पश्चिम बंगाल के Darjeeling और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार भारी बारिश के कारण भयंकर भूस्खलन ने विनाशकारी तबाही मचाई है. 4 अक्टूबर 2025 की शाम से शुरू हुई इस आपदा में अब तक 23 से 28 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. यह त्रासदी 2015 के बाद दार्जिलिंग क्षेत्र में सबसे भयावह मानी जा रही है, जब करीब 40 लोगों की जान गई थी.
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार रात से रविवार सुबह तक केवल 12 घंटों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई, जिसने पूरे उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों को तबाही की चपेट में ला दिया. इस अभूतपूर्व बारिश ने Darjeeling, मिरिक, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी जिलों में 35 से अधिक स्थानों पर भूस्खलन को जन्म दिया. गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनित थापा ने पुष्टि की कि यह पिछले एक दशक का सबसे विनाशकारी भूस्खलन है.
इस भीषण आपदा में मरने वालों में कई बच्चे भी शामिल हैं, जो इस त्रासदी को और भी दर्दनाक बना देता है. सबसे अधिक मौतें मिरिक क्षेत्र में हुई हैं, जहां अकेले 11 लोगों की जान चली गई. दार्जिलिंग उपखंड में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में 5 लोगों ने दम तोड़ा. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और जिला प्रशासन द्वारा संकलित रिपोर्ट के अनुसार, सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धार गांव, नागराकाटा और मिरिक झील क्षेत्र से मौतों की खबरें आई हैं.
अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है क्योंकि कई लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं और बचाव दल लगातार उन्हें खोजने का प्रयास कर रहे हैं. उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया और कहा कि जान-माल का नुकसान बेहद दुखद है.
बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान भयावह है और पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. रविवार को दुधिया में स्थित लोहे का पुल पूरी तरह से ढह गया, जो सिलीगुड़ी को मिरिक और दार्जिलिंग से जोड़ता था. राष्ट्रीय राजमार्ग 10 चितरे में पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है. मिरिक-सुखियापोखरी सड़क मोटी मिट्टी और मलबे के नीचे दब गई है. कर्सियांग रोड, रोहिणी रोड और पंखाबाड़ी रोड भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं. सिक्किम राज्य से भी सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे पूरा क्षेत्र अलग-थलग हो गया है.
यह आपदा उस समय आई जब दुर्गा पूजा के बाद हजारों पर्यटक अपनी छुट्टियां मनाने के लिए दार्जिलिंग की खूबसूरत पहाड़ियों पर आए हुए थे. सैकड़ों पर्यटक अब मिरिक, घूम और लेपचाजगत जैसे लोकप्रिय गंतव्यों पर फंसे हुए हैं. कोलकाता, हावड़ा और बंगाल के अन्य हिस्सों से आए परिवार और समूह अपने होटलों और होमस्टे में कैद हैं क्योंकि सभी मुख्य सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें, राज्य पुलिस और जिला प्रशासन की इकाइयां मिलकर 40 से अधिक भूस्खलन प्रभावित स्थानों पर गहन बचाव अभियान चला रही हैं. भारी मिट्टी हटाने वाली मशीनरी का उपयोग करके मलबे से फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के बयान के अनुसार, मिरिक में 7 घायलों को बचा लिया गया है. नागराकाटा के धार गांव में मलबे से कम से कम 40 लोगों को सफलतापूर्वक बचाया गया, जहां कई घर भूस्खलन में पूरी तरह नष्ट हो गए थे.
कर्सियांग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक रॉय ने बताया कि अब तक 23 शव मलबे से निकाले जा चुके हैं और दो और लोगों के शव निकालने की कोशिश जारी है. उन्होंने कहा कि फिलहाल टिंधरिया रोड चालू है और वे मिरिक में फंसे पर्यटकों को 3-4 घंटों में निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की, हालांकि राशि का उल्लेख नहीं किया. उन्होंने कहा कि वह 6 अक्टूबर को उत्तर बंगाल का दौरा करेंगी और क्षेत्र की स्थिति का आकलन करेंगी. रविवार को अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक के बाद उन्होंने कहा कि शनिवार रात उत्तर बंगाल में अचानक 12 घंटों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई. मुख्यमंत्री ने फंसे हुए पर्यटकों से अनुरोध किया कि वे घबराएं नहीं और जहां हैं वहीं रहें. उन्होंने होटल मालिकों से भी अपील की कि वे पर्यटकों से अधिक पैसे न लें.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौतों पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक जताते हुए कहा कि यह घटना अत्यंत दर्दनाक है और उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.
गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन ने सुरक्षा उपायों के तहत सभी पर्यटन स्थलों को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया है. प्रशासन ने सलाह जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे घरों में ही रहें और जब तक बिल्कुल आवश्यक न हो, बाहर न निकलें. आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं जहां संकट में फंसे लोग मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं.
भारतीय मौसम विभाग ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग समेत उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के लिए 6 अक्टूबर तक रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है और मिट्टी की नाजुक स्थिति के कारण और अधिक भूस्खलन होने की संभावना बताई है. अधिकारियों ने निवासियों और पर्यटकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है.
दार्जिलिंग सांसद राजू बिस्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस आपदा को राज्य स्तरीय आपदा घोषित करने की मांग की है ताकि प्रभावित क्षेत्रों को तुरंत अतिरिक्त संसाधन और धनराशि मिल सके. इस त्रासदी ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण और पर्यावरणीय क्षरण के खतरों को उजागर कर दिया है, जो ऐसी प्राकृतिक आपदाओं को और भी घातक बना देते हैं.