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जांच अभी भी जारी है और पुलिस आत्महत्या के सटीक कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।