रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें शेयर बाजार में मुनाफे का सपना दिखाकर एक सीनियर डॉक्टर से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी की गई है। यह घटना संगठित अपराध का स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों – पति, पत्नी, भाई और बहन ने मिलकर इस साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के इस मामले में पीड़ित डॉक्टर बी. बालाकृष्णा हैं, जो राष्ट्रपति महावीर चिकित्सालय में सेवारत हैं। आरोपी मनोज चांवला, उसकी पत्नी खुशबू चांवला और उनके भाई-बहन ने मिलकर यह जाल बिछाया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने कोविड-19 के दौरान बढ़ी पारिवारिक नजदीकियों का फायदा उठाते हुए डॉक्टर का विश्वास जीता और फिर उन्हें शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रेरित किया1।
धोखाधड़ी की पूरी कहानी
मामले की शुरुआत तब हुई जब आरोपियों ने डॉक्टर को शेयर बाजार में तगड़ा मुनाफा दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि वे स्टॉक मार्केट में एक्सपर्ट हैं और डॉक्टर के पैसे को कई गुना बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर के भोलेपन का फायदा उठाते हुए, आरोपियों ने धीरे-धीरे उनसे बड़ी रकम हासिल कर ली। शुरुआत में छोटी राशि से भरोसा बनाकर, बाद में आरोपियों ने कुल मिलाकर 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक का चूना लगाया।
जब डॉक्टर ने मुनाफे के बारे में पूछा तो आरोपियों ने उन्हें यह कहकर टाला कि अभी मार्केट में उतार-चढ़ाव चल रहा है और जल्द ही अच्छा रिटर्न मिलेगा। महीनों तक इंतजार के बाद जब डॉक्टर ने अपनी मूल राशि वापस मांगी, तो आरोपियों ने साफ इनकार कर दिया और संपर्क तोड़ लिया। इसके बाद डॉक्टर को समझ आया कि वे एक बड़े जाल में फंस गए हैं।
साइबर क्राइम की नई तकनीक
यह मामला आधुनिक साइबर फ्रॉड की एक नई मिसाल है, जहां आरोपियों ने पारंपरिक रिश्तों का दुरुपयोग करके डिजिटल धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में आमतौर पर पैसे का लेन-देन ऑनलाइन बैंकिंग, UPI या अन्य डिजिटल माध्यमों से किया जाता है, जो ट्रेसिंग को मुश्किल बनाता है। इस केस में भी संभावना है कि आरोपियों ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स या बेनामी बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया हो।
पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित डॉक्टर की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ साइबर क्राइम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साइबर सेल की टीम आरोपियों के बैंक ट्रांजैक्शन, फोन कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
चेतावनी और सावधानियां
यह घटना इस बात की चेतावनी है कि शेयर बाजार में तेज मुनाफे के नाम पर लोगों को कैसे बेवकूफ बनाया जा रहा है। पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह है कि लोग केवल सेबी रजिस्टर्ड ब्रोकर्स और एडवाइजर्स के साथ ही निवेश करें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति या संदिग्ध ऐप पर पैसा लगाने से बचें और बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले बैंक या पुलिस से सलाह लें।