छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय ने जिला खनिज निधि घोटाले की जांच में तेजी लाते हुए एक साथ 18 स्थानों पर व्यापक छापेमारी अभियान चलाया है। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई बुधवार सुबह से शुरू हुई और कई बड़े शहरों में कृषि कारोबारियों तथा संबंधित व्यक्तियों के ठिकानों पर की गई है।
ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के तहत रायपुर, राजिम, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरों में पांच कृषि कारोबारियों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों को निशाना बनाया गया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने सुबह छह बजे से ही इस ऑपरेशन की शुरुआत की थी।
छापेमारी में मुख्य निशाने पर आए व्यक्तियों में विनय गर्ग, सतपाल छाबड़ा, पवन पोद्दार, शिवकुमार मोदी और उगम राज कोठारी प्रमुख हैं। रायपुर के शंकरनगर में स्थित विनय गर्ग के निवास स्थान से प्रवर्तन निदेशालय ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं। कार्रवाई के दौरान ईडी के 8-10 अधिकारी सशस्त्र बल के साथ मौजूद रहे हैं।
इस घोटाले का संबंध मुख्यतः कृषि उपकरणों की खरीद में हुई वित्तीय अनियमितताओं से है। पवन पोद्दार, जो ओडिशा के निवासी हैं, पिछले 15 वर्षों से रायपुर में कृषि सामग्रियों का व्यापक कारोबार कर रहे हैं। उनके पास ट्रैक्टर एजेंसी भी होने की जानकारी प्राप्त हुई है। अमलीडीह के लविस्टा क्षेत्र में उनके निवास पर भी ईडी के अधिकारियों ने छापा मारा है।
भिलाई तीन में स्थित अन्ना भूमि ग्रीन टेक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक शिवकुमार मोदी के घर और कार्यालय पर भी व्यापक कार्रवाई की गई है। इस कंपनी की स्थापना 2017 में की गई थी और यह कृषि से संबंधित व्यापारिक गतिविधियों में संलग्न है। छापेमारी में ईडी के छह से अधिक अधिकारी शामिल हैं और सीआरपीएफ की टीम भी सुरक्षा के लिए मौजूद है।
जिला खनिज निधि घोटाले की शुरुआत छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज तीन प्राथमिकी से हुई थी, जिसमें राज्य सरकार के अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत करके ठेकेदारों द्वारा सरकारी धन की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच की शुरुआत की थी।
आरोप के अनुसार छत्तीसगढ़ बीज निगम के माध्यम से जिला खनिज निधि की एक भारी धनराशि का दुरुपयोग किया गया है। जिला खनिज निधि खनिकों द्वारा वित्तपोषित एक ट्रस्ट है, जिसे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में स्थापित किया गया है। इसका मूल उद्देश्य खनन संबंधी परियोजनाओं और गतिविधियों से प्रभावित लोगों के लाभ के लिए काम करना था।
सूत्रों के अनुसार घोटाले की राशि लगभग 575 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में भ्रष्टाचार की संरचना भी काफी व्यापक दिखाई दे रही है, जिसमें विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को कमीशन की व्यवस्था थी। कलेक्टर को 40 प्रतिशत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी को 5 प्रतिशत, उप मंडल अधिकारी को 3 प्रतिशत और सब-इंजीनियर को 2 प्रतिशत कमीशन मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू के कार्यकाल के दौरान इन अनियमितताओं के होने की जानकारी प्राप्त हुई है। प्रवर्तन निदेशालय ने कृषि विभाग के कई अधिकारियों से भी पूछताछ की है, जिससे इस घोटाले में कृषि विभाग में भ्रष्टाचार की नई परतें खुलने की संभावना बढ़ गई है।
इस छापेमारी अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्डों को जब्त किया है। अधिकारी इन सभी सामग्रियों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि घोटाले की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और कल्याण के लिए बनाए गए जिला खनिज निधि के फंड का गलत उपयोग न केवल कानूनी रूप से गलत है बल्कि यह उन लोगों के साथ भी अन्याय है जिनके कल्याण के लिए यह राशि निर्धारित की गई थी। यह घोटाला दर्शाता है कि कैसे सरकारी योजनाओं और फंडों का दुरुपयोग करके व्यक्तिगत लाभ उठाया जा रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का हिस्सा है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में छापेमारी की थी, लेकिन इस बार की कार्रवाई अधिक व्यापक और संगठित दिखाई दे रही है। जांच एजेंसी का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रही है और सभी संभावित आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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यह घोटाला न केवल राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर प्रभाव डालता है बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है। जिला खनिज निधि जैसी योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना होता है, लेकिन इसके गलत उपयोग से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषी व्यक्तियों को उचित सजा मिलेगी। साथ ही यह कार्रवाई भविष्य में इस प्रकार के भ्रष्टाचार को रोकने में भी सहायक होगी।