नई दिल्ली – भारतीय शतरंज के लिए यह गौरव का क्षण है। FIDE विमेंस वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में पहली बार दो भारतीय महिला खिलाड़ी आमने-सामने होंगी। कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल कर भारतीय शतरंज का मान बढ़ाया है।
सेमीफाइनल में रोमांचक जीत
अनुभवी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने सेमीफाइनल में चीन की दिग्गज खिलाड़ी टिंगजी लेई को टाई-ब्रेकर में हराकर फाइनल का टिकट पक्का किया। यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा, जिसमें हम्पी ने अपनी अनुभवजन्य रणनीति और धैर्य का परिचय दिया।
वहीं, महज 20 वर्षीय दिव्या देशमुख पहले ही फाइनल में अपनी जगह बना चुकी थीं। महाराष्ट्र की इस युवा प्रतिभा ने टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाते हुए कई दिग्गज खिलाड़ियों को मात दी है।
पहली बार ऑल-इंडियन फाइनल
यह पहली बार है जब FIDE विमेंस वर्ल्ड कप के फाइनल में दोनों खिलाड़ी भारत से हैं। पिछले संस्करणों में आमतौर पर चीन, रूस या यूक्रेन की खिलाड़ियों का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार भारत ने अपना वर्चस्व स्थापित किया है।
भारतीय शतरंज के लिए मील का पत्थर
दिव्या देशमुख की उपलब्धि
- केवल 20 साल की उम्र में विश्व कप फाइनल
- आक्रामक खेल शैली और रणनीतिक समझ
- युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत
कोनेरू हम्पी का अनुभव
- भारतीय महिला शतरंज की दिग्गज खिलाड़ी
- दशकों का अंतरराष्ट्रीय अनुभव
- टाई-ब्रेकर में शानदार प्रदर्शन
वैश्विक शतरंज में भारत की बढ़ती ताकत
यह उपलब्धि भारतीय शतरंज की बढ़ती शक्ति को दर्शाती है। विश्वनाथ आनंद, प्रज्ञाननंदा, गुकेश जैसे पुरुष खिलाड़ियों के बाद अब महिला खिलाड़ी भी वैश्विक मंच पर अपना परचम लहरा रही हैं।
फाइनल की विजेता को विश्व चैंपियनशिप में सीधे प्रवेश मिलेगा, जो इस मुकाबले को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। चाहे हम्पी जीतें या दिव्या, भारत की ही जीत होगी।
यह मैच न केवल दो खिलाड़ियों के बीच होगा, बल्कि अनुभव और युवा जोश के बीच एक रोमांचक संघर्ष भी होगा।