बीएसपी की नंदिनी टाउनशिप, स्ट्रीट नंबर-36 के एक क्वार्टर में सोमवार को अचानक आग लग गई। जब तक लोग कुछ समझ पाते, 35 साल की जागेश्वरी साहू और उनकी 7 साल की बेटी दिव्यांशी इस आग की चपेट में आ चुकी थीं। दोनों का कमरा अंदर से बंद था और जब दरवाजा तोड़ा गया, तो मां-बेटी बुरी तरह झुलसी हुई मिलीं।
बात यहीं खत्म नहीं होती। जागेश्वरी के पिता, सीताराम साहू, जो खुद बीएसपी से रिटायर्ड हैं, रोज की तरह उस दिन भी मॉर्निंग वॉक पर गए थे। जैसे ही लौटे, देखा घर से धुंआ उठ रहा है। घबराकर उन्होंने पड़ोसियों को बुलाया, फिर सबने मिलकर दरवाजा तोड़ा। अंदर जाकर जो मंजर देखा, वो किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
पुलिस तुरंत पहुंची और जांच शुरू हुई। शुरुआती जांच में पता चला कि घर और कमरा दोनों ही अंदर से बंद थे। ऐसे में पुलिस को ये मामला आत्महत्या जैसा लग रहा है, लेकिन अभी जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
अब इस पूरे मामले में एक और एंगल है। पता चला है कि जागेश्वरी का अपने पति के साथ पिछले पांच सालों से विवाद चल रहा था और वे पिता के घर अलग रह रही थीं। पति से तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है, और अगले ही दिन यानी 22 जुलाई को कोर्ट में पेशी थी। कहीं ना कहीं ये घरेलू विवाद भी इस घटना की वजह हो सकता है।
फिलहाल, दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस हर दिशाओं से जांच कर रही है। थाने के प्रभारी पारस ठाकुर कहते हैं, “हम हर पहलु पर जांच कर रहे हैं, पूरी रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।”
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया है। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या वाकई ये आत्महत्या थी, या फिर कोई और वजह है? इसकी सही तस्वीर तो जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।