छत्तीसगढ़: 22 अगस्त को 4.10 लाख कर्मचारियों की महाहड़ताल, 54 विभाग होंगे ठप

छत्तीसगढ़ में 22 अगस्त को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बेहद अहम दिन है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन (CKAF) के नेतृत्व में 4.10 लाख से ज्यादा राज्य कर्मचारी और 1.45 लाख पेंशनर सामूहिक अवकाश लेकर काम बंद आंदोलन के लिए तैयार हैं। यह हड़ताल राज्य के 54 विभागों की सेवाओं को प्रभावित कर सकती है। प्रदेशभर में इस आंदोलन का खासा असर देखा जा रहा है, जिसमें रजिस्ट्री, राजस्व, चिकित्सा, स्वास्थ्य, प्रमाण पत्र जारी करने, सफाई जैसी आवश्यक सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

कर्मचारी और पेंशनरों की मांगों में सबसे प्रमुख है केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (DA)। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता देने की मांग को प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। फेडरेशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वर्षों से राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर DA नहीं दिया जा रहा, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हैं। फेडरेशन के अनुसार हाल ही में मोदी सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाया है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में अब भी कर्मचारियों को केंद्र के बराबर DA नहीं मिल रहा।

दूसरी अहम मांग है DA एरियर्स को जीपीएफ में समायोजित करना। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, राज्य सरकार ने पूर्व में DA के एरियर्स काटे हैं और कर्मचारी यह चाहते हैं कि इस राशि को उनके जीपीएफ (General Provident Fund) खाते में समायोजित किया जाए, जिससे उनकी दीर्घकालिक बचत सुरक्षित रहे। इसी तरह वेतन विसंगति का मामला भी गंभीर है, जिसमें वे चार स्तरीय समयमान वेतनमान और वेतन में जो भिन्नता आई है, उसे दूर करने की मांग कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ कर्मचारियों और पेंशनरों के 11 सूत्रीय मांगों में निम्न बिंदु शामिल हैं:

  • केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता देना
  • DA के एरियर्स को GPF में समायोजित करना
  • वेतन विसंगति का समाधान
  • पेंशनरों को उचित राहत
  • HRA (मकान किराया भत्ता) में वृद्धि
  • सातवें वेतन आयोग की पूरी सिफारिशें लागू करना
  • संविदा कर्मचारियों को नियमित करना
  • मेडिकल सुविधाओं में सुधार
  • पदोन्नति में पारदर्शिता
  • लंबित एरियर का निपटान
  • कमर्चारियों के बच्चों को शिक्षा में विशेष सुविधा

इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16,000 संविदा कर्मचारी पहले से ही 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और छत्तीसगढ़ सर्व संविदा महासंघ ने भी समर्थन देने का निर्णय लिया है। CKAF के बैनर तले 110 कर्मचारी यूनियनें एकजुट होकर प्रदेश व्यापी आंदोलन को मजबूती दे रही हैं।

21 अगस्त को भिलाई जिले के एक निजी होटल में आयोजित समीक्षा बैठक में फेडरेशन के प्रांतीय सचिव राजेश चटर्जी, उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा और चंद्रशेखर चंद्राकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि किसी भी तरह की कमजोरी न रह जाए। भिलाई, राजनांदगांव, दुर्ग समेत अन्य जिलों में भी समीक्षा बैठकें आयोजित कर फेडरेशन ने आंदोलन को सफल बनाने की योजना बनाई। संगठन का दावा है कि राज्य के 10 लाख से ज्यादा अफसर-कर्मचारी इस हड़ताल में भाग ले रहे हैं और ‘आर-पार की लड़ाई’ के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

फेडरेशन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन चरणबद्ध है। पहले चरण में 16 जुलाई को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को 11 सूत्रीय मांगें सौंपी गई थीं, लेकिन सरकार द्वारा कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आने के कारण अब दूसरा चरण यानी सामूहिक अवकाश और कलम बंद आंदोलन का रास्ता चुना गया। यदि 22 अगस्त की हड़ताल के बाद भी सरकार मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाती है, तो आंदोलन का तीसरा चरण शुरू होगा, जिसमें अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरने की तैयारी है।

प्रदेश की जनता पर इसका प्रभाव भी व्यापक रहेगा। रजिस्ट्री, राजस्व, प्रमाण पत्र, चिकित्सा, स्वास्थ्य, सफाई जैसी सेवाएं बाधित होंगी। कई विभागों में रोजाना होने वाले सरकारी कार्य भी ठप रहेंगे। आमजन को सर्टिफिकेट, जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि दस्तावेजीकरण जैसे जरूरी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मजदूरों, छात्रों, किसानों समेत सभी वर्गों के लिए सरकारी सेवाओं का ठप होना चिंता की बात है।

कर्मचारियों और पेंशनरों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की है। महंगाई भत्ता, वेतन विसंगति, GPF, HRA, सातवें वेतन आयोग की पूरी सिफारिशें इन मुद्दों पर सरकार ने स्पष्ट नीति नहीं बनाई है। आंदोलनकारी नेताओं के अनुसार, अगर सरकार वाजिब मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लेती है तो राज्यभर में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से ठप हो सकता है।

इस बीच मुख्यमंत्री और सरकार के उच्च अधिकारी फेडरेशन के नेताओं के संपर्क में हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है। अधिकारी वर्ग आंदोलित कर्मचारियों को आश्वासन दे रहे हैं लेकिन प्रत्यक्ष रूप से कोई आदेश नहीं निकल पा रहा है। इधर, कर्मचारियों और पेंशनरों की हड़ताल के कारण आम जनता को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने साफ किया है कि यह आंदोलन किसी राजनैतिक दल के प्रभाव में नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के लिए स्वायत और लोकतांत्रिक रूप से संचालित किया जा रहा है। फेडरेशन ने सभी जिलों में माइक्रोप्लानिंग करके हड़ताल को पूरी तरह सफल बनाने का संकल्प लिया है।

समाज के विभिन्न वर्गों से भी कर्मचारियों के इस आंदोलन को समर्थन मिलने लगा है। कई पेंशनर्स एसोसिएशन, संविदा कर्मचारी संघ, महिला कर्मचारी संगठन समेत शिक्षक संघ ने भी फेडरेशन को अपना समर्थन दिया है।

इस पूरे आंदोलन से छत्तीसगढ़ सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द से जल्द कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करे। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो राज्य के लाखों कर्मचारियों की नाराजगी प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में चुनौती बन सकती है।

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता आज इंतजार कर रही है कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर क्या फैसला लेती है। 22 अगस्त को किस तरह से सरकारी सेवाएं बाधित होती हैं, कितना बड़े पैमाने पर कर्मचारी और पेंशनर आंदोलन में भाग लेते हैं—इन सबका परिणाम आने वाले दिनों में प्रदेश की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर असर डालेगा।

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