दुर्ग नगर निगम में कांग्रेस पार्षदों के 22 सवालों से गर्माएगा प्रश्नकाल, महापौर निधि का मांगा हिसाब

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम में आगामी 18 सितंबर को होने वाली सामान्य सभा की बैठक में कांग्रेस पार्षदों के तेवर तेज दिखाई दे रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले की अगुवाई में 11 कांग्रेस पार्षदों ने सोमवार को निगम सचिवालय पहुंचकर कुल 22 महत्वपूर्ण प्रश्न दाखिल किए हैं, जिससे प्रश्नकाल में गर्मागर्म बहस होने की पूरी संभावना है।

विपक्षी दल कांग्रेस के पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और अनियमितताओं को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं। प्रमुख मुद्दों में स्वामित्व की भूमि के अनधिकृत उपयोग, लाइट खरीदी में कथित भ्रष्टाचार, पेयजल सप्लाई व्यवस्था में फिजूलखर्च और आवारा मवेशियों की धरपकड़ में लापरवाही जैसे गंभीर विषय शामिल हैं।

कांग्रेस पार्षदों की सबसे बड़ी मांग पार्षद निधि, महापौर निधि और विधायक निधि के खर्च का पूरा ब्योरा सामने लाने की है। पार्षदों ने नई सरकार के कार्यकाल में विकास व निर्माण कार्यों के लिए राज्य शासन से प्राप्त राशि और उसके वितरण की पूरी जानकारी मांगी है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, तालाबों में बढ़ते प्रदूषण के नियंत्रण उपाय और निगम द्वारा विज्ञापन, होर्डिंग्स तथा प्रचार-प्रसार में किए गए खर्च का हिसाब भी मांगा गया है।

छत्तीसगढ़ नगर पालिक नियम 2016 के नियम 18 के अनुसार सामान्य सभा का पहला घंटा प्रश्नकाल के लिए आरक्षित होता है। निगम प्रशासन ने बताया है कि सभी प्रश्नों के लिखित उत्तर तैयार करके संबंधित पार्षदों को पहले से उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि कोई पार्षद उत्तर से संतुष्ट नहीं होता तो वह अनुपूरक प्रश्न या प्रतिप्रश्न भी पूछ सकेगा।

दिलचस्प बात यह है कि जबकि इससे पहले 20 पार्षदों ने निगम सभापति श्याम शर्मा को पत्र लिखकर विशेष सामान्य सभा बुलाने की मांग की थी, जिसमें निर्दलीय पार्षद भी शामिल थे, लेकिन प्रश्नकाल के लिए किसी भी निर्दलीय पार्षद ने कोई प्रश्न दाखिल नहीं किया है। इससे यह साफ हो रहा है कि केवल कांग्रेस पार्षद ही निगम प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए गंभीर हैं।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रश्नकाल दुर्ग नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। 18 सितंबर को होने वाली इस सभा में निगम प्रशासन के जवाब कितने संतोषजनक होंगे और जनता के मुद्दों का कितना बेहतर समाधान मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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